महाराष्ट्र को मिलेगा पहला दिव्यांग पार्क, जानिए कौन सी सुविधाएं होंगी?

केंद्र सरकार की योजना के तहत 3483.00 लाख रुपये की कीमत के कुल 241200 मददगार और सहायक यंत्रों को 27356 वरिष्ठ नागरिकों तथा 7780 दिव्यांगजन लाभार्थियों को वितरित किया जायेगा.

महाराष्ट्र को मिलेगा पहला दिव्यांग पार्क, जानिए कौन सी सुविधाएं होंगी?

Friday August 26, 2022,

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शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए महाराष्ट्र में जल्द ही राज्य का पहला दिव्यांग पार्क खुलने जा रहा है. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने नागपुर में आयोजित एक ‘सामाजिक अधिकारिता शिविर’ में इसकी घोषणा की. देश की कुल आबादी में 6 फीसदी दिव्यांग हैं.

‘सामाजिक अधिकारिता शिविर’ का आयोजन वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को मददगार तथा सहायक उपकरण वितरित करने के लिये सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अलिमको, नागपुर नगर निगम और नागपुर जिला प्रशासन के सहयोग से किया है.

यह आयोजन शुक्रवार को नागपुर के रेशिमबाग ग्राउंड में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ‘उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिये दिव्यांग व्यक्तियों के लिये सहायता’ (एडीआईपी) योजना के तहत दिव्यांगजनों के लिये और ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिये किया गया था.

उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुये डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि उनके मंत्रालय ने नागपुर में पहला “दिव्यांग पार्क” स्थापित करने में हर संभव मदद की है तथा इस दिशा में काम जल्द शुरू हो जायेगा. इस “दिव्यांग पार्क” में दिव्यांगजनों के लिये विभिन्न प्रकार की सुविधायें उपलब्ध रहेंगी, जैसे संवेदी उद्यान, स्पर्श और सुगंध का अनुभव देने वाली फूलों की क्यारियों से युक्त मार्ग, कौशल प्रशिक्षण सुविधायें, पुनर्वास सुविधा, खेल व मनोरंजन आदि.

समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वितरण शिविर का उद्घाटन किया तथा केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की उपस्थिति में अलग-अलग तरीके के सहायक यंत्रों का वितरण दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों को किया.

केंद्र सरकार की योजना के तहत 3483.00 लाख रुपये की कीमत के कुल 241200 मददगार और सहायक यंत्रों को 27356 वरिष्ठ नागरिकों तथा 7780 दिव्यांगजन लाभार्थियों को वितरित किया जायेगा.

इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा कि समाज के वंचित लोगों तथा पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति की सेवा करना बहुत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि इन्हें शक्ति सम्पन्न बनाना सरकार का लक्ष्य है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचे.

गडकरी ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार का आभार व्यक्त किया कि नागपुर शहर में उनके मंत्रालय के तहत सामाजिक कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है.

चरणबद्ध तरीके से उन चिह्नित वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजन लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के सहायक यंत्र वितरित किये जायेंगे, जिन्होंने एनएमसी और नागपुर जिला प्रशासन के सहयोग से अलिमको द्वारा आयोजित मूल्यांकन शिविरों के दौरान पंजीकरण कराया था. मूल्यांकन शिविरों का आयोजन नागपुर शहरी और ग्रामीण इलाकों के विभिन्न स्थानों पर किया गया था. लाभार्थियों की पहचान करने के लिये इस वर्ष फरवरी से मार्च के दौरान मूल्यांकन शिविर लगाये गये थे.

रेशिमबाग ग्राउंड के उद्घाटन-शिविर में 919.00 लाख रुपये की कीमत के कुल 68683 मददगार और सहायक यंत्रों को दक्षिण नागपुर के पहले से चिह्नित लाभार्थियों (8164 वरिष्ठ नागरिक तथा 854 दिव्यांगजन) को प्रदान जायेगा.

दक्षिण नागपुर के चिह्नित लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के सहायक यंत्र दिये जायेंगे, जिनमें मोटर चालित तीन-पहिया साइकिलें, 98 तीन-पहिया साइकिलें, 1520 व्हील-चेयर, 305 बैसाखियां, 6488 चलने में सहायक छड़ियां, 21 ब्रेल किटें, 75 ब्रेल छड़ियां, 09 रोलेटर, 4166 श्रवण सहायक मशीनें, 102 एमएसआईईडी किटें, 11 सी.पी. कुर्सियां, 64 स्मार्ट फोन, 6436 सर्वाइकल कॉलर, 211 कैलिपर आदि शामिल हैं.

वरिष्ठ नागरिकों को दिये जाने वाले अन्य सहायक यंत्रों में 13 फुट केयर इकाइयां, 1585 ट्राई-पॉड, 1247 स्पाइनल सपोर्ट, 8107 एलएस बेल्ट, 213 कमोड युक्त व्हील-चेयर, 7677 कमोड युक्त चेयर स्टूल, 7855 सिलीकॉन फोम वाले कुशन, 03 सीट युक्त चलने में सहायक छड़ियां, 581 वॉकर, 4763 ऐनकें, 16168 घुटनों पर लगाने वाले ब्रेस, 935 डेंचर शामिल हैं.

बता दें कि, देश का पहला दिव्यांग पार्क साल 2016 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद स्थित जिला अस्पताल परिसर में खुला था। 10 हजार वर्ग मीटर में फैले इस पार्क को बनाने में 30 लाख रुपए की लागत आई थी। आधा पैसा जनभागीदारी से जुटाया गया था. इसमें दृष्टिहीन और अस्थिबाधित बिना बाधा घूम सकते हैं. टेक्सटाइल टाइल्स चलने में मदद करती है तो पाइप पर उकेरी गई ब्रेल लिपि रास्ता दिखाती है। इस पार्क को बनाने के लिए तीन देशों से आइडिया लिया गया था.


Edited by Vishal Jaiswal