मिलें 'तनु वेड्स मनु' और 'सांड की आंख' जैसी फिल्मों के गाने लिखने वाले राजशेखर से, कुछ यूं तय हुआ मधेपुरा से मुंबई तक का सफर

By प्रियांशु द्विवेदी
January 17, 2020, Updated on : Wed Feb 19 2020 05:17:30 GMT+0000
मिलें 'तनु वेड्स मनु' और 'सांड की आंख' जैसी फिल्मों के गाने लिखने वाले राजशेखर से, कुछ यूं तय हुआ मधेपुरा से मुंबई तक का सफर
बॉलीवुड के बेहतरीन गीतकारों में से एक हैं राज...
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मधेपुरा से दिल्ली और फिर मुंबई तक के सफर में राज ने अपना नाम बेहतरीन गीतकारों की लिस्ट में शामिल कर लिया है। तनु वेड्स मनु से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राज गीतों की दुनिया में ऐसे आगे बढ़े कि फिर कभी नहीं रुके। बॉलीवुड और गीत संगीत की दुनिया को राज किस तरह देखते हैं, आईये जानें इस बार के फिल्मी फ्राइडे में बॉलीवुड लिरिसिस्ट राजशेखर की ज़िंदगी के संघर्ष और भविष्य की तैयारियों के बारे में...

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राजशेखर, फोटो: सोशल मीडिया

बिहार के मधेपुरा से दिल्ली और फिर दिल्ली से मुंबई के सफर में राजशेखर अब बॉलीवुड में एक जाना माना नाम हैं। अपने लिखे गीतों से लोगों के दिलों में उतर जाने वाले गीतकार राजशेखर ने योरस्टोरी से अपने जीवन और बॉलीवुड तक की यात्रा से जुड़े कुछ खास पहलुओं पर बात की।


राजशेखर कहते हैं,

“मैं बॉलीवुड के बुखार में पीड़ित नहीं था। मैं वो लड़का था, जिसे पता नहीं था कि जीवन में क्या करना है?”


राजशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। इस दौरान राज एनडीटीवी के साथ काम भी कर रहे थे। राजशेखर के अनुसार उनके कई दोस्त उस दौरान मुंबई आ चुके थे, लेकिन वो दिल्ली में रहकर भी अपनी पढ़ाई कर रहे थे।


राजशेखर कहते हैं,

“मेरे कई दोस्त तब मुंबई आ चुके थे और उनके बहकावे में आकर साल 2005 में मैं भी मुंबई आ गया। तब मैंने यह नहीं सोचा था कि मुझे गाने लिखने हैं या फिल्मों में कुछ करना है।”

गौरतलब है कि राजशेखर इस बीच अपने घर बिहार लौट आए, हालांकि कुछ समय बाद साल 2008 में राज फिर से मुंबई आ गए।  


राजशेखर गीतकार कैसे बने, इसे लेकर वो कहते हैं,

“मुझे कभी नहीं लगा कि मुझे गीतकार बनना है। तब मैं असिस्टेंट निर्देशक के तौर पर काम कर रहा था। मुझे लगता है तब मैं बहुत बुरा असिस्टेंट निर्देशक था।”


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एक कार्यक्रम में प्रस्तुति से पहले हंसी ठहाकों के बीच तैयारी करते राज

बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक आनंद एल राय तब 'तनु वेड्स मनु' फिल्म बना रहे थे और राजशेखर के दोस्त हिमांशु शर्मा फिल्म के लेखक थे। राजशेखर कहते हैं,

“आनंद ने मुझसे कहा कि तुम इतनी अच्छी कविताएं लिखते हो, तुम हमारे गाने के लिए डमी लिरिक्स क्यों नहीं लिख देते? मैंने जब पहला गाना लिखा तो आनंद ने कहा कि ये तो असली गाने जैसा है। इसी बीच मैंने फिल्म के बाद एक के बाद एक करके कई गाने लिख दिये।”

राजशेखर कहते हैं,

“फिल्म के बाद मुझे हर तरफ से खूब प्यार मिलने लगा तो मुझे लगा कि शायद मैं गीतकार ही हूँ और कुछ इस तरह यह यात्रा शुरू हो गई।”


मुंबई जाकर फिल्मों में गीत लिखने तक की यात्रा के संघर्ष के बारे में भी राजशेखर खुलकर अपनी बात रखी। राजशेखर कहते हैं,

”मैं बिहार के गाँव से आता हूँ, जब मैं मुंबई आया था, तब हमारे गाँव में बिजली भी नही थी। मुझे कभी संघर्ष महसूस नहीं हुआ, क्योंकि हमारे पास पहले से अधिक सुविधाएं नहीं थीं, मुझे पंखा भी विलासिता की चीज़ लगती है। मुझे सिर्फ मुंबई की लोकल ट्रेन में चढ़ना एकलौता संघर्ष लगा, क्योंकि उनमे भीड़ बहुत होती है।”

राजशेखर के अनुसार अपने काम कुछ नया करना ही उनका रोज़ का संघर्ष है। इंडस्ट्री में तमाम दिग्गज गीतकारों के बीच कुछ नया करते हुए खुद की पहचान बनाए रखने को ही राज अपना संघर्ष मानते हैं।


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एक कार्यक्रम में राज

दूर से राजशेखर की यात्रा भले ही कुछ लोगों को आसान लग सकती हैं लेकिन राज कहते हैं,


“ऐसा जरूर था कि तनु वेड्स मनु के लिए मुझे अधिक संघर्ष नहीं करना पड़ा, लेकिन उसके बाद मेरे पास तीन साल तक कोई काम नहीं था। ऐसे में तमाम तारीफ़ों के बाद भी आसानी से काम नहीं मिल सका। जब मेरे पास काफी दिनों तक काम नहीं आया तब मैंने टीवी का रुख किया।”

राज आगे कहते हैं,


“तब टेलिविजन के लिए लेखन और कुछ खूबसूरत लड़कियों की चिट्ठियों ने मुझे मुंबई में बनाए रखने में मदद की।”


नए और भावी लेखकों और गीतकारों को लेकर राज कहते हैं,


“हम मुंबई में इसलिए सर्वाइव नहीं कर सके कि हम छोटे शहरों से थे। जो भी गीतकार यहाँ टिक सका वो अपने भीतर अपना गाँव लेकर आया था। वो सभी कुछ नया लेकर आए थे, जिसकी कमी थी यहाँ पे, जिसे कोई भर नहीं पा रहा था। जो लोग यहाँ आना चाहते हैं, उन्हे खुद से यह पूछना होगा कि उनके भीतर खास क्या है?”


बॉलीवुड में गीतकारों को क्रेडिट न मिलने और उसके साथ संघर्ष का इतिहास काफी लंबा रहा है। राजशेखर ने इस पर भी खुलकर अपनी राय रखी।


वे कहते हैं,

“हाल में मैंने ‘सांड की आँख’ नाम की फिल्म के लिए गाने लिखे थे, फिल्म में पूरा एल्बम मेरा था और फिर भी मुझे यूट्यूब पर गानों के क्रेडिट के लिए बोलना पड़ा था। आज जब एक फिल्म में कई गीतकार और संगीतकार होते हैं, ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा गाना किसने लिखा है, इसके लिए जरूरी है कि हमें क्रेडिट मिले।”


गौतलब है कि पहले कि तरह अब रेडियो चैनल्स पर भी गीतकारों को क्रेडिट नहीं दिया जाता है, जबकि गानों से जुडने वाले पहले चंद लोग गीतकार और संगीतकार ही होते हैं।

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राजशेखर की आने वाली फिल्म रात अकेली है, जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और राधिका आप्टे अभिनय कर रही हैं। राज ने तनु वेड्स मनु, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स, करीब-करीब सिंगल, वीरे दी वेडिंग, तुंब्बाड, हिचकी, उरी, जबरिया जोड़ी और सांड की आँख जैसी फिल्मों के लिए भी गाने लिखे हैं।


गीत लिखने के साथ ही राजशेखर ‘मजनू का टीला’ नाम से स्टेज शो भी करते हैं। इसमें राज लोगों को कहानियाँ, कविताएं, संस्मरण, गीत और गीतों के पीछे की कहानियाँ सुनाते हैं। राज इस कार्यक्रम को देश भर में परफॉर्म करते हैं।


इस संबंध में राज कहते हैं,


“फिल्मों में मैं सब कुछ नहीं जाहिर कर सकता, इसलिए जो भी बचता है, वो ‘मजनू का टीला’ पर बयां करता हूँ।”


हाल ही में सीएए जैसे मुद्दे को लेकर भी बॉलीवुड अपनी बेबाक राय रख रहा है, इस संबंध में राज कहते हैं,

"मुझे अच्छा लगता है कि हमारी जमात भी अपनी आवाज़ उठा रही है।"

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