धूप और बारिश में खड़े पुलिसकर्मियों की मदद कर रहा है यह NGO, बाँट रहा है छाते और रेनकोट

By शोभित शील
June 23, 2021, Updated on : Wed Jun 23 2021 04:30:19 GMT+0000
धूप और बारिश में खड़े पुलिसकर्मियों की मदद कर रहा है यह NGO, बाँट रहा है छाते और रेनकोट
Meghaश्रेय नाम का यह एनजीओ आज मुंबई में सड़कों पर ड्यूटी पर लगे तमाम पुलिसकर्मियों और अन्य जरूरतमंदों को छाते और रेनकोट बांटने का काम कर रहा है।
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"सीमा सिंह अपने इस एनजीओ के तहत आज लोगों के हित के लिए करीब 25 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। गौरतलब है कि अपने इन्हीं प्रोजेक्ट्स के साथ सीमा सिंह आज करीब 10 हज़ार से भी अधिक लोगों की मदद कर चुकी हैं।"

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हमारे देश में आमतौर पर समाज में बनी हुई पुलिस की छवि बेहतर नहीं है और आम लोगों के बीच पुलिस को देखकर सुरक्षा का भाव महसूस होना भी आम नहीं है, जबकि यह भी सच है कि यही पुलिसकर्मी हमारी सेवा और सुरक्षा के लिए बुरे से बुरे हालातों में भी हमारे लिए खड़े रहते हैं और दुर्भाग्य से कई बार इसकी कीमत पुलिसकर्मियों की शहादत के रूप में भी दिखाई देती है।


हाल ही में भारत के समुद्री तट पर आए साइक्लोन ताऊते के समय भी यही पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और भारी बारिश के बीच भीगते हुए लोगों के लिए सड़क पर व्यवस्था को सुचारु रूप से जारी रख सकने के प्रयास में जुटे थे। ऐसे ही पुलिसकर्मियों की मदद के लिए मुंबई आधारित एक एनजीओ बड़े ही सराहनीय ढंग से पहल कर रहा है।

बाँट रहे हैं रेनकोट और छाते

Meghaश्रेय नाम का यह एनजीओ आज मुंबई में सड़कों पर ड्यूटी पर लगे तमाम पुलिसकर्मियों और अन्य जरूरतमंदों को छाते और रेनकोट बांटने का काम कर रहा है। एनजीओ की तरफ की जाने वाली यह मदद देखने में भले ही छोटी सी लग सकती है लेकिन बारिश के दौरान ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए संसाधन बहुत काम के हैं।


Meghaश्रेय एनजीओ की संस्थापक सीमा सिंह इससे पहले भी कई तरह के सामाजिक कार्यों में भाग ले चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मदद कर चुकी हैं।

घर से की मदद की शुरुआत

सीमा सिंह बेहद कम उम्र में ही लोगों की मदद करने में अपनी रुचि दिखाने लगीं थीं और शुरू से ही यही काम उन्हे संतोष प्रदान करता था। लोगों की मदद करते हुए सीमा सिंह हमेशा से ही अपने आस-पास के समाज में एक बदलाव लाना चाहती थीं।


सीमा सिंह ने इसकी शुरुआत अपने घर से ही की और सबसे पहले अपने घर पर काम करने वाले ड्राइवर के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च खुद उठाने का फैसला किया। इसी के साथ साल 2000 में सीमा सिंह ने Meghaश्रेय एनजीओ की स्थापना भी की। गौरतलब है कि एनजीओ का नाम उनके दोनों बच्चों के नाम पर रखा गया है।


सीमा सिंह के फैसले को उनके परिवार का पूरा समर्थन प्राप्त था और शायद इसी वजह से सीमा सिंह और अधिक ऊंचे मनोबल के साथ जनमानस की भलाई के अपने लक्ष्य की तरफ अधिक तेजी से आगे बढ़ पाईं।

10 हज़ार से अधिक लोगों की मदद

सीमा सिंह अपने इस एनजीओ के तहत आज लोगों के हित के लिए करीब 25 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। गौरतलब है कि अपने इन्हीं प्रोजेक्ट्स के साथ सीमा सिंह आज करीब 10 हज़ार से भी अधिक लोगों की मदद कर चुकी हैं।


सीमा सिंह को उनके इन कामों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें मुंबई पुलिस मेडल भी शामिल है।


गरीब बच्चों की शिक्षा हो, जरूरतमंद लोगों में खाना वितरण करना हो या महिला सशक्तिकरण का काम हो, सीमा सिंह अपने Meghaश्रेय एनजीओ के साथ लगातार लोगों की भलाई के लिए डटी हुई हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान लागू हुए लॉकडाउन के दौरान भी इस एनजीओ ने हजारों की संख्या में जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने का काम किया है।


Edited by Ranjana Tripathi

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