माँ-बाप ने दूसरों के खेतों में काम कर बेटे को पढ़ाया और अब इसरो में सीनियर साइंटिस्ट बन गया बेटा

सोमनाथ माली का इसरो में चयन बीते 2 जून को हुआ है और इसके लिए लिखित परीक्षा के बाद उन्होने तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में इंटरव्यू दिया था।

माँ-बाप ने दूसरों के खेतों में काम कर बेटे को पढ़ाया और अब इसरो में सीनियर साइंटिस्ट बन गया बेटा

Tuesday June 29, 2021,

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"परिवार के संघर्ष को देखते हुए सोमनाथ ने भी अपनी पढ़ाई और आगे की तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ने का संकल्प ले रखा था। मीडिया से बात करते हुए सोमनाथ ने बताया है कि उनके घर में उनके सिवा कोई और पढ़ा-लिखा नहीं है।"

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फोटो साभार : लोकमत

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रहने वाले सोमनाथ माली की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। सोमनाथ माली का चयन इसरो में बतौर सीनियर साइंटिस्ट हुआ है और खास बात यह भी है कि सोमनाथ इसरो में बतौर साइंटिस्ट चुने जाने वाले महाराष्ट्र के पहले छात्र हैं।


सोमनाथ माली का इसरो में चयन बीते 2 जून को हुआ है और इसके लिए लिखित परीक्षा के बाद उन्होने तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में इंटरव्यू दिया था।

शिक्षा के लिए माँ-बाप ने की मजदूरी

तथाकथित पिछड़े वर्ग से आने वाले सोमनाथ माली सोलापुर जिले के पंढरपुर तहसील स्थित सरकोली गाँव के निवासी हैं। गरीब परिवार में जन्मे सोमनाथ माली के लिए यह सब हासिल करना इतना आसान नहीं था। बताते चलें कि सोमनाथ के माता-पिता अपने बेटे को बेहतर शिक्षा देने के लिए दूसरे के खेतों में मजदूरी करने का काम किया है।


शुरुआती शिक्षा के लिए सोमनाथ ने गाँव में ही स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में ही दाखिला लिया था, जहां से उन्होने 7वीं और उसके बाद सेकेन्डरी स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की थी। 11वीं में सोमनाथ ने पंढरपुर स्थित केबीपी कॉलेज में दाखिला ले लिया था।


परिवार के संघर्ष को देखते हुए सोमनाथ ने भी अपनी पढ़ाई और आगे की तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ने का संकल्प ले रखा था। मीडिया से बात करते हुए सोमनाथ ने बताया है कि उनके घर में उनके सिवा कोई और पढ़ा-लिखा नहीं है।

कर रहे थे एयरक्राफ्ट इंजन डिजाइन

सोमनाथ ने साल 2011 में 12वीं की परीक्षा 81 फीसदी अंकों के साथ पूरी की थी और इसके बाद वह बीटेक की पढ़ाई के लिए मुंबई चले गए थे। सोमनाथ ने इसके बाद गेट की परीक्षा दी और पूरे भारत में 916वां स्थान हासिल किया था।


यहाँ से सोमनाथ को आईआईटी दिल्ली में मकैनिकल डिजाइनर के रूप में चुना गया था, जहां उन्हें एमटेक के दौरान एयरक्राफ्ट इंजन को डिजाइन करने का काम मिला था।

पहले भी दी थी परीक्षा

सोमनाथ ने इसके पहले साल 2016 में बीटेक के आधार पर इसरो की परीक्षा दी थी, लेकिन तब वह रिटेन परीक्षा पास नहीं कर सके थे, लेकिन इस बार सफलता हासिल करने के बाद अब वह जल्द ही विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में बतौर सीनियर साइंटिस्ट अपनी सेवाएँ देना शुरू करेंगे।


इसरो में काम करते हुए सोमनाथ चंद्रयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करने की ख़्वाहिश रखते हैं। मालूम हो कि इसरो आमतौर पर हर साल रिक्त साइंटिस्ट व अन्य पदों की भर्ती के लिए आवेदन जारी करती है।


इस सफलता के पीछे परिवार के साथ ही सोमनाथ के संघर्ष की कहानी आज सभी को प्रेरणा देने का काम कर रही है। अपनी इस सफलता के साथ ही सोमनाथ देश भर के छात्रों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि अगर वे सभी भी अपने लक्ष्य के प्रति ध्यान केन्द्रित करते हुए लगातार प्रयास कर रहे हैं तो उन्हें भी सफलता जरूर मिलेगी।


Edited by Ranjana Tripathi