पार्ट- 1: NRI भगोड़े दूल्हों ने बर्बाद कर दी 25000 महिलाओं की जिंदगी

By जय प्रकाश जय
May 12, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
पार्ट- 1: NRI भगोड़े दूल्हों ने बर्बाद कर दी 25000 महिलाओं की जिंदगी
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सांकेतिक तस्वीर

यह अपने आप में कितना जघन्य है कि देश की 25000 से अधिक वे महिलाएं न्याय के लिए वर्षों से दर-दर भटक रही हैं, जिनसे शादी कर अथवा उनसे संबंध के बाद एनआरआई दूल्हे फरार हैं। अब ऐसी परित्यक्ताएं 40 हजार महिलाओं के 'टुगेदर वी कैन' ग्रुप के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं।


बड़ी-बड़ी, सनसनीखेज, चटपटी खबरों के आधुनिक मीडिया-तामझाम, चीख-चिल्लाहट में प्रायः कुछ ऐसी सूचनाएं ओझल हो जाया करती हैं, जिससे, न्याय की दृष्टि से, खासकर हमारे देश की आधी आबादी के सामाजिक सरोकारों को गंभीर चोट पहुंच रही है। चंडीगढ़ के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से जुड़ी एक ऐसी ही सूचना है, जिससे पता चलता है कि हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ की 25000 से अधिक महिलाओं से शादी रचाने के बाद दगाबाज एनआरआई दूल्हे फरार हैं, जबकि, अब तक केंद्रीय महिला आयोग की एनआरआई सेल के सामने चार हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं।


वैसे तो चंडीगढ़ पासपोर्ट कार्यालय ने 92 एनआरआई पतियों के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं लेकिन सबसे गौरतलब ये है कि हजारों महिलाओं की पूरी जिंदगी बर्बाद कर देने वाले उन पतियों के खिलाफ इंसाफ की गुहार लगाते हुए पत्नियों ने थाने में जो रिपोर्ट दर्ज करवा रखी हैं, उनको हमारे समाज, हमारी पुलिस और हमारे मीडिया तंत्र ने कितनी गंभीरता से लिया है। फिलहाल, दर-ब-दर भटकती ऐसी महिलाएं पुलिस और सरकारों से निराश होकर अब 'टुगेदर वी कैन' ग्रुप बनाकर देशभर की चालीस हजार से अधिक महिलाओं के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं।


सरकार, पुलिस, अदालत से एनआरआई परित्यक्ताओं की मांग है कि उनके मूल अधिकारों की हिफाजत की जाए, केंद्र और अन्य प्राधिकरणों के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देशों के साथ ऐसे मामलों पर न सिर्फ तत्काल कार्रवाई हो, बल्कि पीड़िताओं की हर किस्म की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधान किए जाएं, इमीग्रेशन सेवा, पासपोर्ट कार्यालय, भारतीय दूतावासों, उच्यायोगों को भी निर्देश देते हुए पुलिस तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर जांच करे, एफआईआर दर्ज होते ही लुकआउट सर्कुलर जारी हो, अभियुक्तों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चले, विदेशों में रहने वाले आरोपी पुरुषों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो, साथ ही परित्यक्ता को आर्थिक आत्मनिर्भरता, अगर बच्चे हैं तो उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य के तुरंत इंतजाम किए जाएं, भगोड़े पर जारी दंड राशि आरोपियों के घरवालों से वसूली जाए।


हमारी जैसी समाज व्यवस्था है और जैसी विदेशों में खुली संस्कृति है, उसके मद्देनजर अब तो यह भी जरूरी माना जा रहा है कि एनआरआई से शादी की इच्छुक लड़कियों अथवा उनके परिजनों के प्रयास सरकार और कानून खुद किसी एजेंसी से निगरानी के बाद ब्याह की अनुमति दे। ऑनलाइन सेवाओं में भी पारदर्शिता हो ताकि कोई लड़की किसी तरह के झांसे में न आने पाए। साथ ही ऐसे एनआरआई भगोड़ों का भारतीय समाज में संगठित तरीके से सामाजिक बहिष्कार कराया जाए।


सिर्फ चंडीगढ़ न्याय परिक्षेत्र ही नहीं, भारत के अन्य हिस्सों में भी शादी का झांसा देकर भाग जाने वाले या पत्नियों को प्रताड़ित करने वाले एनआरआई पुरुषों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगता जा रहा है। ऐसे मामलों पर कानूनी उपाय आधे-अधूरे हैं और सामाजिक जागरूकता पूरी तरह नदारद। फिलहाल, ऐसे भगोड़े एनआरआई पतियों के खिलाफ दिल्ली में 96, उत्तरप्रदेश में 94, हरियाणा में 68, तमिलनाडु से 65, तेलंगाना में 64, आंध्रप्रदेश में 54, महराष्ट्र में 63, गुजरात में 48 शिकायतों की मुद्दत से सिर्फ छानबीन चल रही है। एक और हैरत की बात ये है कि वर्ष 2017 से अब तक महिला आयोग तक सिर्फ 528 शिकायतें पहुंची हैं।


एक संसदीय समिति की सिफारिश पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने आज से एक दशक पहले सितंबर 2009 में 'एनआरआई सेल' का गठन किया था। उसके बाद से सेल के सामने 4,274 शिकायतें आ चुकी हैं। एक अन्य जानकारी से पता चलता है कि महिला आयोग के पास उपलब्ध सूचना के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने अब तक सिर्फ 61 पुरुषों के पार्सपोर्ट या तो स्थगित या रद्द कर दिए हैं और सिर्फ 14 मामलों की जांच चल रही है।


भले ही उपलब्ध आकड़ों के मुताबिक, एनआरआई परित्यक्ताओं की संख्या बीस-पचीस हजार मालूम पड़े हो, उनकी तादाद इससे कहीं बहुत ज्यादा है क्योंकि उनमें से ज्यादातर महिलाओं ने लोकलाज के डर से रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई है। वे ये सोचकर दुबक जाने को विवश हैं कि हमारे समाज में, घर हो या बाहर, वैसे ही स्थितियां कितनी भयानक यातनापूर्ण और असुरक्षित हैं। एक जानकारी के मुताबिक तीन माह पहले राज्यसभा में 'द रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरेज ऑफ नॉन रेजिडंट इंडियन बिल 2019' पेश किया गया था। कड़े प्रावधानों के बावजूद यह बिल जहां का तहां ही अटका रह गया है।


पिछले साल अक्टूबर में भगोड़े, दगाबाज एनआरआई पतियों के खिलाफ पीड़िताएं अदालत में भी एक याचिका दाखिल कर चुकी हैं। साथ ही, पिछले साल से ही सुप्रीम कोर्ट में भी एक जनहित याचिका दायर है। आरोपी एनआरआई सिर्फ हमारे कमजोर सिस्टम का फायदा उठा रहे हैं। महिला अधिकारों से कई संगठनों का तो यहां तक आरोप है कि एनआरआई शादियों की आड़ में देह व्यापार और मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं।


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