लॉकडाउन में लोग अपने पीएफ़ अकाउंट से लगातार निकाल रहे हैं पैसा, कुल 30 हज़ार करोड़ रुपये की हुई है निकासी

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किसी कर्मचारी के पीएफ़ खाते में उसके वेतन का 12 प्रतिशत उसके हिस्से से, जबकि 12 प्रतिशत का योगदान उसके संस्थान की तरफ से होता है।

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(सांकेतिक चित्र)



भविष्य निधि या पीएफ़ संकट के समय काम आने वाला धन का महत्वपूर्ण साधन है। लोग धन के इस श्रोत का इस्तेमाल तामतौर पर तभी करते हैं जब उनकी जीवनयापन को लेकर संकट पैदा हो जाते हैं। कोरोना वायरस महामारी ने लोगों के सामने ऐसे ही संकट पैदा कर दिये हैं, जिसके चलते लोग अब तेजी से पीएफ़ से पैसे निकाल रहे हैं।


कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक संकट को कम करने के लिए जिन घोषणाओं का ऐलान किया गया था उनमें पीएफ़ से पैसा निकालने की सुविधा देना भी शामिल था। आमतौर पर पीएफ़ से पैसे निकालना लोगों के लिए काफी मुश्किल साबित हो जाता है।


आंकड़ों के अनुसार पीएफ़ से पैसा निकालने वाले लोगों की संख्या 30 लाख के करीब है, हालांकि ईपीएफ़ओ का कहना है कि अप्रैल और जून महीने के दौरान करीब 80 लाख लोगों ने अपने पीएफ़ खातों से 30 हज़ार करोड़ रुपये निकाले हैं। इन लोगों में कम तंख्वाह वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है।


बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार लोगों ने पीएफ़ से पैसे निकालने के लिए इलाज को प्रमुख कारण बताया है, हालांकि लॉकडाउन ने बड़ी संख्या में लोगों को वित्तीय संकट की ओर धकेला है और जिसका परिणाम है कि लोग फौरी राहत के लिए पीएफ़ अकाउंट से पैसा निकाल रहे हैं।


इस दौरान जानकारों का मानना है कि लोगों के पास अधिक पैसा होने और उनके द्वारा अधिक पैसा खर्च करने से कोरोना वायरस महामारी के चलते बने मंदी के हालातों को टाला जा सकता है।


गौरतलब है कि किसी कर्मचारी के पीएफ़ खाते में उसके वेतन का 12 प्रतिशत उसके हिस्से से, जबकि 12 प्रतिशत का योगदान उसके संस्थान की तरफ से होता है।


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