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मिलिए उस आईएएस अफसर से जो खुद लगाते हैं ऑफिस में झाड़ू

मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) के जिलाधिकारी अजयशंकर पांडेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को पंख लगाते हुए अपने दफ्तर की वह साफ-सफाई करते हैं। वह रोजाना दस मिनट अपने कार्यालय कक्ष में झाड़ू लगाते हैं।

जय प्रकाश जय
15th May 2019
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आईएएस अजय शंकर पांडेय

आज से लगभग एक साल पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राज्य की उन महिला आईएएस अधिकारियों को स्वच्छ शक्ति सम्मान दिया गया था, जिनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को प्रदेश में कारगर कामयाबी मिली थी। इस अवसर पर स्वच्छ शक्ति सम्मान से गाजियाबाद की आईएएस अधिकारी मिनिस्ती एस, इटावा की डीएम सेल्वा कुमारी जे., बागपत की मुख्य चांदनी सिंह, हापुड़ की दीपा रंजन, उपनिदेशक पंचायती राज प्रवीणा चौधरी और हापुड़ की रेनू श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया था, लेकिन इस समय मुजफ्फनगर के जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय स्वच्छ भारत मिशन की सुर्खियों में छाए हुए हैं। वह रोजाना अपने कार्यालय में सफाई कर लोगों के बीच स्वच्छता अभियान को लेकर एक सकारात्मक संदेश दे रहे हैं। डीएम अपने कार्यालय में प्रतिदिन दस मिनट सफाई का कार्य करते हैं। इसके अलावा वह व्यक्तिगत रूप से भी लोगों से साफ-सफाई रखने की अपील करते रहते हैं।


पांडेय ने अपने कार्यालय के बाहर नोटिस बोर्ड पर भी अपना सफाई-संदेश लिखवा रखा है। डीएम का कोई भी मुलाकाती उनके इस अतिरिक्त प्रयास से प्रभावित हुए बिना रहता है। अब तक ऐसे मुलाकातियों में से अनेक लोग खुद स्वच्छ भारत मिशन का संकल्प ले चुके हैं। डीएम अजय शंकर पांडेय साफ-सफाई के प्रति खुद तो सजग हैं ही, वह प्रायः लोगों से अपील किया करते हैं कि वे चौबीस घंटे में से सिर्फ दस मिनट निकालकर साफ-सफाई में अपना हाथ बंटाएं।


वह कहते हैं कि हम केवल एक हजार सफाई कर्मियों से पूरा शहर साफ करने की उम्मीद नहीं कर सकते। इसके लिए हमें खुद भी अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अगर देश का हर आदमी केवल दस मिनट साफ-सफाई पर समय दे दिया करे तो देश की एक बड़ी समस्या एकदम आसानी से समाप्त हो सकती है। पांडेय मुजफ्फरनगर से करीब चार वर्ष पहले गाजियाबाद में नगर आयुक्त के पद पर तैनाती के दौरान स्वच्छता अभियान को धार देने के कारण चर्चा में आए थे।


आइएएस अधिकारी अजय शंकर पांडे बताते हैं कि वह पिछले कई वर्षों से स्वयं अपने दफ्तर की सफाई करते आ रहे हैं। वह दूसरे जिलों में भी तैनाती के दौरान ऐसा करते रहे हैं। हाल ही में मुजफ्फरनगर में रमजान की तैयारियों पर बैठक में भी उन्होंने नगरवासियों से आह्वान किया कि वे 24 घंटों में से मात्र 10 मिनट का समय सफाई कार्य में दें। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक सफाई कार्य को दस मिनट देने लगे तो बड़े आराम से बीस लाख श्रम दिवसों का सृजन किया जा सकता है।


गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक ग्रामीण भारत में 9.8 करोड़ से भी ज्यादा शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2 अक्टूबर, 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करने का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छता कवरेज आज 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि यह 2014 में 39 प्रतिशत था।


इससे स्वच्छ भारत मिशन अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच से मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 5.57 लाख से अधिक गांव और 616 जिले खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किए गए हैं। अब तक 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने स्वयं को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है।


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