विदेशियों को भाए भारत के अंगूर, निर्यात में भारी उछाल से हुआ फायदा

भारत में उत्पादित अंगूर इस समय पूरी दुनिया के मुंह लग चुका है। इसकी मिठास ने विदेशियों का दीवाना बना रखा है। यही वजह है कि यूरोप के देशों और चीन में भी भारतीय अंगूर के निर्यात में भारी उछाल आया है। देश के किसान मालामाल हो रहे हैं।

विदेशियों को भाए भारत के अंगूर, निर्यात में भारी उछाल से हुआ फायदा

Monday May 20, 2019,

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सांकेतिक तस्वीर

अंगूर खट्टे होने की एक बड़ी प्रचलित कहावत है लेकिन देश-दुनिया में अंगूर का बाजार, कारोबार, आयात-निर्यात, रोज-रोजगार इन दिनो सबके सिर चढ़कर बोल रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही सुल्तानपुर (उ.प्र.) के कैफ अली खान ने पांव से पकड़ कर तीन मिनट में 65 अंगूर खाने में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। भारत में अंगूर की उत्पादकता पूरे विश्व में सर्वोच्च है। यूरोप के लोगों को भारतीय अंगूर काफी 'मीठे' लग रहे हैं।


एक्सपोर्ट सीजन 2018-19 में भारत से यूरोप को अंगूर का निर्यात 31 फीसदी बढ़ गया है। भारतीय अंगूर निर्यातकों के लिए यूरोप काफी प्रीमियम बाजार साबित हो रहा है। इतना ही नहीं रूस, चीन और अन्य देशों के निर्यात में भी लगभग 25 फीसदी से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। आज हमारे देश में सबसे ज्यादा क्षेत्र में महाराष्ट्र में अंगूर की खेती हो रही है। उत्पादन की दृष्टि से भी महाराष्ट्र देश में प्रथम है। शताब्दियों से अंगूर विश्व का सबसे आकर्षक फल रहा है। अब सिंगापुर, हांगकांग से होकर उत्तर-पूर्वी देशों में अंगूर के निर्यात के लिए नए बाजार विकसित हो रहे हैं।


कृषि-प्रसंस्कृत खाद्य विकास एजेंसी (एपीडा) के मुताबिक भारत का अंगूर निर्यात 1,21,469 टन तक पहुंच गया है। भारत से यूरोप को हुए अंगूर निर्यात में नीदरलैंड, यूके और जर्मनी की हिस्सेदारी 90 फीसदी रही है। बीते वित्तीय वर्ष में भी भारत ने यूरोप को 1,900 करोड़ रुपये का अंगूर निर्यात किया था। यद्यपि इस सीजन में यूरोप में कीमतों में गिरावट के कारण भारत के किसानों को अंगूर का भाव औसतन 15 रुपये प्रति किलो कम मिल रहा था लेकिन पिछले माह अप्रैल में हालात सुधर गए।


नासिक (महाराष्ट्र) की देश की शीर्ष निर्यातक कंपनी सह्याद्री फार्म्स के मुताबिक, फरवरी के मध्य से मार्च तक अंगूर की कीमतें ज्यादा सप्लाई के कारण मार्च में कम हो गई थीं। पांच किलो अंगूर के एक बॉक्स के लिए नौ से दस यूरो के अपेक्षित मूल्य के मुकाबले पांच से सात यूरो की ही कीमत मिली थी। निर्यातक अब अच्छी गुणवत्ता वाले रंगीन किस्मों पर फोकस कर रहे हैं। इस फसल सीजन में भारत की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक मांग वाले सफेद अंगूरों की हिस्सेदारी 70 फीसदी तक हो चुकी है।


चीन के बाजार में भी भारत के अंगूरों का निर्यात बढ़ गया है। यद्यपि चीन के कुल अंगूर आयात में भारत की सप्लाई सिर्फ एक प्रतिशत और निर्यात में दो फीसद है। चीन स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक हमारे यहां से चीन को अंगूरों का निर्यात पिछले साल बढ़कर 47 करोड़ रुपए हो गया था, जबकि उससे पहले यह मात्र 24.50 करोड़ रुपए रहा था।


चीन के विशाल अंगूर बाजार में पहुंच बढ़ाने के लिए बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास और गुआंगजाउ और शंघाई स्थित वाणिज्य दूतावासों ने कई कदम उठाए हैं। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथॉरिटी (अपीडा) के सहयोग से भारतीय राजनयिक कार्यालय क्रेता-विक्रेता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जिनमें चीन के करीब तेईस आयातकों और भारत के शताधिक निर्यातकों की उपस्थिति रही है।


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