डायबिटिक लोगों के लिए खुशखबरी, कोल्डप्ले ने लॉन्च की शुगरफ्री आइसक्रीम

कभी शुगर फ्री चावल तो कभी शुगर फ्री आलू, घेवर, मिठाइयां, लेकिन अब एक कंपनी ने डॉयबिटिक लोगों के लिए शुगर फ्री आइसक्रीम की पूरी रेंज बाजार में उतार दी है, जबकि डॉक्टर कहते हैं कि इनका साइड इफेक्ट होता है, ज्यादा मात्रा से आंखों को दिक्कत, ज्यादा डोज से कैंसर का खतरा रहता है।

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सांकेतिक तस्वीर

कभी शुगर फ्री चावल तो कभी शुगर फ्री आलू, घेवर, मिठाइयां, लेकिन अब एक कंपनी ने डॉयबिटिक लोगों के लिए शुगर फ्री आइसक्रीम की पूरी रेंज बाजार में उतार दी है, जबकि डॉक्टर कहते हैं कि इनका साइड इफेक्ट होता है, ज्यादा मात्रा से आंखों को दिक्कत, ज्यादा डोज से कैंसर का खतरा रहता है।


देश में एक ओर मधुमेह के मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ती जा रही है तो उनके स्वाद की चिंता करती हुई कंपनियां उनके लिए मिठास भरे तरह तरह के प्रॉडक्ट बाजार में उतारती जा रही हैं। कभी शुगर फ्री चावल तो कभी शुगर फ्री आलू। पिछले सावन में जौनपुर के मिठाई विक्रेता अजय अग्रवाल डायबिटिक पेसेंट के लिए शुगर फ्री घेवर बेच रहे थे। अब इन गर्मियों में ऐसी ही एक और मिठास भरी ताज़ा सूचना है कि मुंबई की आइसक्रीम निर्माता कंपनी कोल्डप्ले ने शुगर फ्री आइसक्रीम की पूरी सिरीज ही लॉन्च कर दी है।


कंपनी का दावा है कि उनकी यह आइसक्रीम हाई प्रोटीन से भी भरपूर है। मधुमेह पीड़ित इसे बिना हिचक खा सकते हैं। गौरतलब है कि कोल्डप्ले प्रबंध निदेशक सुदीप पुततुंड एक फूड साइंटिस्ट हैं। पहले वह बागवानी कर रहे थे। वह दावा करते हैं कि कोल्डप्ले ब्रांड को डवलप करने में उन्होंने कई साल कड़ी मेहनत की है। उनके ब्रांड की सबसे प्रमुख बात है स्वाद के साथ शुद्धता। कोल्डप्ले ने आइसक्रीम में ये नई रेंज लॉन्च करने के साथ ही मुंबई के ब्रीच कैंडी इलाके में अपना नया आउटलेट खोला है। कंपनी का वह मुंबई में पांचवां आउटलेट है।


बाजार से आए दिन मिलने वाली ऐसी सूचनाओं पर डॉयबिटिक लोगों के मन में एक सवाल उभरता है कि उनके लिए क्या वाकई में ये शुगर फ्री चीजें हेल्दी होती हैं? डॉक्टर कहते हैं कि ऐसे प्रोडक्ट्स तभी डायबिटिक मरीजों के लिए सेफ हैं, जब उन्हें सुकरालोस, एस्परटेम या फिर स्टीविया जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स की मदद से बनाया गया हो। ऐसे में किसी भी बिना चीनी वाले उत्पाद को लेबल देखकर खरीदने से पहले थोड़ी सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। बेहतर होगा कि बाजार में मिलने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर्स खरीदकर घर में ही अच्छे मीठे खाद्य पदार्थ बनाएं। ये टेस्ट में भी बेहतर होंगे और इनकी कैलोरी भी कम होगी। आज बाजार में शुगर फ्री टेबलेट्स और पाउडर भी मिल रहे हैं, ताकि आप घर पर ही शुगर फ्री फूड्स का मजा ले सकें। फूड मैनुफैक्चरर्स पॉलीओल्स (सॉरबीटोल और लैक्टीटोल तरह के शुगर अल्कोहल्स) और नो कैलोरी स्वीटनर्स का इस्तेमाल इन्हें बनाने में इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इनमें मिठास तो होती है, लेकिन कैलोरी नहीं।


जो व्यक्ति डायबिटिक है, मीठा खाना चाहते है तो उसके दिमाग में सबसे पहले शुगर फ्री का ध्यान आता है। ऐसे में उसकी निगाह सबसे पहले बाजार में डायबिटीज के मरीजों के लिए सजे-धजे बाजार पर जाती है। शुगर फ्री मिठाइयां, लड्डू, केक, पेस्ट्री और साथ में बहुत से शुगर सब्स्टिट्यूट्स, जिनका घर में भी मीठी चीजें बनाने के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है।


एक बार फिर वही सवाल कि क्या शुगर फ्री वाकई में डायबिटिक लोगों के लिए इतना बेहतर होता है कि वे बिना किसी हिचक के उनका इस्तेमाल कर सकते हैं? क्या चाय या हलवे में चीनी की जगह शुगर फ्री डाल सकते हैं? ऐसे सब्स्टिट्यूट्स पर चिकित्सकों का क्या कहना है? डॉक्टर बताते हैं कि डायबिटिक लोगों को चीनी एक सीमित मात्रा में लेनी होती है और इसलिए उन्हें रिफाइंड शुगर से बनी मीठी चीजें बिल्कुल ही मना होती हैं। शुगर फ्री शुगर का एक सब्स्टिट्यूट है, जो मीठेपन का एहसास कराता है, लेकिन उनमें कैलोरी बहुत कम होती है। नैचुरल इंग्रेडिएंट्स वाले शुगर फ्री ज्यादा अच्छे होते हैं बजाय उनके जिनमें केमिकल ज्यादा यूज होता है। अब ऐसे शुगर फ्री प्रोडक्ट्स आ रहे हैं, जिनमें नेचुरल इन्ग्रेडिएंट्स होते हैं।


डॉक्टरों का कहना है कि आजकल केमिकल वाले शुगर फ्री कम आ रहे हैं क्योंकि हड्डियों पर इनका साइड इफेक्ट पड़ता है, इनकी ज्यादा मात्रा से आंखों को दिक्कत हो सकती है। इसके ज्यादा डोज से कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए प्रोडक्ट लेबल देखकर केमिकल्स का पता लगाया जा सकता है। शुगर फ्री से बनी खाने की चीजें जरूरी नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट फ्री हों या उनमें लो कार्बोहाइड्रेट हो। मार्केट में जो शुगर फ्री मिठाइयां, लड्डू या केक मिलते हैं, उनमें चीनी नहीं होती, लेकिन मिठाई में खोवा, घी, केक में क्रीम आदि भी हाई कैलोरी वाली होती हैं। यह भी डिपेंड करता है कि उनमें कौन सा शुगर फ्री यूज किया जा रहा है। प्रेग्नेंट लेडीज और बढ़ते हुए बच्चों को तो कत्तई शुगर फ्री प्रोडक्ट्स यूज नहीं करने चाहिए। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स शुगर फ्री और डायबिटिक फ्रेंडली होने का दावा करते हैं, लेकिन अध्ययनों के मुताबिक उनका सेहत पर खराब असर पड़ता है।


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