कटहल का बर्गर और पास्ता बनाकर खड़ा किया बिज़नेस, केरल की राजश्री ने गांव की शक्ल बदल दी

By Rekha Balakrishnan
June 25, 2022, Updated on : Sat Jun 25 2022 08:24:45 GMT+0000
कटहल का बर्गर और पास्ता बनाकर खड़ा किया बिज़नेस, केरल की राजश्री ने गांव की शक्ल बदल दी
केरल से आने वाली राजश्री 400 से ज्यादा प्रोडक्ट बना रही हैं.
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साल 2019 में गार्डियन में एक आर्टिकल छपा कटहल (jackfruit) पर. जिसमें ये बताया गया था कि किस तरह एक साधारण फल, जिसे कोई पूछता तक नहीं था, आज उसकी लॉटरी लग गई है.


ये साधारण कटहल इंडिया में बहुतायत में पाया जाता है. इतना कि लोगों के घर के आंगन में लगा होता है. मात्र केरल में ही इसकी उपज 190 हज़ार टन प्रति साल है. गार्डियन ने जिसे शानदार रूप से कुरूप बताया, वो कटहल आज दुनिया भर में मीट के सब्सटीट्यूट की तरह देखा जा रहा है. वीगन लोग इसे पोर्क और बीफ़ की जगह करी से लेकर बर्गर तक में इस्तेमाल कर रहे हैं.


कमाल की बात ये है कि कटहल की कंटीली खाल से लेकर उसके गूदे तक, उसका हरेक हस्सा अलग अलग तरीके से खाया जा सकता है. और इस बात को राजश्री आर से बेहतर कोई नहीं जानता. राजश्री तिरुवनंतपुरम से आने वाली एक एग्रीप्रेन्योर, यानी कृषि उद्यमी हैं, जो कटहल से लगभग 400 तरह के प्रोडक्ट बना रही हैं.


'फ्रूट एन रूट' (Fruit N Root) ब्रांड के नाम से बिकने वाले ये प्रोडक्ट राजश्री के प्रयोगों और कुछ नया करते रहने की चाहत का नतीजा हैं.


मगर इसकी शुरुआत बहुत बड़ी नहीं थी. महज़ एक विचार था जिसकी जड़ें मां के प्रेम में थीं.


राजश्री बताती हैं, "शादी के बाद मैं मुंबई में रहती थी. फिर पति के साथ रहने के लिए क़तर चली गई. फिर हर साल जब भी घर आती, मेरी मां सूखे कटहल से बनी तमाम चीजें मेरे साथ पैक कर वापस भेजतीं जिससे मैं उन्हें अगले साल तक इस्तेमाल कर सकूं."

अनोखा आइडिया

हालांकि बिजनेस शुरू करने का आइडिया तभी आया जब राजश्री सात साल पहले फिर से इंडिया शिफ्ट हो गईं. उन्हें मालूम था कि कटहल की उनके गांव में कोई कमी नहीं है. अलाप्पुझा डिस्ट्रिक्ट में आने वाले उनके गांव नूरानंद में खूब कटहल होते थे.

rajsree

अपने यूनिट में राजश्री सूखे हुए कटहल का आटा बनाती हैं. और बाकी सामान अपने घर पर ही बनाती हैं.


उनके और उनके रिश्तेदारों के घर में होने वाले कटहल अक्सर भारी मात्रा में बर्बाद हो जाया करते थे. तब राजश्री ने तय किया कि पायसम और अचार के अलावा कटहल का कुछ और भी बनाना चाहिए. इकोनॉमिक्स पोस्टग्रेजुएट राजश्री को उस वक़्त लगा कि ये अच्छा बिजनेस आइडिया हो सकता है.


"वापस आने के बाद मैंने कटहल को सुखाकर उसके प्रोडक्ट्स बनाने का लाइसेंस लिया. लेकिन मुझे कुछ नया करना था. तो मैंने सोचा क्यों न कटहल का पास्ता बनाया जाए. मुझे लगा था ये युवाओं में पॉपुलर हो सकता है क्योंकि वो हेल्थ कॉन्शियस भी होते हैं और उन्हें पास्ता अच्छा भी लगता है.


राजश्री ने फिर कयमकुलम के कृषि विज्ञान केंद्र में एडमिशन लिया जिससे वो कटहल को सुखाने की टेक्नोलॉजी समझ सकें.


"उन्होंने मुझे सिखाया कि कटहल को सुखाने का सही तरीका क्या है और किस तरह उसका पाउडर बनाया जा सकता है जिसका पास्ता बन सके. साथ ही उन्होंने मुझे कटहलों की एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के प्रोत्साहित किया."


इस प्रतियोगिता में राजश्री ने आम चीजों के बजाय सूप, चपाती, बोंडा, चॉकलेट, बर्गर की टिक्की, लड्डू वगैरह बनाए.


ये प्रतियोगिता जीतने केबाद उन्होंने इस तरह की दूसरी प्रतियोगिताओं में अपना टैलेंट आजमाना शुरू किया और हर बार विजेता रहीं. लोगों का उत्साह देखकर वो अपने ओरिजिनल आइडिया पर कायम हो गईं और पास्ता बनाने का फैसला लिया. लेकिन पास्ता बनाने के लिए मशीन चाहिए होती है. और उन्हें कोई मशीन नहीं मिली.


राजश्री ने सुना था कि तिरुवनंतपुरम के Central Tuber Crops Research Institute (CTCRI) में शकरकंद के आटे का पास्ता बनता है. उन्होंने इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग ली और पास्ता बनाने की टेक्नोलॉजी भी ली. इसके बाद राजश्री ने अपने गांव में अपना यूनिट लगाया.


अपने यूनिट में राजश्री सूखे हुए कटहल का आटा बनाती हैं. और बाकी सामान अपने घर पर ही बनाती हैं.


कटहल के अलावा राजश्री केला भी उगाती हैं.


राजश्री कटहल के जो प्रोडक्ट बनाती हैं उनमें दागाश्मिनी (कांटो से बना पाउडर जो दवा का काम करता है), कन्माशी (गोंद से बना काजल), पायसम (बीज से बना), अचार (फल से बना), केक और चॉकलेट (पिसे हुए बीज से बना) और इसके अलावा बहुत कुछ.


"मैं पोटी चोरू, जो असल में चावल से बनता है, भी कटहल के आटे से बनाती हूं. भाप में पके केले के पत्ते में चावल, कटहल अवियल, कटहल की सब्जी और मछली सर्व करते हैं."


राजश्री बताती हैं कि जितने भी प्रोडक्ट हैं सब बिना प्रिजर्वेटिव के ही बनते हैं.


राजश्री फ़िलहाल अपने प्रोडक्ट लोकल मार्केट में ही भेजती हैं. और हाल ही में उन्होंने 'माय दुकान' नाम के प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन बेचना शुरू किया है.


"फिलहाल हम केवल लोकल मार्केट पर ही फोकस कर रहे हैं क्योंकि हमारा प्रोडक्ट प्रिजर्वेटिव मुक्त होता है. हम प्लास्टिक पैकेजिंग नहीं करना चाहते. इसलिए हमें ऑनलाइन बेचने में वक़्त लग गया. अंततः हमने तय किया कि हम एल्युमीनियम फॉयल में बेचेंगे.


हालांकि उन्हें सब्सिडी प्राप्त है. मगर चूंकि प्रोडक्शन लंबा काम है, उन्हें ज्यादा प्रॉफिट नहीं मिलते हैं.


"कटहल का मौसम जुलाई-अगस्त में आता है. फिर चावल का. फिर केले और शकरकंद का. इसलिए हम लगभग पूरे साल व्यस्त रहते हैं. हम स्नैक्स भी बनाते हैं- जैसे मुरुक्कू और पकौड़े."


जबसे राजश्री ने अपने बिजनेस के लिए स्टेट अवॉर्ड पाया है, उनके पास इन्क्वाइरी तो खूब आती हैं. मगर इतनी बिक्री नहीं होती.


"हमारा लक्ष्य है कि हम एक्सपोर्ट करें. मैं अक्सर सरकार की प्रदर्शनियों और और मेलों में जाती रहती हूं. मुझे यकीन है कि एक दिन हम ग्लोबल ज़रूर होंगे."


Edited by Prateeksha Pandey

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