निखत ज़रीन ने दूसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास, 13 की उम्र में शुरू की थी बॉक्सिंग

निखत ने कहा, "मैं फाइनल के बारे में ज्यादा कुछ नहीं सोच रही हूं. मेरा ध्यान अपने बेसिक्स पर है. मैं चाहती हूं कि अपनी मम्मी के सामने गोल्ड जीतकर यह मेडल उनके गले में डाल दूं. वह पहली बार स्टेडियम में मैच देखने आई हैं."

भारतीय मुक्केबाज निखत ज़रीन (Nikhat Zareen) ने रविवार को नई दिल्ली में आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप (IBA Women's World Boxing Championships) में 50 किग्रा वर्ग के अंतिम बाउट में दो बार की एशियाई चैंपियन वियतनाम की गुयेन थी टैम (Nguyen Thi Tam) को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया है.

निखत ने 5-0 से जीत हासिल की और भारत को चल रही चैंपियनशिप में अपना स्वर्ण पदक दिलाने में मदद की. दिग्गज मुक्केबाज़ मैरी कॉम के बाद निखत अब विश्व चैंपियनशिप में कई स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज़ हैं.

निखत ने वियतनाम की एक खिलाड़ी को हराकर अपना दूसरा विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक जीता. निखत ने पूरे बाउट में अपने प्रतिद्वंदी पर काबू पाया और गुयेन थी टैम को अपना संतुलन हासिल करने का कोई मौका नहीं दिया.

फाइनल में जीत को लेकर निखत बेहद आश्वस्त हैं. निखत ने कहा, "मैं फाइनल के बारे में ज्यादा कुछ नहीं सोच रही हूं. मेरा ध्यान अपने बेसिक्स पर है. मैं चाहती हूं कि अपनी मम्मी के सामने गोल्ड जीतकर यह मेडल उनके गले में डाल दूं. वह पहली बार स्टेडियम में मैच देखने आई हैं."

इससे पहले शनिवार को, इतिहास रचते हुए, युवा भारतीय मुक्केबाज़ नीतू घनघास को यहां इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में सनसनीखेज जीत दर्ज करने के बाद पहली बार विश्व चैंपियन के रूप में ताज पहनाया गया.

निखत ने महज 13 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू कर दी थी, लेकिन उनके लिए यह आसान नहीं था. समाज की तरफ से उन पर हिजाब पहनने का दबा डाला गया. उनके शॉर्ट्स पहनने पर भी आपत्ति जताई गई. हालांकि, निखत के पास उनके परिवार का समर्थन था और वह इन सब चीजों से लड़ते हुए कड़ी प्रैक्टिस पर लगी रहीं. निखत के पिता जमील अहमद खुद पूर्व फुटबॉलर और क्रिकेटर रह चुके हैं. ऐसे में उन्होंने बेटी को खेल में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. निखत लड़कों के साथ प्रैक्टिस करती थीं और इस पर कई तरह की बातें की जाती थीं, लेकिन वह सब कुछ अनसुना करते हुए लगी रहीं.

ग्रेजुएशन के दौरान एवी कॉलेज से ही निखत ने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत की. उन्हें पहली सफलता साल 2010 में मिली. 15 साल की निखत ने नेशनल सब जूनियर मीट में शानदार प्रदर्शन किया. उसके बाद साल 2011 में तुर्की में हुए महिला जूनियर यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में फ्लाई वेट में गोल्ड जीता. उस साल निखत ने अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ महिला युवा और जूनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर बॉक्सिंग में अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया. निखत ने बैंकॉक में हुए ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया. साल 2014 में नेशनल कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता.

यह भी पढ़ें
स्कूल में गोलीबारी की रिपोर्टिंग कर रही थीं रिपोर्टर, बेटे को बाहर आते देखा तो काम रोक फौरन गले लगा लिया