पुराने मोबाइल को नए जैसा बनाकर आधी कीमत पर बेचता है स्टार्टअप Zobox

दिल्ली स्थित Zobox एक ऐसा स्टार्टअप है जो रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स बेचता है और वो भी लगभग आधी कीमत पर. इसकी शुरुआत साल 2020 में हुई थी. नीरज चोपड़ा इसके फाउंडर हैं, जबकि विवेक बंसल और नवीन गौड़ को-फाउंडर हैं.

पुराने मोबाइल को नए जैसा बनाकर आधी कीमत पर बेचता है स्टार्टअप Zobox

Friday November 17, 2023,

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आज आप जब कभी भी किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मोबाइल खरीदने जाते हैं तो वहां आपको रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स भी दिखाई देते हैं. और ये लगभग आधी कीमत पर मिलते हैं. रीफर्बिश्ड से मतलब है कि पुराने फोन को नए जैसा बनाकर बेचा जाता है. अब जहां एक ओर ई-वेस्ट दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स से इसे कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. हाल के दिनों में Flipkart, Amazon जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है.

दिल्ली स्थित Zobox एक ऐसा स्टार्टअप है जो रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स बेचता है और वो भी लगभग आधी कीमत पर. इसकी शुरुआत साल 2020 में हुई थी. नीरज चोपड़ा इसके फाउंडर हैं, जबकि विवेक बंसल और नवीन गौड़ को-फाउंडर हैं.

नीरज ने हाल ही में YourStory से बात की, जहां उन्होंने Zobox की शुरुआत, बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया.

नीरज चोपड़ा का पालन-पोषण हांगकांग में हुआ था और उनके पास इलेक्ट्रॉनिक्स में अच्छा-खासा अनुभव है. फिर जब वे भारत लौटे तो उन्होंने इसी सेक्टर में अपना खुद का वेंचर शुरू करने का फैसला किया.

नीरज चोपड़ा बताते हैं, "साल 2020 में हमने Zobox को लॉन्च किया. यह एक B2B और B2C इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड है जिसने रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट को पूरी तरह से बदल दिया. हमारा मिशन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट को कम करना और किफायती कीमतों पर हाई क्वालिटी वाले पुनर्निर्मित उपकरण उपलब्ध कराना था. हाई-एंड, किफायती स्मार्टफोन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ Zobox ने तेजी से पुनर्निर्मित मोबाइल फोन में अग्रणी के रूप में पहचान हासिल की. हमने प्रोडक्ट्स की शानदार रेंज लॉन्च की, जिसमें ऐप्पल, सैमसंग, गूगल जैसे प्रसिद्ध ब्रांड शामिल हैं. इनमें से सभी की परफॉर्मेंस को टेस्ट किया गया है."

नीरज आगे बताते हैं, "निश्चित रूप से, ई-वेस्ट, जिसे अक्सर इलेक्ट्रॉनिक कचरे के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी समस्या है जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है. ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2020 के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया में ई-वेस्ट का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो सालाना (2019 तक) लगभग 3.2 मिलियन टन का उत्पादन करता है, केवल चीन (10 मिलियन टन) और अमेरिका (6.9 मिलियन टन) से पीछे है. यह समस्या की गंभीरता को उजागर करता है."

Zobox के को-फाउंडर (L-R) नवीन गौड़, नीरज चोपड़ा और विवेक बंसल

Zobox की टीम - (L-R) नवीन गौड़ (को-फाउंडर), नीरज चोपड़ा (फाउंडर) और विवेक बंसल (को-फाउंडर)

वे कहते हैं, "रीफर्बिश्ड टेक्नोलॉजी इस वातावरण में टिकाऊ उपभोग का एक प्रमुख सिद्धांत है. वे इलेक्ट्रॉनिक्स को रीफर्बिश और रीसेल करके नए डिवाइसेज के प्रोडक्शन की मांग को काफी कम कर देते हैं, जो ई-वेस्ट का एक प्रमुख स्रोत है. लंबे समय तक चलने के कारण, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का न केवल पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है, बल्कि नए कंपोनेंट्स के प्रोडक्शन में इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल के खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को भी सीमित किया जाता है."

भारत में रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स की क्वालिटी में लगातार सुधार हो रहा है. नीरज बताते हैं, "अपने इनोवेटिव और टेक प्लेटफॉर्म ज़ोबिज़ एप्लिकेशन ZRP - Zobox Rated Phones अप्रोच के साथ, Zobox ने रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट को पूरी तरह से बदल दिया है. हमारे गैर-मेट्रो शहरों और कस्बों से एक बड़ी मांग उठती है और हम इन बाजारों में गहराई से प्रवेश कर रहे हैं. हमने अपने टियर III शहरों में दो साल पहले ही रिसर्च किया है और पायलट प्रोजेक्ट चलाया है और निष्कर्ष निकाला है कि B2B बेस लाइन सेगमेंट, जो भारतीय बाजार में मरम्मत किए गए सामानों का लगभग 90% हिस्सा है, खासकर टियर II, टियर III और टियर IV शहरों में. ZRP फॉर्मूलेशन के कारण छोटे व्यवसाय के मालिकों को एक फायदा है क्योंकि कोई भी मिसमैच या ख़राब फोन नहीं होगा, और वे छोटे लॉट खरीदकर विस्तार कर सकते हैं. निर्बाध और कुशल संचालन के लिए टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) द्वारा इसमें सुधार किया गया है."

हालांकि, Zobox ने अभी तक कोई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है. यह अभी तक बूटस्ट्रैप्ड कंपनी है. नीरज ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इसमें 80 लाख रुपये का निवेश किया है. और उन्हें अगले वित्तीय वर्ष तक लगभग 50 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने की उम्मीद है.

Zobox

Zobox को शुरू करते समय आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? इसके जवाब में फाउंडर नीरज चोपड़ा कहते हैं, "जब हम एक रीफर्बिश गैजेट स्टार्टअप शुरू करने के लिए आगे बढ़ रहे थे तो हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था क्योंकि इसके लिए अत्यधिक धैर्य की आवश्यकता होती है. इस सेक्टर में टेक्नोलॉजी की कमी, बूटस्ट्रैप्ड और सही हायरिंग की आवश्यकता होती है. जिन प्रमुख कारकों में हमने योगदान दिया है उनमें से एक टेक फ्लो है और Zobiz ऐप की शुरूआत है जो बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स खुदरा विक्रेताओं को सुविधा प्रदान करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य रीफर्बिश्ड गैजेट्स खरीदते समय खुदरा विक्रेताओं और ग्राहकों को सबसे सुविधाजनक तरीके से सुविधा प्रदान करना है."

अंत में, Zobox को लेकर भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए नीरज बताते हैं, "अब हम कारोबार के विस्तार पर फोकस करेंगे, और हमें पूरे भारत भर में अपने पुनर्निर्मित केंद्रों की दृश्यता बढ़ाने की उम्मीद है. इसके अलावा, मेरा इरादा रिफर्बिश्ड उद्योग के भविष्य के अनुसंधान और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने और लैपटॉप की ओर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए इसे और अधिक टेक्निकली एडवांस बनाने का है. हम अब एक रीसाइक्लिंग फैक्टरी लगा रहे हैं क्योंकि ई-वेस्ट पर्यावरण के लिए हानिकारक है. इसके अलावा, Zobox सक्रिय रूप से कार्बन फुटप्रिंट्स कटौती को कम करने के लिए काम कर रहा है और हमने भारत के प्रमुख शहरों में Zo Hub खोलने और Zo Army के नाम से जाने जाने वाले कस्बों और कर्मचारियों के एक बेड़े तक पहुंचने की योजना बनाई है. हमारा लक्ष्य ग्रामीण भारत में कम से कम 50000 लोगों को रोजगार दिलाना है."