इस हाउस वाइफ ने परिवार-बच्चों की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपने जुनून को दिया अंजाम, मिन्त्रा पर टॉप सेलर बन कमाया 3.4 करोड़ रुपए का रेवेन्यू

By Rekha Balakrishnan|12th Dec 2019
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मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर अशोक नगर में पलीं-बढ़ीं 43 साल की राखी खेड़ा हमेशा से ही एक फ़ैशन डिज़ाइनर बनना चाहती थीं। उस समय इस तरह के करियर को लोग कुछ ख़ास पसंद नहीं करते थे और इस वजह से राखी के घरवाले भी नहीं चाहते थे कि वह फ़ैशन डिज़ाइनर बनें। मजबूरन राखी को कॉमर्स में ग्रैजुएशन करना पड़ा।


2013 तक राखी आराम से गुड़गांव में रह रही थीं और अपने परिवार की देखभाल कर रही थीं। उनके दो बच्चे भी थे, जिनकी जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी। इन जिम्मेदारियों के दौरान भी फ़ैशन इंडस्ट्री के प्रति उनका रुझान बना रहा और अपने पति के सहयोग के साथ उन्होंने मैटरनिटी वियर सेगमेंट में काम करना शुरू किया।


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राखी खेड़ा

पुराने वक़्त को याद करते हुए राखी बताती हैं,

"जब मैं प्रेग्नेंट थी, तब मुझे आरामदायक और स्टाइलिश मैटरनिटी वियर ढूंढने में बहुत दिक़्क़त पेश आ रही थी और इसलिए मैंने 2013 में तय किया कि मैं डिज़ाइनर मैटरनिटी अपेयरल किराए पर दूंगी।"


उनका यह काम कुछ ख़ास सफल नहीं हुआ और 2014 में उन्होंने एकबार फिर से कोशिश करते हुए 5 लाख रुपए के निवेश के साथ अपना ख़ुद का फ़ैशन ब्रैंड बनाना शुरू किया, जिसमें वेस्टर्न वियर की रेंज शामिल की। इसके बाद ही अबिती बेला एंटरप्राइज़ेज़ (इटैलियन भाषा के इन शब्दों का मतलब है ख़ूबसूरत कपड़े) का आइडिया आया।


यही समय था, जब भारत में ईकॉमर्स तेज़ी के साथ लोकप्रिय हो रहा था। राखी ने फ़्लिपकार्ट पर मैटरनिटी वियर बेचने से शुरुआत की और इस काम के माध्यम से ही उन्हें ब्रैडिंग, कैटलॉगिंग, अपलोडिंग आदि के बारे में काफ़ी कुछ सीखने को मिला। इसके बाद राखी ने जल्द ही अबिती बेला और माइन 4 नाइन नाम से दो ब्रैंड्स लॉन्च किए।


राखी बताती हैं,

"बाद में, मैंने मिन्त्रा पर भी सेलिंग शुरू की और अभी अबिती बेला मिन्त्रा पर टॉप-सेलिंग मैटरनिटी वियर ब्रैंड है। " मैं ख़ासतौर पर ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफ़ॉर्म लाइमरोड (Limeroad)के लिए कलर ब्लॉक नाम से 2017 में एक एक्सक्लूसिव ब्रैंड लॉन्च किया।"



हाल में राखी के सारे ब्रैंड्स, सभी ऑनलाइन प्लैटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं। राखी बताती हैं कि उनके ब्रैंड्स को सबसे अच्छी प्रतिक्रिया मिन्त्रा से मिलती है।

 

राखी ने बताया,

"मैंने डिज़ाइनिंग के काम के लिए फ़्रीलांसर्स की एक टीम को आउटसोर्स किया, जिनमें से कुछ एनआईएफ़टी (NIFT) से पढ़े हुए हैं। ब्रैंड्स के आउटफ़िट्स गुरुग्राम और फ़रीदाबाद की मैनुफ़ैक्चरिंग यूनिट्स में तैयार किए जाते हैं। अभी तक हमारे पास दोनों  ब्रैंड्स के लिए 800 डिज़ाइन्स हैं और अभी तक 2 लाख से बी ज़्यादा ऑर्डर्स पूरे किए जा चुके हैं।"


राखी के ब्रैंड्स ने 2018-19 में 3.4 करोड़ रुपए का रेवेन्यू पैदा किया और राखी को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में वह अपने ब्रैंड्स से लगभग 4.5 करोड़ रुपए का रेवेन्यू हासिल कर सकेंगी। इतने कम समय में मिली सफलता का श्रेय राखी, वॉलमार्ट के विमिन ऑन्त्रप्रन्योरशिप डिवेलपमेंट प्रोग्राम (डब्ल्यूईडीपी) से मिले सहयोग को देती हैं।

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राखी का कहना है,

"यह प्रोग्राम मेरे जैसे ऑन्त्रप्रन्योर्स के लिए एक शानदार प्रोग्राम है, जिन्होंने बिज़नेस स्टडीज़ में कोई प्रोफ़ेशनल कोर्स नहीं किया हो।"


चुनौतियों के बारे में बात करते हुए राखी ने बताया कि उन्हें सिर्फ़ नोटबंदी के दौरान मुश्क़िलों का सामना करना पड़ा। इस दौर का ज़िक्र करते हुए राखी ने कहा,


"नोटबंदी ने जहां उनके मुश्क़िले खड़ी कीं, वहीं उन्हें कुछ फ़ायदा भी पहुंचाया। हमारे कैश ऑन डिलिवरी पेमेंट मोड वाले ऑर्डरों में कमी आई और हम पूरी तरह से डिजिटल हो गए।"


अपनी बातचीत में राखी ने यह भी कहा कि महिलाओं को जोख़िम उठाने के मामले में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उन्हें कोई ख़ास जानकारी नहीं थी, लेकिन कड़ी मेहनत ने उन्हें आज इस मुक़ाम तक पहुंचाया है।


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