डिजिटल पॉवर में भारत की कमजोर रैंकिंग युवाओं के लिए सबसे बड़ा चैलेंज

By जय प्रकाश जय
July 07, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:33:06 GMT+0000
डिजिटल पॉवर में भारत की कमजोर रैंकिंग युवाओं के लिए सबसे बड़ा चैलेंज
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ग्लोबल कॉम्युनिटी में तेजी से भागते अन्य देशों की तुलना में भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी की हालत खासकर नई पीढ़ी के लिए बेहद चिंताजनक है। आज जबकि हाईस्पीड इंटरनेट, मोबाइल, कैशलेस भुगतान सिस्टम वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे ले जा रहे हैं, उस रैंकिंग में हम जैसे किसी लापता पायदान पर खड़े, पड़े हैं।


युवा

फोटो: Shutterstock



हमारा 1.2 अरब से अधिक जनसंख्या वाला देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू हुए चार साल बीत जाने के बावजूद अभी भारत में 80 लाख से अधिक वाई-फाई हॉटस्पॉट की ज़रूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में यूनिवर्सलाइज़ ग्लोबलाइज़ेशन के दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी की विश्व प्रतिस्पर्धा ने देश के सामने एक नई चुनौती पैदा कर दी है संचार संसाधनों के डिजिटल विस्तार की। हमारे देश में अब भी 50 हज़ार से अधिक गाँव ऐसे हैं, जहां मोबाइल कनेक्टिविटी तक की सुविधा नहीं है।


इंटरनेट की स्पीड के मामले में भारत अन्य देशों की तुलना में 88वें नंबर पर है, जबकि हाई-स्पीड इंटरनेट, मोबाइल और कैशलेस भुगतान वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे ले जा रहे हैं। कई देश ऑनलाइन सेवाओं और उनकी सुलभता को बढ़ाकर इस डिज़िटल भविष्य को संवार रहे हैं। दुनिया के इस डिजिटल मुकाबले में भारत नई पीढ़ी की कनेक्टिविटी की जरूरतों को पूरा करते हुए ग्लोबल कम्युनिटी में कैसे अपनी जगह बनाए रखे, देश के सामने आज यह सबसे बड़ा चैलेंज है। भारत में केवल लगभग 14 करोड़ महिलाएँ ही इंटरनेट इस्तेमाल कर रही हैं। सवा अरब से अधिक की आबादी में अभी भारतीय इंटरनेट यूज़र्स की कुल संख्या सिर्फ 50 करोड़ के आसपास है।


हमारे देश की जमीनी सच्चाई ये है कि हर तीन ग्रामवासियों में से एक की सभी मौसमों में खुली रहने वाली सड़क तक पहुंच नहीं है। बंदरगाहों, हवाईअड्डों की क्षमता पर्याप्त नहीं है। रेलगाड़ियां  धीरे चलती हैं। तीस करोड़ लोग राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से नहीं जुड़े हैं। रोज़गार की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण देश का विनिर्माण क्षेत्र भी छोटा एवं पूरी तरह विकसित नहीं है। इस बीच कनेक्टिविटी मौजूदा कूटनीति का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। जहां तक देश में डिजिटल कनेक्टिविटी की हकीकत की की बात है, आज भी सवाल बने हुए हैं कि देश में सरकारी ऑनलाइन सेवाएं कहां तक सुलभ हैं, स्थानीय मोबाइल नंबर पाना कहां कितना आसान है, कैशलेस भुगतान की सुविधा और तेज़ व मुक्त इंटरनेट तक कहां, कितनी पहुंच संभव हो सकी है।




गौर करिए कि आज स्टार्टअप के इच्छुक लोग आम तौर पर तेल अवीव का ही रुख़ क्यों करते हैं, जो कभी न सोने वाले शहर के रूप में जाना जाता है। वह इसलिए कि इसरायल के लगभग एक हजार स्टार्ट-अप में से ज़्यादातर तेल अवीव में ही हैं। ऐसा इसलिए भी कि इंटरनेट तक बेरोकटोक पहुंच और स्थानीय मोबाइल नंबर पाने में आसानी के मामले में इसरायल पूरी दुनिया में आज तीसरे नंबर पर है। इसके पास एक मज़बूत और उन्नत तकनीक केंद्र है। इसीलिए यहां के लोगों ने खुशी-खुशी देश के उपनाम 'स्टार्ट-अप नेशन' को अपनाया है।


इस देश में कुछ ही लोग सोशल और कम्युनिकेशन ऐप्स से अलग बचे हैं। यहां के बुजुर्गों के पास भी स्मार्ट फोन हैं। उस छोटे से देश की तुलना में हमारी सतही डिजिटल हकीकत चौंकाती है। सोवियत संघ से आज़ाद होने के बाद एस्टोनिया दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जहां इंटरनेट पर कोई पाबंदी नहीं है और सभी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं। यहां इंटरनेट तक पहुंच को बुनियादी मानव अधिकार के रूप में देखा जाता है। एस्टोनिया के दूरदराज के द्वीपों में भी इंटरनेट की पहुंच है।


इसी तरह दुनिया के तीन और प्रमुख देशों की डिजिटल ताकत की तुलना में हम अभी कहां खड़े हैं, यह जान लेना जरूरी लगता है। आज डिटिजल जीवन का मतलब स्वचालन है। एक देश है फ़िनलैंड। यह पूरी दुनिया में डिज़िटल जीवन में दूसरे और कैशलेस भुगतान के मामले में पहले नंबर पर है। पूरी दुनिया में पहली बार आज से नौ साल पहले ही यहां की सरकार ने सभी नागरिकों की ब्राडबैंड कनेक्शन तक पहुंच को कानूनी अधिकार बना दिया है। वहां के तेज़ रफ़्तार इंटरनेट और बोलने की आज़ादी ने उसके इकोसिस्टम को टिकाऊ और सुरक्षित बना दिया है। सूचनाओं तक वहां के हर व्यक्ति की सीधी पहुंच है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में फिनलैंड को सबसे स्वस्थ देशों में शुमार किया है। फ़िनलैंड में डिजिटल बुनियादी ढांचा बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा और समुदाय पर भी जोर है।




सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन सुलभता और कैशलेस भुगतान के मामले में कनाडा अपने यहां डिजिटल जीवन को लगातार आसान बना रहा है। इस समय डिजिटल रैंकिंग में वह पूरी दुनिया में सातवें नंबर पर है। यहां की छोटी-छोटी दुकानों में भी मोबाइल पे सहित भुगतान के नए तरीके चलन में आ चुके हैं। यहां का टेलीकॉम सेक्टर केंद्रीकृत है। उद्यमियों को अपना बिज़नेस कहीं से भी चलाने की सहूलियत है। इस देश में घर, कैफ़े या टेंट से भी कंपनी को ऑनलाइन शुरू और संचालित करने, बैंकिंग, संचालन, हिसाब-किताब रखने, बिल का भुगतान करने और दस्तावेजों के नवीनीकरण की सहूलियत किसी चमत्कार से कम नहीं है। सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में ऐसा निकट भविष्य में संभव हो पाएगा?


एक छोटा सा देश है दक्षिण कोरिया, जो घरेलू हाई-स्पीड इंटरनेट की सुलभता के मामले में पूरी दुनिया में नंबर एक है। इसीलिए यहां का दैनिक जीवन इती तेज़ी से दौड़ता है कि खाने का ऑर्डर, डिलीवरी और भुगतान का काम सिर्फ़ 5 सेकेंड में हो जाता है। इस देश में इंटरनेट की रफ़्तार पूरी दुनिया में सबसे तेज़ है। यहां के लोग ट्रेनों में भी बोर नहीं होते क्योंकि वहां भी वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर हैशटैग देख सकते हैं। सरकार ने इंटरनेट को मुक्त रखा है ताकि देश के ज्यादा से ज्यादा नागरिक ऑनलाइन रह सकें।