दुनिया की हर छठवीं महिला की नौकरी खतरे में!

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मैकिन्जी की ताज़ा स्टडी के मुताबिक, स्किल में सुधार नहीं हुआ तो ऑटोमेशन के कारण भारत में लगभग 1.1 करोड़ महिलाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। दुनिया की हर छठी महिला की नौकरी खतरे में है।
Women-in-workplace

सांकेतिक तस्वीर


कंसल्टेंसी फर्म मैकिन्जी की ताज़ा स्टडी के मुताबिक, भले ही भविष्य में महिलाओं के लिए नौकरियों में 20 फीसदी अधिक अवसर उपलब्ध हो जाए, आने वाले समय में उनकी स्किल में सुधार नहीं हुआ, तो लगभग सभी कार्यक्षेत्रों में लैंगिक असमानता बढ़ने का अंदेशा जताया गया है। दुनिया की हर छठी महिला की नौकरी खतरे में है। भारत में लगभग 1.1 करोड़ महिलाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। यह महिला वर्कफोर्स का आठ प्रतिशत है। हमारे देश में बदलते वक्त में ऑटोमेशन के साथ ढल जाना महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। वह पहले से ही अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पारंपारिक रुकावटों से जूझ रही हैं।


मैकिन्जी से पहले भारत पर केंद्रित डिलॉयट की रिपोर्ट (‘भारत में चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए लड़कियों एवं महिलाओं का सशक्तीकरण’) में बताया जा चुका है कि हमारे देश में विगत कुछ वर्षों में कुल श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी में गिरावट आई है। वर्ष 2005 में महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी 36.7 प्रतिशत थी, जो 2018 में गिरकर 26 प्रतिशत पर आ गई। असंगठित क्षेत्र में 95 प्रतिशत यानी 19.5 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो या तो बेरोजगार हैं या उन्हें काम के बदले पैसा नहीं मिलता है। भारत में महिलाओं एवं लड़कियों के समक्ष मुख्य चुनौतियां शिक्षा की कमी, गुणवत्तायुक्त शिक्षा की उपलब्धता का अभाव और डिजिटल विभाजन हैं जो उन्हें रोजगार योग्य कौशल पाने, श्रम बल में शामिल होने और उद्यम शुरू करने से रोकते हैं। प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण और स्वचालन के उभार के दौर में यह आशंका प्रबल हो जाती है कि कम कौशल और कम वेतन वाले कार्यों में मुख्य तौर पर लगी अधिकांश महिलाओं का रोजगार प्रभावित होगा।


मैकिन्जी की 'द फ्यूचर ऑफ वूमेन एट वर्क: ट्रांसिशन इन द ऐज ऑफ ऑटोमेशन' शीर्षक स्टडी में बताया गया है कि आगामी एक दशक में विश्व में 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की या तो नौकरियां जा सकती हैं, या फिर उन्हें अपना कार्यक्षेत्र बदलना पड़ सकता है। विश्व की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूके, चीन, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका) पर फोकस इस स्टडी के मुताबिक, ऑटोमेशन के कारण करीब 10.7 करोड़ महिलाओं की नौकरी जा सकती है।


हमारे देश में श्रम की लागत कम होने और धीमी गति से ऑटोमेशन के असर के कारण लगभग दस प्रतिशत महिलाओं की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।




रिसर्च में बताया गया है कि वैसे तो विश्व स्तर पर भी विभिन्न पेशों में महिलाओं का दबदबा है लेकिन अब भी कई बड़े मुल्कों में कामकाजी महिलाओं की संख्या काफी कम है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूके, चीन, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका में आगामी एक दशक में ऑटोमेशन के कारण ऐसे कई काम मशीनें करने लगेंगी, जो आज मैनुअली हो रहा है। इससे सबसे अधिक नुकसान उन नौकरियों को होना है, जो ज्यादातर महिलाओं के पास हैं।


इन मुल्कों से दुनिया की आधी आबादी और 60 फीसदी जीडीपी आती है। रुषों की तुलना में महिलाएं टेक्नोलॉजी की कम जानकार होती हैं। नौकरियां गंवाने वाली महिलाओं में आधी संख्या क्लर्क या एक समान, मसलन, एडमिन, सहायक, रिसेप्शन से जुड़े कार्य करने वाली महिलाओं की हो सकती है।



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