फेसबुक और व्हॉट्सएप जरिए खड़ा किया 'मारवाड़ी खाना', अब हर महीने 4 लाख रुपये से ज्यादा कमा रही है ये गृहिणी

By Rekha Balakrishnan
January 15, 2020, Updated on : Wed Jan 15 2020 04:31:30 GMT+0000
फेसबुक और व्हॉट्सएप जरिए खड़ा किया 'मारवाड़ी खाना', अब हर महीने 4 लाख रुपये से ज्यादा कमा रही है ये गृहिणी
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टेक्नोलॉजी ने कई होम-बेस्ड उद्यमियों, विशेष रूप से महिलाओं को अपने सपनों को पंख देने और एक आय अर्जित करने में सक्षम बनाया है। खास जुनून और रुचि वाले लोग सोशल मीडिया या व्हॉट्सएप के माध्यम से अपने उत्पादों / सेवाओं को आसानी से बेच सकते हैं। ये प्लेटफॉर्म अब व्यवसाय के लिए बेहद कुशल संचार चैनल बनकर उभरे हैं।


अब अभिलाषा जैन को ही ले लीजिए। जब तक कि वे बिजनेस से नहीं जुड़ीं थीं तब वे गृहिणी होने के नाते एक माँ, एक शानदार कुक के रूप में संतुष्ट थीं।



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कई वर्षों से, वह अपने परिवार के लिए खाना पकाने का आनंद ले रही थीं। वे पारंपरिक मारवाड़ी व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित करती थीं, जो उन्हें अपने परिवार से पीढ़ी दर पीढ़ी मिला ज्ञान है। यह खाना आमतौर पर रेस्तरां या भोजनालयों में नहीं मिलता है।


एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ बिजनेस का सफर

2014 में, अभिलाषा ने गुरुग्राम में माताओं के एक फेसबुक पेज पर पोस्ट किया कि वह आने वाले रविवार को एक पारंपरिक राजस्थानी डिश, दाल-बाटी और चूरमा तैयार करेंगी। उनके आश्चर्य से अधिक, उन्हें उस सिंगल पोस्ट से 40 ऑर्डर मिले। उस फेसबुक पर मिली लोगों की प्रतिक्रिया ने उस होममेकर को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। और तब, फेसबुक पर एक पोस्ट और उनके परिवार के फुल समर्थन के साथ, मारवाड़ी खाना (Marwadi Khana) का जन्म हुआ।


वह याद करते हुए कहती हैं,

“एक पारंपरिक राजस्थानी परिवार से होने के नाते, मुझे खाने में हमेशा दिलचस्पी थी। हालाँकि मैंने अपनी स्कूली शिक्षा और कॉलेज अजमेर में की थी, लेकिन मैं अपनी छुट्टियों के दौरान भीलवाड़ा वापस घर आती थी और रसोई में अपनी दादी-नानी की डिशेश को फिर से बनाती थी। मेरे परिवार से मिली तारीफ ने मुझे प्रेरित किया।


हालांकि शादी के बाद, वह एक साल के लिए स्कॉटलैंड चली गईं। वे कहती हैं,

“कोई मदद नहीं मिली। हम एक ठंडी जलवायु में रह रहे थे, और मैंने परिवार और दोस्तों के लिए तरह-तरह की डिशेश बनाना शुरू कर दिया। मैंने बिल्कुल जीरो से पारंपरिक राजस्थानी डिशेश बनाना शुरू किया था।”


व्हॉट्सएप के आने से अभिलाषा के लिए चीजें आसान होने लगीं। उन्होंने लोगों को ब्रॉडकास्ट भेजना शुरू किया, फिर लोगों ने उन्हें एक दूसरे को रेकमंड करना शुरू किया और सिलसिला चल निकला। वर्तमान में, उनके पास 5 से अधिक लिस्ट हैं क्योंकि व्हाट्सएप एक ब्रॉडकास्ट लिस्ट में केवल 250 लोगों अनुमति देता है।


वे कहती हैं,

“हालांकि मैं हर दिन ब्रॉडकास्ट नहीं करती हूं और सप्ताह में एक बार या एक पखवाड़े में करती हूं, मेरे 90 प्रतिशत ऑर्डर व्हाट्सएप के माध्यम से आते हैं। इसने मुझे अपने ग्राहकों के साथ संपर्क बनाए रखने में मदद की है, जैसे कि आज मेरी रसोई में क्या नया है, इसकी जानकारी देने के लिए या बल्क में ऑर्डर लेने के लिए भी व्हाट्सएप ने काफी मदद की है।”



अपने स्पेस में मूव करना

जुलाई 2019 तक, अभिलाषा ने अपने होम किचन का उपयोग कुछ मदद के साथ खाना बनाने, और कुछ अन्य लोगों के लिए डिलीवरी के लिए किया। लेकिन फिर उन्होंने महसूस किया कि कक्षा 9 की छात्रा उनकी बेटी, घर पर इन सभी गतिविधि से परेशान हो रही थी, और घर से लगातार भोजन की गंध फैल रही थी। जल्द ही, उन्होंने अपने बेस किचन के रूप में पास की एक छोटी सी जगह किराए पर लेने का फैसला किया। उन्होंने लगभग 20 लाख रुपये का निवेश किया और 1,000 वर्ग फुट क्षेत्र में बिल्कुल शुरुआत से रसोई स्थापित की। वीकेंड उनके सबसे व्यस्त समय में से होता है, और जब भी वे आते हैं तो थोक ऑर्डर के अलावा, उन्हें 40-50 से अधिक ऑर्डर को पूरा करना पड़ता है। वह प्रति माह 4-5 लाख रुपये का राजस्व कमाती हैं।


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अभिलाषा के मेनू में पारंपरिक मारवाड़ी भोजन जैसे दाल बाटी और चूरमा, लपसी, मक्की का ढोकला, बजरे की खिचड़ी, गोंद का लड्डू, गर्भावस्था के बाद खाए जाने वाले लड्डू आदि शामिल हैं।


वे कहती हैं,

“मेरा उद्देश्य हाई-क्वालिटी की सामग्री के माध्यम से राजस्थानी व्यंजनों, और इसकी विविधता और समृद्धि का प्रदर्शन करना है। मेरे लड्डू बहुत हिट हैं और मैं उन्हें पूरे भारत में पहुँचाती हूँ।”


जहां बिजनेस भले ही एक फेसबुक पोस्ट के साथ शुरू हुआ हो और तुरंत लोगों ने इसको मान्यता और प्रतिक्रिया दी हो, लेकिन इसकी यात्रा में भी चुनौतियों कम नहीं थीं।


उन्होंने कहा,

“जिस बड़ी समस्या का सामना मैंने किया, वह थी लोगों को खाना पहुंचाना। इसके अलावा, कर्मचारियों को बनाए रखना, विशेष रूप से अकुशल श्रम एक और चुनौती थी। चूंकि उनमें से कुछ को दैनिक वेतन पर रखा गया था, अगर वे एक दिन नहीं आते तो काम बिगड़ सकता था।”


व्यवसाय को स्केल करना उद्यमी के दिमाग में है लेकिन वह "धीमा और स्थिर जाना" पसंद करती हैं। वह कहती हैं कि जिस दिन वह अपने घर से बाहर निकली, नंबर उसे परेशान करने लगे।


वे कहती हैं,

“मेरे पास अब अधिक ओवरहेड्स हैं, और किराया भी देना होता है। इसके अलावा, मैं जो भोजन बनाती हूं वह अपने आप में खास है; एक जो नहीं खाया जा सकता। मैं किसी भी तरह से भोजन की गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहती, विशेष रूप से घी की गुणवत्ता, जो भोजन में एक प्रमुख कारक है।


वह अधिक फूड फेस्टिवल्स में भाग लेना चाहती हैं और समय के साथ, इस “समृद्ध, आत्मा-संतोषजनक” भोजन को दुनिया में ले जाना चाहती हैं।


वे कहती हैं,

“मारवाड़ी खाना फूड को लेकर मेरे जुनून का एक हिस्सा है। मैं इस जुनून को बहुत कमर्शियल नहीं करना चाहती।

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