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पैकेज: छोटे उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज सुलभ कराने की पेशकश

पैकेज: छोटे उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज सुलभ कराने की पेशकश

Thursday May 14, 2020 , 4 min Read

नयी दिल्ली, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लघु उद्योगों के लिये बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा दिलाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने गैर-वेतन भुगतान पर कर कटौती में एक चौथाई राहत तथा गैर-बैंकिंग कंपनियों को नकदी की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराने की योजनाओं का भी ऐलान किया।


छोटे उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज सुलभ कराने की पेशकश

छोटे उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज सुलभ कराने की पेशकश


इन उपायों का मकसद कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ से कंपनियों और इकाइयों को राहत देना है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस संकट से अर्थ्रव्यवस्था को राहत देने के लिये 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज के बारे में पहले चरण की जानकारी देते हुए सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 90,000 की नकदी बिजली वितरण कंपनियों को उपलब्ध करायी जाएगी ताकि उन्हें मौजूदा वित्तीय संकट से पार पाने में मदद मिले।


इस मौके पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद थे।


इसके अलावा आयकर रिटर्न और अन्य रिटर्न भरने की तिथि भी बढ़ा दी गयी है।


वित्त मंत्री ने कहा कि बिना वेतन वाले भुगतान के लिये स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर में 31 मार्च 2021 तक के लिये 25 प्रतिशत की कटौती की गयी है।


उन्होंने कहा कि इस कदम से इकाइयों के पास 50,000 करोड़ रुपये की नकदी बढ़ेगी।


मंत्री ने 100 से कम कर्मचारी वाले कंपनियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में योगदान से राहत की अवधि भी तीन महीने के लिये बढ़ा दी।


साथ ही सभी कंपनियों के लिए ईपीएफ में कर्मचारियों के मूल वेतन के 12 प्रतिशत के बराबर सांविधिक योगदान करने की जगह इसे 10 प्रतिशत करने की छूट दी गयी है। इससे नियोक्ताओं के पास अतिरिक्त नकदी बचेगी।


निर्माण क्षेत्र को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां सभी ठेकेदारों को निर्माण और वस्तु एवं सेवा अनुबंधों को पूरा करने के लिये छह महीने की समयसीमा बढ़ाएंगी।


सीमारमण ने कहा,

‘‘इस पैकेज से आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी और एक आत्मनिर्भर भारत बनने का रास्ता साफ होगा...इसके जरिये कारोबार सुगमता, अनुपालन को आसान बनाया गया है तथा हमारा इरादा स्थानीय तौर पर बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।’’


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘लॉकडाउन’ से प्रभावित अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिे 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) क लगभग 10 प्रतिशत है।


एमएसएमई और अन्य छोटी इकाइयों के बारे में सीतारमण ने कहा कि बिना किसी गारंटी के कर्ज की सुविधा से 45 लाख लघु उद्यमों को लाभ होगा।


वित्त मंत्री ने कहा कि यह कर्ज चार साल के लिये दिया जाएगा और 12 महीने तक किस्त से राहत दी जाएगी।


इसके अलावा इस समय कर्ज नहीं चुका पा रही एमएसएमई इकाइयों के लिए भी कुल 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा दी जाएगी। इससे 2 लाख इकाइयों को लाभ होगा।


सीतारमण ने कहा कि एमएसएमई के लिये ‘फंड ऑफ फंड’ गठित किया जा रहा है, इसके जरिये वृद्धि की क्षमता रखने वाले एमएसएमई में 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी डाली जाएगी।


इसके साथ एमएसएमई की परिभाषा बदली गयी है। इसके तहत अब एक करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां सूक्ष्म इकाई कहलाएंगी। अबतक यह सीमा 25 लाख रुपये थी।


उन्होंने कहा कि इसके साथ एमएसएमई की परिभाषा के लिये कारोबार आधारित मानदंड बनाया गया है। इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयां भी सूक्ष्म इकाइयां कहलाएंगी।


सीतारमण ने कहा कि लघु एवं मझोले उद्यमों के लिये निवेश और कारोबार सीमा बढ़ाने के जरिये उन्हें वित्तीय और अन्य लाभ उठाने की छूट दी गयी है।


उन्होंने यह भी कहा कि 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद को लेकर वैश्विक निविदा पर पाबंदी होगी। इससे एमएसएमई को सरकारी निविदाओं में भाग लेने तथा और अधिक कारोबार हासिल करने में मदद मिलेगी।


वित्त मंत्री ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) और सूक्ष्म राशि के ऋण देने वाले संस्थानों (एमएफआई) के लिये मुश्किल के इस दौर में 30,000 करोड़ रुपये के विशेष नकदी योजना की भी घोषणा की।


इसके अलावा निम्न साख रखने वाले एनबीएफसी, आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिये 45,000 करोड़ रुपये की आंशिक ऋण गारंटी (पार्शियल क्रेडिट गारंटी) योजना 2.0 की भी घोषणा की। इस पहल का मकसद है कि ये कंपनियां व्यक्तियों तथा एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) क्षेत्र की इकाइयों को अधिक कर्ज दे सकें।



Edited by रविकांत पारीक