आईआईटी बॉम्बे ने समुद्र के पानी से बनाया हाइड्रोजन ईंधन, इस ईंधन से जल्द चलेंगी कार और बाइकें

आईआईटी बॉम्बे ने समुद्र के पानी से बनाया हाइड्रोजन ईंधन, इस ईंधन से जल्द चलेंगी कार और बाइकें

Friday January 17, 2020,

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आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने समुद्री पानी से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की तकनीक विकसित कर ली है। शोधकर्ताओं की यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के प्रदूषण में कमी लाने में अभूतपूर्व कदम निभाएगी।

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प्रतीकात्मक चित्र



आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने समुद्री पानी से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की तकनीक विकसित की है। शोधकर्ताओं की यह सफलता देश में क्लीन एनर्जी की दिशा में बहुत बड़ा कदम साबित हो सकती है।


इस तकनीक के मदद से जरूरत पड़ने पर ही हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा, ऐसे में अतिरिक्त हाईड्रोजन को स्टोर करने की भी समस्या नहीं होगी। चूंकि हाइड्रोजन अत्याधिक ज्वलनशील है, ऐसे में यह तकनीक इस खतरे को भी कम करने में मदद करती है।


हाइड्रोजन के जलने से किसी भी तरह के कार्बन का उत्पादन नहीं होता है, जिसके चलते यह तकनीक प्रदूषण नियंत्रण में एक अभूतपूर्व कदम है।


देश भर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए शोधकर्ता जल्द ही देश भर में हाईड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारों और बाइकों की कल्पना कर रहे हैं।





यह तकनीक समुद्री जल से हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किसी भी तरह के अन्य फ्यूल या बिजली का इस्तेमाल नहीं करेगी। शोधकर्ताओं का दावा है कि तकनीक में इस्तेमाल किए गए सभी पदार्थ इको-फ्रेंडली हैं।


शोधकर्ताओं का दावा है कि इस तकनीक से ऑटोमोबिल के साथ ही एविएशन में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

इंडिया टाइम्स से बात करते हुए आईआईटी बॉम्बे के रसायन विभाग के प्रोफेसर अब्दुल मालिक कहते हैं,

“हाइड्रोजन ही भविष्य है और हम इसे वर्तमान बनाना चाहते हैं। मैं उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब हमारा आविष्कार इसरो के रॉकेट के लिए ईंधन का काम करेगा।”

शोधकर्ता फिलहाल वाहनों के हिसाब से इस तकनीक में जरूरी बदलाव कर रहे हैं। गौरतलब है कि पृथ्वी पर पानी की मात्रा जमीन की तुलना में दो तिहाई है, वहीं इस तकनीक के माध्यम से किसी भी तरह के श्रोत से मिले पानी से हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है।


शोकर्ताओं का दावा है कि इस तकनीक की मदद से जरूरत के अनुसार हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। व्यापारिक स्तर पर हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए  एक हज़ार डिग्री सेल्सियस तापमान और 25 बार दाब की आवश्यकता होती है, जबकि इस तकनीक की मदद से कमरे के तापमान पर और सामान्य दाब पर हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है।