बिना मिट्टी 'मशीन' से घर पर उगाएँ सब्जियाँ, दिल्ली के स्टार्टअप ने पेश की सेवा

बिना मिट्टी 'मशीन' से घर पर उगाएँ सब्जियाँ, दिल्ली के स्टार्टअप ने पेश की सेवा

Saturday January 25, 2020,

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दिल्ली आधारित स्टार्टअप एग्रोटूओ ने एक ऐसी तकनीक प्रस्तुत की है, जिसकी मदद से लोग घर पर बिना मिट्टी का इस्तेमाल किए सब्जियाँ और फूल उगा सकेंगे। इस तकनीक के जरिये पानी बरबादी शून्य है।

(चित्र साभार: agro2o)

(चित्र साभार: agro2o)



आज व्यस्त जिंदगी और जगह की कमी के चलते घर पर जैविक सब्जियों का उत्पादन करना लगभग नामुमकिन का हो गया है। एक ओर बाज़ार में उपलब्ध सब्जियों में कीटनाशक का भारी उपयोग उन्हे स्वास्थ के लिए घातक बना देता है, वहीं आम बाज़ार में मौजूद जैविक सब्जियों के दाम इन्हे आम लोगों की पहुँच से दूर कर देते हैं।

बिना मिट्टी मशीन से खेती

इस समस्या का समाधान दिल्ली आधारित एक एग्रीटेक स्टार्टअप ‘एग्रो2ओ’ लेकर आया है। स्टार्टअप ने एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बिना मिट्टी के पौधे उगाने की प्रक्रिया को सरल कर दिया है।


देश में एक ओर जहां हर ओर एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और मशीन लर्निंग की बातें चल रही हैं, ऐसे समय में यह तकनीक भी लोगों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्टार्टअप ने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक डिवाइस का निर्माण किया है, जिसकी मदद से घर पर बड़ी आसानी से मिट्टी रहित सब्जियाँ उगाई जा सकती हैं।


इकनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कंपनी के फाउंडर यश व्यास ने कहा,

“हम लोगों को हाइड्रोपॉनिक्स तकनीक की मदद से मिट्टी रहित स्मार्ट गार्डन उपलब्ध करा रहे हैं, इसके तहत सभी लोग अपने घरों मे केमिकल फ्री पौधे उगा सकेंगे।”

हाइड्रोपॉनिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिये मिट्टी रहित खेती की जाती है। यह खेती पानी और जरूरी खनिज के माध्यम से होती है। यह विश्व की सबसे तेजी से उभरने वाली एग्रीकल्चर टेक्नालजी में से एक है।


सुविधाजनक होने के चलते इसे विश्व भर में लोग बड़ी तेजी से अपना रहे हैं। इस तकनीक की मदद से पानी की बरबादी बिलकुल भी नहीं होती है। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए पानी को फिर से रिसाइकल किया जा सकता है।

मिल चुके हैं 3 सौ प्रीऑर्डर

‘एग्रो2ओ’ सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर आधारित सिस्टम्स की मदद से पौधे उगाने की प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित भी कर देता है। कंपनी के फाउंडर यश व्यास के अनुसार उन्हे बीते तीन महीनों में 3 सौ से अधिक प्रीऑर्डर भी मिल चुके हैं।


शहरों खासकर मेट्रो शहरों में रहे लोग जो जैविक खेती से लगाव रखते हैं, लेकिन किसी कारण वह इस दिशा में बढ़ नहीं पा रहे हैं, उन सभी लोगों के लिए यह डिवाइस ख़ासी मददगार साबित होगी।