MSMEs को सरकार का दिवाली गिफ्ट, नॉन-टैक्स बेनिफिट्स को लेकर किया बड़ा बदलाव

By yourstory हिन्दी
October 19, 2022, Updated on : Wed Oct 19 2022 12:28:59 GMT+0000
MSMEs को सरकार का दिवाली गिफ्ट, नॉन-टैक्स बेनिफिट्स को लेकर किया बड़ा बदलाव
गैर-कर लाभों में सार्वजनिक खरीद नीति और विलंबित भुगतान सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ शामिल हैं.
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पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) 3 साल के लिए पुनर्वर्गीकरण (Re-Classification) के बाद अपनी संबंधित श्रेणियों में सभी गैर-कर लाभ प्राप्त करना जारी रख सकेंगे. पहले यह अवधि 1 वर्ष की थी. इस बारे में सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है. गैर-कर लाभों में सार्वजनिक खरीद नीति और विलंबित भुगतान सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ शामिल हैं.


एमएसएमई मंत्रालय (Ministry of MSME) ने अधिसूचित किया है कि संयंत्र व मशीनरी या उपकरण या टर्नओवर या दोनों में और परिणामी पुनर्वर्गीकरण में निवेश की शर्तों में अपवार्ड चेंजेस के मामले में एक उद्यम उस श्रेणी के सभी गैर-कर लाभों को उठाना जारी रखेगा, जिसमें वह पुनर्वर्गीकरण से पहले था. यह अपवार्ड चेंजेस की तिथि से तीन साल की अवधि के लिए होगा.

फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप

आगे कहा गया कि यह निर्णय एमएसएमई हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद लिया गया है और यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है. भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने उन पंजीकृत एमएसएमई को उनकी श्रेणी में ऊपरी क्रमिक बढ़ोतरी और परिणामी पुनर्वर्गीकरण के मामले में एक साल की जगह तीन वर्षों के लिए गैर-कर लाभ प्राप्त करना जारी रखने की अनुमति दी है.

93048 माइक्रो एंटरप्राइजेस बन चुके हैं स्मॉल एंटरप्राइजेस

संसद के मानसून सत्र में एमएसएमई राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह ने कुछ आंकड़े शेयर किए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक, देश में 6.3 करोड़ एमएसएमई में से 93048 माइक्रो एंटरप्राइजेस, जुलाई 2020 से जुलाई 2022 के बीच स्मॉल एंटरप्राइजेस में तब्दील होने के लिए आगे बढ़ चुके हैं. दूसरी ओर 10,141 स्मॉल एंटरप्राइजेस ऐसे हैं, जो इसी अवधि में मीडियम बिजनेस कैटेगरी में मूव कर गए.

2020 में बदली थी MSME की परिभाषा

सरकार ने साल 2020 में एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया था. नई परिभाषा के तहत अब 1 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली और 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली इकाइयां माइक्रो सेगमेंट कैटेगरी में आने लगी हैं. इसी तरह 10 करोड़ रुपये तक के निवेश और 50 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियां स्मॉल बिजनेस में गिनी जाती हैं. अब 50 करोड़ रुपये तक के निवेश और 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली यूनिट्स, मीडियम एंटरप्राइजेस के तहत आती हैं.



Edited by Ritika Singh