हैदराबाद की ग़ज़ाला हाशमी ने अमेरिका में रच दिया एक और नया इतिहास

By जय प्रकाश जय
November 12, 2019, Updated on : Tue Nov 12 2019 14:56:48 GMT+0000
हैदराबाद की ग़ज़ाला हाशमी ने अमेरिका में रच दिया एक और नया इतिहास
हैदराबाद की गजाला हाशमी ने वर्जीनिया की सीनेट निर्वाचित होने वाली डेमोक्रेट पार्टी की पहली मुस्लिम महिला के रूप में अमेरिका में इतिहास रच दिया है।
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विश्व राजनीति के स्तंभ अमेरिका में भारतीयों की सियासी शिनाख्त दिनोदिन कद्दावर होती जा रही है। हैदराबाद की गजाला हाशमी ने वर्जीनिया की सीनेट निर्वाचित होने वाली डेमोक्रेट पार्टी की पहली मुस्लिम महिला के रूप में अमेरिका में इतिहास रच दिया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी की सियासत में भारतीयों की गहरी पैठ बनी है। 

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गज़ाला हाशमी

सामुदायिक कॉलेज की प्राध्यापक रहीं हैदराबाद की गजाला हाशमी ने वर्जीनिया राज्य की सीनेट में निर्वाचित होने वाली डेमोक्रेट पार्टी की पहली मुस्लिम महिला के रूप में अमेरिका में इतिहास रच दिया है। गजाला हाशमी ने मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर ग्लेन स्ट्रेटवेंट को हराया है। वर्जीनिया की सीनेटर गजाला हाशमी का जन्म भारत के हैदराबाद में मुस्लिम परिवार में हुआ था। बाद में वह अपने परिवार के साथ अमेरिका जा बसीं।


बचपन में मुन्नी के नाम से जानी-पहचानी जाने वाली गजाला हाशमी ने चुनाव लड़ने से पहले रिनॉलड्स कम्युनिटी कॉलेज में सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग में निदेशक पद से इस्तीफा दिया था। गजाला पिछले दो दशकों से विभिन्न क्षमताओं में बतौर शिक्षक काम कर रही थीं। गत पांच नवंबर को होने वाले चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इस बात पर दबाव डाला था कि गजाला हाशमी एक अमेरिकन नाम है। सरकारी कार्यालय में पद के लिए वह उनकी पहली कोशिश रही।


व्हाइट हाउस में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के व्हाइट हाउस प्रौद्योगिकी नीति सलाहकार रह चुके सुहास सुब्रह्मण्यम और गजाला समेत चार भारतीय-अमेरिकियों ने राज्य एवं स्थानीय चुनावों में कामयाबी हासिल कर साबित कर दिया है कि विश्व राजनीति के स्तंभ अमेरिका में भारतीयों की सियासी शिनाख्त दिनोदिन कद्दावर होती जा रही है। सुब्रह्मण्यम की मां मूल रूप से बेंगलुरु की रहने वाली हैं और वह 1979 में अमेरिका चली गईं थीं।





कैलिफोर्निया में, भारतीय मूल के अमेरिका मानो राजू ने सैन फ्रांसिस्को के पब्लिक डिफेंडर के पद पर फिर से जीत दर्ज की है। इस बीच, नॉर्थ कैरोलिना में डिंपल अजमेरा भी शार्लोट सिटी काउंसिल में पुन: निर्वाचित हुई हैं। वह 16 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आई थीं। इस बीच, नॉर्थ कैरोलिना में डिंपल अजमेरा भी शार्लोट सिटी काउंसिल में पुन: निर्वाचित हुई हैं।

अभी पिछले साल ही अमेरिका में सीमा नंदा ने वहां के मुख्य विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पद संभाला है। अमेरिका की राजनीति में मुस्लिम महिलाओं की भी भागीदारी बढ़ी है। मुन्नी की भी जीत उस समय पर हुई है जब यूएस की राजनीतिक दौड़ में मुस्लिम महिलाएं बढ़-चढ़ कर भागीदारी ले रही हैं। पिछले वर्ष इल्हान उमर और रशीदा तलीब यीएस कांग्रेस में अपनी जगह बनाने वाली पहली और दूसरी मुस्लिम महिला बनी थीं।


गौरतलब है कि अमेरिका में भारतवंशियों की बढ़ती संख्या के साथ वहां की राजनीति में भी भारतीय मूल के लोगों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। कई भारतीय अमेरिकी वहां की राजनीति में नई बुलंदियां छू रहे हैं। गजाला से पहले अमेरिका में साउथ कैरोलीना की सबसे युवा गवर्नर निकी हेली भारतीय अमेरिकियों की प्रेरणा-श्रोत रही हैं। यह प्रतिष्ठित पद ग्रहण वाली हेली पहली महिला और भारतीय मूल की दूसरी नेता रहीं। हेली का जन्म 20 जनवरी, 1972 को एक सिख परिवार में हुआ, जो पंजाब के अमृतसर से साउथ कैरोलीना के बैमबर्ग में जा बसा था। अजित सिंह रंधावा और राज कौर की बेटी निकी का असल नाम निमरत रंधावा है। 


पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका की राजनीति में भारतवंशियों ने गहरी पैठ बनाई है। डेमोक्रेटिक नेता कमला देवी हैरिस वर्ष 2011 से कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल बनीं। उससे पहले वर्ष 2004 से लेकर 2010 तक वह सैन फ्रांसिस्को की जिला अधिवक्ता रहीं। कैलिफोर्निया का यह अहम पद संभालने वाली हैरिस पहली प्रवासी महिला और पहली एशियाई अमेरिकी रहीं। उनकी मां डॉ. श्यामाला गोपालन हैरिस चेन्नई से ताल्लुक रखती हैं, जबकि उनके पिता डोनाल्ड हैरिस मूलत: जमैका से हैं।





उल्लेखनीय है कि अमेरिका में पिछले साल भारतीय मूल की आठ महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया था। अमेरिकन बाजार विमेन आंत्रप्रेन्योर एंड लीडर्स गाला के एक समारोह में राजनीति से लेकर बिजनेस और मानवाधिकार से लेकर विज्ञान तक के क्षेत्र में योगदान के लिए महिलाओं को वे अवॉर्ड दिए गए। 

उस समय अवॉर्डी महिलाओं में अप्रवासी मामलों की वकील शीला मूर्ति, एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन (एएएचओए) की अध्यक्ष जागृति पानवाला और नासा की खगोल विज्ञानी (एस्ट्रोफिजिसिस्ट) मधुलिका गुहा ठाकुरता के नाम उल्लेखनीय हैं। उनके अलावा मैरीलैंड डेलीगेट अरूणा मिल्लर, फ्लोरिडा से मनीषा गायकवाड, टेक कंपनी एंपकस की संस्थापक और सीईओ एन रामकुमारन और नस्लीय न्याय एवं नागरिक अधिकार समूह साउथ एशियन अमेरिकन्स लीडिंग टूगेदर (एसएएएलटी) की कार्यकारी निदेशक सुमन रंगनाथन भी अमेरिका में भारत का गर्व ऊंचा कर चुकी हैं।


डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए फंड जुटाने से लेकर अमेरिका में राजनीति, कला और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय भारतीय मूल की महिंदर टक ऐसी पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं, जो अमेरिकी मिलिट्री में भी सेवाएं दे चुकी हैं।