किसान ने पहले खुद करके दिखाया फिर बताए खेती से लाखों रुपये कमाने के उपाए, कई लोगों को दे रहे हैं रोजगार

By शोभित शील
April 16, 2022, Updated on : Sat Apr 16 2022 05:18:38 GMT+0000
किसान ने पहले खुद करके दिखाया फिर बताए खेती से लाखों रुपये कमाने के उपाए, कई लोगों को दे रहे हैं रोजगार
पूर्वांचल के किसान नागेंद्र पाण्डेय ने बेहद ही कम लागत में लाखों रुपए कमाएं और साबित किया कि खेती करना भी फायदे का सौदा हो सकता है।
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कहते हैं, “क्या सफलता पाएगा वो निर्भर रहता है जो गैरों पर, मंजिल उसे ही मिलती है जो चलता है अपने पैरों पर।” अक्सर अकेला चलने वाला इंसान ही सफलता की नई इबारतें लिखता है। कुछ ऐसी ही कहानी है पूर्वांचल के इस किसान की जिसने अपने लक्ष्य को अकेले फतेह किया और आज अन्य किसानों की भी जिंदगी सँवारने में उनकी मदद कर रहा है।

किसान से बने ट्रेनर

लंबे समय से खेती -किसानी को एक घाटे का व्यापार माना जाता रहा है। लेकिन, भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में समाज का एक बड़ा तबका दशकों से इसी पर निर्भर भी है। हालांकि, यह सच है कि जमींदारी प्रथा और अंग्रेजी शासन में देश के किसानों का काफी शोषण हुआ है और उन्हें अपनी मेहनत का एक चौथाई लाभ भी नहीं मिल पाता था लेकिन, धीरे-धीरे समय के साथ सब कुछ बदल गया। विज्ञान की मदद से खेती-किसानी के तरीके बदले और बदलता गया देश का किसान।

नागेंद्र पाण्डेय

आज वर्तमान समय में देश के हजारों किसानों ने नई एवं उन्नति कृषि का रास्ता अपनाकर न केवल मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। बल्कि, समाज के इस मिथक को भी तोड़ा है कि खेती -किसानी करना घाटे का बिजनेस है। उन्हीं किसानों में एक हैं पूर्वांचल के किसान नागेंद्र पाण्डेय। जिन्होंने बेहद ही कम लागत में लाखों रुपए कमाएं और साबित किया कि खेती करना भी फायदे का सौदा हो सकता है। नागेंद्र ने पहले खुद को सही साबित किया और फिर जैविक खेती और उसके फायदे से होने वाली कमाई के लिए दूसरे किसानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं।

ग्रेजुएशन के बाद नहीं मिली नौकरी, फिर शुरू कर दी खेती

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के महाराजगंज मुख्यालय से करीब 15 किमी की दूरी पर बसे अंजना गाँव के रहने वाले नागेंद्र पाण्डेय एग्रीकल्चर में ग्रेजुएट हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद भरसक नौकरी की तलाश करने के बाद भी जब उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं दी तो उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती की शुरुआत कर दी।


खेती से मोटा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल किया और पारंपरिक तरीकों से हो रही कृषि के पैटर्न में बदलाव किया। उन्होंने इस बात का अंदाजा था कि नए प्रयोग में असफल होने के भी काफी चांसिज़ हैं बावजूद इसके नागेंद्र ने यह जोखिम उठाया। लेकिन, कहते हैं न कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है और उन्हें इस नए काम में जीत हासिल हुई।    

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गाय-भैंस के गोबर से बनाते हैं कंपोस्ट खाद

नागेंद्र ने जैविक खेती करने के गाय-भैंस के गोबर से बनी खाद का उपयोग किया। आसपास के किसानों में भी इसकी मांग बढ़ी तो उन्होंने इसकी पैकेजिंग करानी शुरू कर दी। उन्होंने इस काम की शुरुआत साल 2000 में थी। इसके लिए उन्होंने करीब 120 फिट जगह का इस्तेमाल किया जहां उन्होंने वर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन करना शुरू किया। यहां आज 750 कुंतल खाद तैयार होती है। एक बोरी में 25 किलो खाद भरी जाती है जिसकी कीमत 200 रुपये है। नागेंद्र ने खेती और अपने इस काम से सैकड़ों महिला एवं पुरुष कामगारों को रोजगार भी मुहैया कराया है।    


Edited by Ranjana Tripathi

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