डिजिटल रुपी: रिटेल सेगमेंट के पायलट के लिए RBI ने 1.71 करोड़ की डिजिटल करेंसी की क्रिएट

By yourstory हिन्दी
December 02, 2022, Updated on : Fri Dec 02 2022 06:56:05 GMT+0000
डिजिटल रुपी: रिटेल सेगमेंट के पायलट के लिए RBI ने 1.71 करोड़ की डिजिटल करेंसी की क्रिएट
रिटेल डिजिटल रुपी का पायलट, भाग लेने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के क्लोज्ड यूजर ग्रुप में चुनिंदा स्थानों को कवर करेगा.
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रिटेल सेगमेंट में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपी (Digital Rupee) के लिए पायलट प्रोजेक्ट गुरुवार 1 दिसंबर 2022 को लाइव हो गया. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भाग लेने वाले 4 बैंकों को उनके इंडेंट के आधार पर 1.71 करोड़ रुपये जारी किए. रिटेल डिजिटल रुपी (e₹-R) का पायलट, भाग लेने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) में चुनिंदा स्थानों को कवर करेगा.


इस पायलट योजना में चरणबद्ध भागीदारी के लिए 8 बैंकों की पहचान की गई है. पहला चरण देश भर के 4 शहरों में 4 बैंकों- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ICICI बैंक, यस बैंक और IDFC फर्स्ट बैंक के साथ शुरू होगा. 4 और बैंक- बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक बाद में इस पायलट में शामिल होंगे. पायलट शुरू में 4 शहरों- मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर को कवर करेगा और बाद में अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, पटना और शिमला तक विस्तारित होगा. अगले कुछ दिनों में पायलट के साथ 50,000 व्यापारियों और ग्राहकों को जोड़ने का लक्ष्य है. इसके अलावा अगले 4 बैंक अगले 2-3 सप्ताह में पायलट में शामिल हो जाएंगे.

जरूरत के आधार पर बढ़ सकता है दायरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि पायलट को 1.71 करोड़ रुपये की डिजिटल मुद्रा के साथ शुरू किया गया है, लेकिन यूजर्स की मांग और बैंक की लिक्विडिटी आवश्यकताओं के आधार पर, टोकन इंडेंट और बैंकों को इश्युएंस डायनैमिकली विकसित होता रहेगा. अगले कुछ दिनों में बैंकों की ओर से मांग बढ़ने पर केंद्रीय बैंक अधिक डिजिटल रुपये का निर्माण करेगा.

लीगल टेंडर है e₹-R

e₹-R एक डिजिटल टोकन के रूप में होगा, जो कि लीगल टेंडर होगा. यह उसी मूल्यवर्ग में जारी किया जाएगा, जिसमें वर्तमान में कागजी मुद्रा और सिक्के जारी किए जाते हैं. यह बिचौलियों, यानी बैंकों के माध्यम से वितरित किया जाएगा. डिजिटल करेंसी का पूरा नाम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency or CBDC) है. सीबीडीसी किसी केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी होने वाले मौद्रिक नोटों का डिजिटल स्वरूप है. डिजिटल रुपया, डिजिटल रूप में नकद रुपए-पैसे की ही तरह है. इसका उपयोग संपत्ति जमा करने के साधन के बजाय लेनदेन की मुद्रा के रूप में किया जाएगा.


CBDC को फिजिकल तौर पर नष्ट, जलाया या फाड़ा नहीं जा सकता है. जिस देश का केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी को जारी करता है, उस देश की सरकार की मान्यता इसे हासिल होती है. यह उस देश की केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट में भी शामिल होती है. CBDC के पीछे भारत के केंद्रीय बैंक RBI का बैकअप रहेगा. यह आम मुद्रा यानी फिएट मुद्रा की तरह ही होगा, लेकिन डिजिटल फॉर्मेट में होगा.


फिएट मुद्रा, सरकार द्वारा जारी की जाने वाली करेंसी को कहा जाता है. इसलिए एक प्रकार से कह सकते हैं कि डिजिटल रुपया, सरकारी गारंटी वाला डिजिटल वॉलेट होगा. डिजिटल मुद्रा के रूप में जारी इकाइयों को चलन में मौजूद मुद्रा में शामिल किया जाएगा. जैसे लोग सामान या सेवाओं के बदले करेंसी देते हैं, उसी तरह CBDC से भी आप लेनदेन कर सकेंगे.

कैसे कर सकते हैं पेमेंट

डिजिटल रुपी वॉलेट, एक फिजिकल वॉलेट की तरह है, लेकिन डिजिटल रूप में एंड्रॉइड ओएस वाले स्मार्टफोन पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध होगा. यूजर्स, पार्टिसिपेटिंग बैंकों द्वारा पेश किए गए और मोबाइल फोन/डिवाइसेज में स्टोर्ड मोबाइल ऐप के डिजिटल वॉलेट के माध्यम से e₹-R के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे. लेन-देन पर्सन टू पर्सन (P2P) और पर्सन टू मर्चेंट (P2M) दोनों हो सकते हैं. मर्चेंट लोकेशंस पर डिस्प्लेड क्यूआर कोड का उपयोग करके व्यापारियों को भुगतान किया जा सकता है. e₹-R फिजिकल कैश के फीचर्स की पेशकश करेगा, जैसे विश्वास, सुरक्षा और अंतिम निपटान. इसकी जमा पर कोई ब्याज नहीं होगा और न ही इसे अन्य प्रकार के धन में परिवर्तित किया जा सकता है.


आरबीआई की ओर से मुद्राएं, बैंकों को डिजिटल रूप से जारी की गईं और ग्राहक अपने मोबाइल ऐप के डिजिटल वॉलेट के माध्यम से डिजिटल रुपये के लिए अनुरोध कर सकेंगे. यह ऐप ग्राहकों के बैंकों द्वारा प्रदान किया जाता है और अनुरोध की गई राशि उनके डिजिटल रुपये वॉलेट में जमा की जाती है. ग्राहक व्यक्ति और व्यापारियों को डिजिटल रुपये का भुगतान कर सकते हैं.


Edited by Ritika Singh