कैसे वास्तु आपके विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करता है?

By आचार्य मनोज श्रीवास्तव
May 16, 2021, Updated on : Mon May 17 2021 03:54:17 GMT+0000
कैसे वास्तु आपके विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करता है?
इस लेख में हम वास्तुआचार्य मनोज श्रीवास्तव से समझते हैं कि ऐसे कौन से सरल उपाय हैं जिनके द्वारा हम जीवन में आने वाली बाधाओं को पराजित कर विकास के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं।
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आज के समय में मनुष्य जीवन का उद्देश्य ही विकास है। हम अपनी पढ़ाई और व्यवसाय और नौकरी में प्रयास सभी विकास के उद्देश्य से करते हैं। हम सब चाहते हैं कि हमारी आमदनी और सफलता में निरंतर प्रगति हो और यही मनुष्य के उद्भव की निशानी है। तो क्या वास्तु शास्त्र में विकसित जीवन के कुछ उपाय हैं? वास्तुआचार्य मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि वास्तु-शास्त्र की उत्पत्ति ही मनुष्य जीवन को सफल और उन्नत बनाने के लिए हुई है। भारत के ऋषि-मुनि जिनको हम पुराने समय के वैज्ञानिक भी कह सकते हैं, ये भली-भाँती जानते थे की गृह की उर्जायें किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं और इसलिए उन्होंने भवन के निर्माण के लिए कई नियम निर्धारित किये थे।

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सांकेतिक चित्र

क्योंकि आज के समय में कई लोगों के पास भवन अपने अनुसार बनाने का विकल्प नहीं है और अधिकतर हमें बना-हुआ भवन या अपार्टमेन्ट खरीदना पड़ता है इसलिए इस लेख में हम वास्तुआचार्य मनोज श्रीवास्तव से समझते हैं कि ऐसे कौन से सरल उपाय हैं जिनके द्वारा हम जीवन में आने वाली बाधाओं को पराजित कर विकास के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं।


वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा की उर्जाएं हमारी उन्नति का निर्धारण करती हैं। इसलिए इस दिशा को व्यवसाय और अवसर की दिशा कहा गया है। यह दिशा जल-तत्त्व की है और जल तत्त्व को दर्शाने वाले रंग और प्रतीक इस दिशा की उर्जाओं को सक्रिय करने में सहायक होते है और वहीँ अग्नि तत्त्व के प्रतीक रंग और चिन्ह उन्नति में बाधक होते हैं।


उपरोक्त सिद्धांत के अनुसार, अगर उत्तर दिशा में पानी का स्तोत्र जैसे की भूमिगत टैंक, बोरेवेल, झरना आदि हों तो उन्नति-दायक होता है, अपार्मेंट के उत्तर दीवार पर हल्का नीला रंग, लहरदार डिजाईन, या मछली-घर आपके विकास में सहायक होगा वहीँ, लाल, बैंगनी, गुलाबी, नारंगी, रंग विकास में बाधक होगा। अगर उत्तर में रसोई घर है तो घर में रहने वाले सदस्यों की उन्नति बाधक हो सकती है। अगर आप विकास में बाधा अनुभव कर रहें हैं, या आपके व्यवसाय में अवसर व ऑर्डर्स कम हो रहे हैं तो आप उत्तर दिशा को गौर से देखें और यथासंभव इन दोषों को दूर करें।


जहां सोते समय अपना सिर दक्षिण की ररफ रखना सर्वश्रेष्ठ माना गया है वहीँ कार्य करते समय उत्तर या पूर्व की तरफ बैठना सर्वउपयुक माना गया है। वास्तु का मानना है कि उत्तर या पूर्व की तरफ मुख करके बैठने से हमारे शरीर की सारी नाड़ियाँ संरेखित हो जाती हैं और इन दिशाओं की सकारात्मक उर्जायें कार्यक्षेत्र में प्रगति देने में सहायक होती हैं।


विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए दोस्तों, सहकर्मियों, रिश्तेदारों, और आपके नेटवर्क से मिलने वाली मदद और सहयोग आवश्यक है। वास्तु में उत्तर-पश्चिम की ऊर्जा सहयोग प्रदान करने वाली मानी गयी है। यहाँ अगर कोई वास्तु दोष है तो जीवन में सहयोग की कमी होती है। सहयोग उर्जाओं को सक्रीय करने के लिए यहाँ पर जिन लोगों से सहयोग की आशा है उनका चित्र या चिन्ह रखना शुभ माना गया है। उदाहरण के लिए अगर आपको सरकार से सहयोग की जरूरत है तो घर के उत्तर-पश्चिम में अशोक स्तम्भ का प्रतीक रखें। किसी कंपनी से सहयोग की चाह है तो उस कंपनी का लोगो उत्तर-पश्चिम में लगायें।

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सांकेतिक चित्र

विकास और उन्नति के लिए स्थिरता महत्वपूर्ण है। अगर व्यवसाय में अस्थिरता है तो विकास कैसे संभव है। वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम को स्थिरता प्रदान करने वाली दिशा माना गया है। इस दिशा में जल होने से जीवन में अस्थिरता आती है। ना सिर्फ कार्यक्षेत्र में पर जीवन के हर आयाम जैसे रिश्ते, स्वस्थ्य, मानसिक शान्ति सब अस्थिर हो जाती हैं। इस दिशा में कभी भी पानी का प्रतीक जैसे नदी या झरना दर्शाती पेंटिंग नहीं लगायें। अगर ऐसी कोई पेंटिंग यहाँ है तो तुरंत उसे निकाल कर घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व में लगा दें। यहाँ की उर्जाएं पित्रों के आशीर्वाद प्रदान करने वाली होती हैं। यहाँ पूर्वजों की फोटो लगाना अच्छा होता है।


आजकल कई लोग घर से कार्य कर रहे हैं, आप जहां बैठें उसके पीछे कोई नदी-झरने की तस्वीर न हो। कई लोग अपने टेबल के पीछे भगवान् के तस्वीर लगाते हैं या किसी कैबिनेट के ऊपर मंदिर बना के रखते हैं। ईश्वर के आशीर्वाद के लिए भगवान् की फोटो या मूर्ती आपके कार्य करने की टेबल पर अपने सामने रखें, पीछे नहीं।


इन छोटे छोटे वास्तु उपायों से आप विकास में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। गंभीर समस्याओं के समय आप किसी वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं।


आचार्य मनोज श्रीवास्तव इकलौते ऐसे वास्तु कंसलटेंट और ज्योतिषी हैं जिनको बीस साल से ज्यादा का कॉर्पोरेट लीडरशिप का अनुभव है। वे पूर्व में एयरटेल, रिलायंस और एमटीएस जैसे बड़े कॉर्पोरेट हाउस में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं। आजकल वे पूर्ण रूप से एक वास्तु कंसलटेंट और ज्योतिषी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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