जब मोहम्मद रफी और राज कपूर तक से लड़ गई थीं लता मंगेशकर...आखिर क्या था मसला

बात 1960 के दशक की है. उस दौर में लता मंगेशकर किशोर कुमार, मुकेश, मन्ना डे, महेन्द्र कपूर और मोहम्मद रफी के साथ युगल गीत यानी डुएट रिकॉर्ड किया करती थीं.

जब मोहम्मद रफी और राज कपूर तक से लड़ गई थीं लता मंगेशकर...आखिर क्या था मसला

Wednesday September 28, 2022,

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लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी...बॉलीवुड की दो ऐसी आवाजें जो जब-जब साथ आईं, सुरों का जादू सब पर छा गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक, लता (Lata Mangeshkar) और रफी (Mohammed Rafi) ने साथ में 440 डुएट व मल्टी सिंगर गाने गाए हैं. ये आंकड़ा दोनों के उन गानों का है, जो रिलीज हुए. एक अनुमान के मुताबिक, लता-रफी के कम से कम 50 गाने ऐसे भी हैं जो रिकॉर्ड तो हुए लेकिन किन्हीं वजहों से रिलीज न हो सके.

बॉलीवुड फिल्मों के इतिहास में एक दौर ऐसा भी आया जब लता और मोहम्मद रफी के बीच मतभेद हो गए और लगभग 4 सालों तक दोनों ने साथ में एक भी गाना नहीं गाया. मोहम्मद रफी की पुत्रवधु यास्मिन खालीद रफी की किताब 'मोहम्मद रफी : मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में यास्मिन ने लिखा है, '1960 के दशक के शुरुआत में एक ऐसा भी दौर आया जब लता मंगेशकर ने मोहम्मद रफी के साथ युगल गीत गाना बंद कर दिया. वजह थी कि दोनों के बीच, उनकी ओर से गाए गए गानों पर रॉयल्टी के भुगतान पर मतभेद हो गए थे. आज लता मंगेशकर के जन्मदिन (Lata Mangeshkar Birthday) पर आइए जानते हैं क्या था यह मामला...

1960 का दशक..

बात 1960 के दशक की है. 60 का दशक आते-आते लता मंगेशकर का रुतबा बहुत बढ़ गया था. हर संगीतकार उन्हें ही अपने गाने में लेना चाहता था. उस दौर में लता मंगेशकर किशोर कुमार, मुकेश, मन्ना डे, महेन्द्र कपूर और मोहम्मद रफी के साथ युगल गीत यानी डुएट रिकॉर्ड किया करती थीं. इस समय तक संगीत कंपनियां संगीतकारों को रॉयल्टी देने का काम शुरू कर चुकी थीं, लेकिन गायकों के लिए ऐसा नहीं था. नतीजा, विदेश की तर्ज पर संगीतकार हर साल हजारों रुपये की रॉयल्टी कमाते थे लेकिन गायकों को एक पैसा भी नसीब नहीं होता था. इस पर लता ने मुहिम छेड़ दी कि यदि संगीतकारों को रॉयल्टी मिलेगी तो गायकों को भी रॉयल्टी मिलनी ही चाहिए. उन्होंने इस विषय को निर्माताओं के समक्ष भी उठाया. लता को उम्मीद थी कि इस विषय पर मोहम्मद रफी उनका समर्थन करेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बस दोनों के बीच तनाव पैदा हो गया.

क्या कहना था मोहम्मद रफी का

रफी साहब की सोच थी कि वे लोग कला के पुजारी हैं. उन्होंने गाना गा दिया, उसका पैसा मिल गया तो फिर उसके बाद उस गाने पर उनका कोई हक नहीं बनता. रॉयल्टी के मुद्दे पर जब गायकों की एक बड़ी मीटिंग हुई तो बहस हुई और गुस्से में रफी साहब ने ऐलान कर दिया कि वह आज के बाद लता मंगेशकर के साथ गाना नहीं गाएंगे. इस पर लता मंगेशकर ने भी कह दिया कि वह ही उनके साथ नहीं गाएंगी.

फिर कैसे आए साथ

इस तनाव के बाद 1963 से लता और मोहम्मद रफी 3-4 साल तक साथ में नहीं आए. इस अवधि में लता ने महेंद्र कपूर के साथ गाना शुरू किया, जबकि सुमन कल्याणपुरी ने रफी के साथ गाना शुरू किया. फिर संगीतकार जयकिशन की कोशिश के चलते दोनों एक बार फिर साथ आए. 1967 में संगीतकार एसडी बर्मन के लिए एक संगीत समारोह में दोनों कलाकारों ने स्टेज पर साथ में गाना गाया. विवाद के बाद लता और रफी ने जो पहला डुएट साथ में गाया, वह फिल्म ‘पलकों की छांव में’ के लिए था.

जब राजकपूर से रॉयल्टी को लेकर भिड़ीं

इसके बाद लता मंगेशकर एक बार फिर रॉयल्टी को लेकर भिड़ गईं और इस बार सामने थे राज कपूर. एक इंटरव्यू में लता दीदी ने बताया था कि राजकपूर संग रॉयल्टी को लेकर झगड़ा हुआ था. मैंने उन्हें कहा था कि मैं रॉयल्टी लेती हूं तो राज कपूर ने कहा कि हम रॉयल्टी नहीं देते. फिर लता ने कहा कि मैं तो लेती हूं, साथ ही एक प्रॉडयूसर का नाम भी ले दिया, जिन्होंने रॉयल्टी का पेमेंट किया था. इस पर राज कपूर ने कहा कि आप राज कपूर से उनकी तुलना कर रही हैं, मैं राज कपूर हूं. तो लता ने कहा, 'मैं यहां बिजनेस करने नहीं आई हूं, मैं गाने आई हूं. मेरे लिए वह भी उतने ही बड़े हैं जितने आप. मैं भी लता मंगेशकर हूं.' राज कपूर रॉयल्टी देने के लिए नहीं माने और लता जी गाने के लिए नहीं मानीं. इसके बाद जब राज कपूर ने एक दो फिल्में की लेकिन बात नहीं जमी तो फिर वह लता के पास आए और रॉयल्टी दी.

लता मंगेशकर ने अपने 8 दशक लंबे सिंगिंग करियर के दौरान कई अवॉर्ड और उपलब्धियां हासिल कीं. उन्होंने 14 भाषाओं में हजारों फिल्मों के लिए हजारों गाने रिकॉर्ड किए और मधुबाला से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक के लिए प्लेबैक सिंगिंग की. 1989 में उन्होंने दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और साल 2001 में भारत रत्न से नवाजा गया. इतना ही नहीं फ्रांस की सरकार ने साल 2007 में उनहोंने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'Officer of the Legion of Honour' से सम्मानित किया. उनका नाम साल 1974 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी आया. भारत की स्वर कोकिला के नाम से जानी जाने वाली लता मंगेशकर 6 फरवरी 2022 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं.