दानवीर: अजीम प्रेमजी ने 21 की उम्र में संभाली Wipro की कमान, 77 की उम्र में 67% कर दी दान

YourStory हिंदी की 'दानवीर' सीरीज में आज हम आपको बताने जा रहे हैं Wipro Limited के फाउंडर चेयरमैन अजीम प्रेमजी द्वारा समाज, शिक्षा और देशहित में दिए गए दान के बारे में.

दानवीर: अजीम प्रेमजी ने 21 की उम्र में संभाली Wipro की कमान, 77 की उम्र में 67% कर दी दान

Sunday February 12, 2023,

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अक्टूबर, 2022 में हुरुन इंडिया (Hurun India) और एडेलगिव ने 'एडेलगिव हुरुन इंडिया परोपकार सूची 2022' (EdelGive Hurun India Philanthropy List 2022) जारी की. सॉफ्टवेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) के 77 वर्षीय अजीम प्रेमजी (Azim Premji) 484 करोड़ रुपये के वार्षिक दान के साथ इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर रहे. अजीम प्रेमजी पिछले दो वर्षों से लगातार शीर्ष स्थान पर थे. प्रेमजी एकमात्र लिविंग इंडियन हैं, जिन्हें सदी के सबसे खास हुरुन परोपकारी लोगों में शामिल किया गया है.

2020-21 में उन्‍होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन (Azim Premji Foundation) को 9,713 करोड़ रुपये दान किए. अजीम प्रेमजी के बारे में कहा जाता है कि वे प्रतिदिन 27 करोड़ रुपए दान करते हैं. एडेलगिव फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड महामारी के दौरान भारत में अजीम प्रेमजी ने सबसे ज्‍यादा पैसे दान किए थे.

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, विप्रो और विप्रो एंटरप्राइजेज ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए 1,125 करोड़ रुपए दान दिए.

एडेलगिव फाउंडेशन और हुरुन इंडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2019-20 के दौरान अजीम प्रेमजी ने 7 हज़ार 904 करोड़ रुपये का दान किया है. इस तरह उन्होंने करीब 22 करोड़ रुपये हर रोज दान किए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार दानवीरों की इस खास सूची में अजीम प्रेमजी का नाम सबसे ऊपर था.

अप्रैल 2013 में उन्होंने कहा कि वह पहले ही अपनी निजी संपत्ति का 25 प्रतिशत से अधिक दान में दे चुके हैं.

जुलाई 2015 में, उन्होंने विप्रो में अपनी हिस्सेदारी का 18% अतिरिक्त दान दे दिया था.

मार्च, 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अजीम प्रेमजी ने 52,750 करोड़ रुपये (7.5 अरब डॉलर) बाजार मूल्य के शेयर दान कर दिए थे. प्रेमजी ने जो रकम दान की, वह विप्रो लिमिटेड की 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है. उनके फाउंडेशन ने बयान जारी करके कहा है कि इस पहल से, प्रेमजी द्वारा परोपकार कार्य के लिए दान की गई कुल रकम 145,000 करोड़ रुपये (21 अरब डॉलर) हो गई है, जोकि विप्रो लिमिटेड के आर्थिक स्वामित्व का 67 प्रतिशत है.

इसके साथ ही बयान में कहा गया, "अजीम प्रेमजी ने अपनी निजी संपत्तियों का अधिक से अधिक त्याग कर और धर्माथ कार्य के लिए उसे दान देकर परोपकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाई है, जिससे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के परोपकार कार्यो को सहयोग मिलेगा."

परोपकार की दो संस्थाओं - अजीम प्रेमजी ट्रस्ट और अजीम प्रेमजी फिलैंथ्रॉपिक इनिशिएटिव को प्रमोटर समूह का हिस्सा माना जाता है और इनकी विप्रो में क्रमश: 10.2 फीसदी और 0.27% फीसदी हिस्सेदारी है. इस हिस्सेदारी की वजह से पिछले पांच साल में दोनों संस्थाओं के फंड में काफी बढ़त हुई है. विप्रो ने पिछले वर्षों में बढ़िया लाभांश दिया है औेर चार बार शेयरों का बायबैक किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते चार साल की बात करें तो साल 2017, 18, 2020 और 2021 में इन संस्थाओं की बायबैक रकम 1964 करोड़ रुपए, 5894 करोड़ रुपए, 1318 करोड़ रुपए और 8156 करोड़ रुपए रही है. वही साल 2020 में विप्रो की तरफ से जो बायबैक की गई वो 9500 करोड़ की थी जिसकी 86 फीसदी रकम अजीम प्रेमजी के परोपकारी संस्थाओं को मिली है.

इस तरह, जुलाई 2021 तक, पिछले पांच साल में उनके नेतृत्व वाली संस्थाओं ने विप्रो कंपनी के शेयरों से परोपकारी कार्यों के​ लिए 18 हजार करोड़ रुपये जुटाए.

वह 'द गिविंग प्लेज' (The Giving Pledge) के लिए साइन अप करने वाले पहले भारतीय बने. 'द गिविंग प्लेज' वॉरेन बफेट (Warren Buffett) और बिल गेट्स (Bill Gates) के नेतृत्व में चलाया जाने वाला एक अभियान है. यह अभियान सबसे धनी लोगों को परोपकारी कार्यों के लिए अपनी अधिकांश संपत्ति देने की प्रतिबद्धता बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है. अजीम प्रेमजी इस क्लब में शामिल होने वाले रिचर्ड ब्रैनसन (Richard Branson) और डेविड सेन्सबरी (David Sainsbury) के बाद तीसरे गैर-अमेरिकी हैं.

अजीम प्रेमजी ने 1966 में पिता के देहांत के बाद महज 21 साल की उम्र में खुद विप्रो की कमान संभाल ली. उन्होंने साल 2001 में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को 2.2 बिलियन दान के साथ शुरू किया, जो वर्तमान में भारत के एजुकेशन सेक्टर में कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ साझेदारी के साथ काम करता है. अब तक कुल 3.50 लाख सरकारी स्कूल इस फाउंडेशन से लगातार समर्थन प्राप्त कर रहे हैं. फाउंडेशन का मकसद सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराना है.

अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में टैलंट को बढ़ावा देने और रिसर्च के लिए बेंगलुरु में Azim Premji University की स्थापना की गई.

पांच दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने विप्रो का सफल नेतृत्व किया. एक बड़ी आईटी कंपनी बनाने के साथ ही उद्योग जगत में उनकी अत्यंत उदार परोपकारी उद्योगपति की छवि है. वह 30 जुलाई 2019 को विप्रो के कार्यकारी चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हुए.

अजीम प्रेमजी कहते हैं, "अमीरी उन्हें रोमांचित नहीं करती है. उन्हें दृढ़ विश्वास है कि जिन्हें धन रखने का विशेषाधिकार है, उन्हें उन लाखों लोगों के लिए बेहतर दुनिया बनाने में योगदान देना चाहिए, जो बहुत कम विशेषाधिकार प्राप्त हैं."

बता दें कि प्रेमजी वर्ष 1999 से लेकर वर्ष 2005 तक भारत के अमीरों की सूची में शीर्ष स्थान पर रहे हैं.

अजीम प्रेमजी के बिजनेस और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2005 में ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार से नवाजा. वर्ष 2011 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया.

अजीम प्रेमजी फैराडे मेडल (Faraday Medal) पाने वाले अजीम पहले भारतीय हैं. फ्रांस की सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर (Knight of the Legion of Honor) से सम्मानित किया. 2017 में उन्हें परोपकारी कार्यों के लिए The Carnegie Medal of Philanthropy से नवाजा गया था.

प्रेमजी बहुत ही सामान्य जीवन जीने में विश्वास करते हैं. कहा जाता है कि जब वह कंपनी के काम से बाहर जाते हैं तो हमेशा ऑफिस गेस्ट हाउस में ही रुकते हैं. वे देश में यात्रा के दौरान इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं. एयरपोर्ट आने-जाने के लिए अपनी कार या टैक्सी की बजाय ऑटो से भी चले जाते हैं.

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