रुपये में गिरावट से महंगी हुई विदेशी शिक्षा: विदेश जाकर करनी है पढ़ाई? इन देशों में करें अप्लाई

By Rajat Pandey
October 10, 2022, Updated on : Mon Oct 10 2022 14:03:02 GMT+0000
रुपये में गिरावट से महंगी हुई विदेशी शिक्षा: विदेश जाकर करनी है पढ़ाई? इन देशों में करें अप्लाई
जर्मन सरकार द्वारा शिक्षा पर सब्सिडी दी जाती है. जर्मनी में सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्वविद्यालयों (State Funded Universities) में पढ़ने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ट्यूशन फीस फ्री होती है
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विदेश जाकर पढाई या नौकरी करने का सपना तो कभी ना कभी हम सबने ही देखा होगा. मगर दूसरे देश जाकर पड़ने के अपने नियम और क़ायदे होते हैं. पासपोर्ट और वीसा के साथ-साथ अच्छे खासे पैसे भी लगते हैं. समय-समय पर रुपए और डॉलर के घटते और बढ़ते भाव की वजह से भी हमारे विदेश जाने के सपने पर असर पड़ता है.  


ताज़ा आंकड़ों के अनुसार रुपये में तेज गिरावट देखी गई है, जिसके चलते विदेश में जाकर पढ़ाई करने का सपना भी महंगा हो गया है. अगर बात करें अमेरिका की तो, वहां पढ़ाई का खर्च प्रति वर्ष 1.5 से 2 लाख रुपये तक बढ़ गया है. 


अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में ट्यूशन फीस में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी विदेशों में महंगी शिक्षा के पीछे दूसरा प्रमुख कारण है. महंगी विदेशी शिक्षा के पीछे और भी अहम कारण हैं, जैसे हाल के दिनों में हवाई किराए का बढ़ना, जिससे विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है.


इतना ही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लाखों भारतीय छात्रों के वीजा को मंजूरी नहीं मिल पाती है.


पहले तो स्टूडेंट वीजा आसानी से मिलता नहीं है और अगर लम्बे समय के बाद मिल भी जाता है तो, छात्रों को रुपये में गिरावट के कारण महंगाई का सामना करना पड़ता है और उनका विदेशी शिक्षा ग्रहण करने का सपना अधिक महंगा हो जाता है.


जो छात्र विदेश में पढाई कर रहे हैं उनकी अपनी परेशानियां हैं. विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों को हॉस्टल और होमस्टे की कीमतों में वृद्धि के कारण रहने के लिए एक आसरा मिलना मुश्किल हो जाता है. 


अन्य देशों द्वारा स्टूडेंट वीजा की मंजूरी में देरी के कारण जर्मनी को फायदा होता दिख रहा है. Germany Academic Exchange Service (DAAD) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2017 में 17,570 से बढ़कर 2021 में 34,134 हो गई.


दरअसल, जर्मन सरकार द्वारा शिक्षा पर सब्सिडी दी जाती है. जर्मनी में सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्वविद्यालयों (State Funded Universities) में पढ़ने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ट्यूशन फीस फ्री होती है. यह जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़े फायदों में से एक है और अन्य देशों में महंगी शिक्षा के बीच भारतीय छात्रों के लिए एक अच्छा मौका है.


जानकारों का मानना है कि वीजा में लगातार हो रही देरी ने शिक्षा के लोकप्रिय देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता को खतरे में डाल दिया है. जहां पहले अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश छात्रों की पहली पसंद हुआ करते थे, वहीं अब जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और यूएई छात्रों के अध्यन के लिए पसंदीदा देश बनकर उभर रहे हैं.