फिनटेक स्टार्टअप 1Pay को पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए RBI ने दी मंजूरी

By रविकांत पारीक
September 15, 2022, Updated on : Thu Sep 15 2022 11:27:23 GMT+0000
फिनटेक स्टार्टअप 1Pay को पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए RBI ने दी मंजूरी
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फिनटेक स्टार्टअप 1Pay Mobileware Pvt Ltd को पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. इसके साथ, 1Pay (PA) पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए RBI से अप्रुवल प्राप्त करने वाली भारत की चुनिंदा कंपनियों में से एक बन गई है.


2019 में स्थापित, 1Pay एक पेमेंट एग्रीगेटर है जो ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और बैंकिंग इंडस्ट्री को भी एक साथ लाता है, इस प्रकार लॉजी-फिनटेक (Logi-Fintech) स्पेस को डिजिटल फॉर्म में इंटीग्रेट करता है. वर्तमान में, प्लेटफॉर्म का सालाना GTV (Gross Transaction Value) 8500 करोड़ रुपये से अधिक है और सालाना लेनदेन की मात्रा 30 मिलियन से अधिक है. स्टार्टअप लॉजिस्टिक्स, ओईएम सप्लायर्स, ओएमसी/फ्यूल डिस्ट्रीब्यूटर्स और फास्टैग जारीकर्ताओं को भुगतान समाधान प्रदान करता है.


1Pay को एक्स-गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के एमडी संजीव शाह और संजय गायतोंडे का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने Benchmark की स्थापना की जो भारत का एकमात्र AMC था जो निष्क्रिय और मात्रात्मक स्थान पर केंद्रित था. Benchmark ने भारत में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) की अवधारणा का बीड़ा उठाया है


इस ख़बर पर कमेंट करते हुए, संजय गायतोंडे ने कहा, “1Pay असंगठित क्षेत्र के लिए एक सहज भुगतान मंच बना रहा है जो उन्हें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने का अधिकार देता है. 1Pay उन कुछ प्लेटफार्मों में से एक है जो असंगठित लॉजी-फिनटेक स्पेस को डिजिटल फॉर्म में इंटीग्रेट करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इसके अलावा, फिनटेक स्पेस में स्टार्टअप के लिए आरबीआई की मंजूरी देश को डिजिटली इंटीग्रेट करने के लिए केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है.“


मार्च 2020 में औपचारिक रूप से पेश किया गया पेमेंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क यह अनिवार्य करता है कि केवल आरबीआई द्वारा अप्रुव्ड फर्म ही व्यापारियों को भुगतान सेवाएं प्राप्त कर सकती हैं और पेशकश कर सकती हैं. भुगतान एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं के मूल्यांकन में आरबीआई सख्त रहा है. एग्रीगेटर लाइसेंस की मांग करने वाले कई ऑनलाइन पेमेंट गेटवे केंद्रीय बैंक की गहन जांच के तहत आते हैं. KYC संबंधित मुद्दों, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों और गेमिंग ऐप्स के साथ पिछले व्यवहार, और नेट वर्थ मानदंडों का पालन नहीं करने को लेकर आरबीआई ने सख्ती अपनाई है.


आरबीआई के नियमों के अनुसार, अपने आवेदन की तारीख या मार्च, 2021 के अंत तक पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों को 15 करोड़ या मौजूदा वित्तीय वर्ष 2023 के अंत तक 25 करोड़ रुपये की नेट वर्थ दिखानी होती है.


क्रेड, रेजरपे और फोनपे जैसे बड़े नामों के साथ-साथ कम से कम 185 फिनटेक कंपनियों ने पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस की मांग करते हुए आवेदन दिए थे.


वहीं, अगर किसी ऐप का आवेदन खारिज हो जाता है तो कंपनियों को अपनी गेटवे सेवा को तीन महीने में बंद करना होगा. आरबीआई इस टाइम पीरियड को बढ़ाकर छह महीने करने पर विचार कर रहा है.


आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई महीने की शुरुआत में Razorpay और Pine Labs सहित कई बड़े ऑनलाइन पेमेंट प्रोवाइडर्स को RBI ने पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस दे दिया था.