कोविड ने पिता को छीन लिया, लेकिन इन दोनों भाई-बहन ने हिम्मत से हासिल कर ली कामयाबी!

By Palak Agarwal & Upasana
August 11, 2022, Updated on : Sat Aug 13 2022 13:44:18 GMT+0000
कोविड ने पिता को छीन लिया, लेकिन इन दोनों भाई-बहन ने हिम्मत से हासिल कर ली कामयाबी!
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इस महामारी में कई लोगों ने अपनों को खोया. किसी ने मां-बाप तो किसी ने अपने बच्चे को. अगर मां या पिता में से किसी की मौत हो जाए तो बच्चों की पूरी दुनिया ही बदल जाती है. उन पर जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ता है. ऐसे ही लोगों में शामिल हैं अदित और अंकिता फर्नांडिस. महामारी में मई 2020 में इनके पिता फ्रांसिस फर्नांडिस की मौत हो गई.


फ्रांसिस ने मुंबई के मशहूर सीफूड रेस्त्रां FreshCatchको शुरू किया था. उनके रेस्त्रां को 25 साल हो गए थे. फ्रांसिस की मौत से बच्चों को तो सदमा पहुंचा ही कंपनी के कर्मचारी और कस्टमर्स भी टूट से गए.


अदित कहते हैं, "पापा के लिए ये रेस्त्रां उनके तीसरे बच्चे जैसा था. वो रेस्त्रां को बिल्कुल अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे. उनके अंतिम संस्कार के समय मेरे अंदर से एक आवाज आई कि पापा कभी नहीं चाहेंगे कि उन्होंने इतने सालों की मेहनत से जिस रेस्त्रां को खड़ा किया है उसे हम यूं ही छोड़ कर अपनी दुनिया में चले जाएं. मेरी बहन और मैंने, हम दोनों ने खुद को मजबूत बनाया. हमारा अब एक मकसद था, उनकी विरासत को आगे कैसे ले जाएं. मगर ये इतना आसान भी नहीं था."


YourStory के साथ बातचीत में, अदित और अंकिता ने फ्रेशकैच को दोबारा शुरू करने के दौरान आई मुश्किलों के बारे में बताया. फ्रांसिस के जाने के बाद एंप्लॉयीज संशय में थे कि रेस्त्रां दोबारा चलेगा या नहीं, चलेगा तो कैसे? मगर हमने उन्हें भरोसा दिया कि बिजनेस चलेगा, वो भी पहले की तरह. कस्टमर्स को भी भरोसे में लेना एक चुनौती थी. उन्हें भी ये समझाना जरूरी था कि फ्रांसिस भले चले गए हों मगर उनके रेस्त्रां में वही पहले जैसा स्वाद मिलता रहेगा.

फ्रांसिस फर्नांडिस, फाउंडर, FreshCatch

फ्रांसिस फर्नांडिस, फाउंडर, FreshCatch

फ्रांसिस कर्नाटक के होनावर के रहने वाले थे, फिर वो मुंबई शिफ्ट हो गए थे. उन्होंने 1998 में फ्रेशकैच को शुरू किया था. उन्हें हमेशा से कुकिंग का शौक था. फ्रांसिस जिस जिले से आते हैं वह गोवा के बॉर्डर से लगा हुआ है. इसलिए उनकी रेसिपी में गोवन और मंगलोरियन दोनों स्वाद मिलते थे. मुंबई आने के बाद उन्होंने माहिम में एक किराये की जगह से रेस्त्रां की शुरुआत की थी. वहां वो लोकल सीफूड बेचा करते थे. उन्हें अच्छा रेस्पॉन्स मिला और बिजनेस चल पड़ा. धीरे-धीरे फ्रेशकैच हर घर में जाना जाने लगा.


अंकिता और अदित कंपनी की कामयाबी के पीछे फ्रांसिस की फ्रेश और खास रेसिपी को क्रेडिट देते हैं. दोनों बताते हैं, खाने में इस्तेमाल होने वाली हर एक चीज पापा होनावर के आसपास के जिलों से मंगाते थे. ताकि रेसिपी में उत्तर कनारा के इलाके वाला स्वाद बना रहे. कुजीन के लिए हमेशा ताजा सामान मिले इसके लिए उन्होंने सीधे मछुवारों से ही कॉन्ट्रैक्ट कर लिया था. हमने जब बिजनेस अपने हाथों में लिया तब उन्होंने हमारी भी काफी मदद की.


 2020 में पूरी तरह काम संभालने से पहले अंकिता कई बड़े नामी होटलों में बतौर शेफ काम कर चुकी थीं. अदित पापा का हाथ बंटाने के साथ-साथ एडवर्टाइजिंग एजेंसी के लिए काम करते थे जहां वो फूड ब्रैंड्स के लिए ऐड लिखते थे.


 हालांकि दोनों को अंदर ही अंदर इस बात का अंदाजा था कि उन्हें कभी न कभी पापा के बिजनेस में आना ही पड़ेगा.


अंकिता कहती हैं, हम दोनों जानते थे कि अंत में हमें ही बिजनेस देखना पड़ेगा और आज हम दोनों एक दूसरे के बिज़नेस पार्टनर हैं. हम चाहें किसी के भी साथ यह पार्टनरशिप कर लेते मगर हम दोनों की साझेदारी का कोई तोड़ ही नहीं है. क्योंकि इस बिजनेस से हम दोनों को जितना प्यार और लगाव है उतना शायद ही किसी और को होता.

FreshCatch के बांद्रा स्थित रेस्त्रां का इंटीरियर

FreshCatch के बांद्रा स्थित रेस्त्रां का इंटीरियर

दोनों भाई बहन ने मई 2020 में बिजनेस दोबारा शुरू किया. उस समय कोविड की वजह से पूरा देश लॉकडाउन में था. दोनों ने होम डिलीवरी के लिए अगस्त 2020 में जोमैटो और स्विगी के साथ करार किया. आलम ये हुआ कि लॉकडाउन की पाबंदियों के बाद भी सेल्स और बढ़ गई बिजनेस वापस पटरी पर लौट आया.


अदित बताते हैं, आज स्विगी और जोमैटो से हमारे रेस्त्रां से होम डिलीवरी 14 से 16 किमी बढ़ गई है. हमारे ऑनलाइन कस्टमर्स की संख्या बढ़ी है जो महामारी से पहले हमसे नहीं जुड़े थे.


अंकिता कहती हैं, माहिम वाले रेस्त्रां में 34 लोग ही बैठ सकते थे. बाकी लोग खाने के लिए घंटों लाइन में लगे रहते थे. हाल ही हमने माहिम वाले रेस्त्रां को रिडिवेलपमेंट के लिए बंद किया है. मार्च 2022 में बांद्रा में नया ब्रांच खोला है, जहां कस्टमर्स को एक लग्जरी एक्सपीरियंस मिलता है. इसमें एक बार 65 लोग बैठ सकते हैं.


आगे कि क्या तैयारी है? इस पर दोनों भाई बहन कहते हैं, फैमिली बिजनेस बहुत सारी जिम्मेदारियों के साथ आता है. उनके पिता की मौत के बाद एक भी दिन ऐसा नहीं गया है जब उनका कोई कस्टमर या एंप्लॉयी फ्रांसिस को याद न करता हो. हमारा पूरा ध्यान अब अपने पापा के रेस्त्रां को आगे ले जाने पर है. हम अब इसे पूरे मुंबई में ले जाने पर काम कर रहे हैं. आगे जाकर दोनों अपने स्पेशल मसाला मिक्स को रिटेल मार्केट में लाने पर भी काम कर रहे हैं.