सड़कों पर जीवन बिताने वाले लोगों के जीवनस्तर को सुधार रहा है यह फ़ाउंडेशन

By yourstory हिन्दी
February 04, 2020, Updated on : Tue Feb 04 2020 09:31:31 GMT+0000
सड़कों पर जीवन बिताने वाले लोगों के जीवनस्तर को सुधार रहा है यह फ़ाउंडेशन
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दिल्ली का यह गैर सरकारी संगठन वंचित लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है। संगठन के अब तक बड़ी संख्या में छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराने का भी काम किया है।

ऋचा प्रशांत (चित्र साभार: द लॉजिकल इंडियन)

ऋचा प्रशांत (चित्र साभार: द लॉजिकल इंडियन)



दिल्ली की सर्दियां आमतौर पर कठोर होती हैं, जिसमें तापमान काफी कम होता है। सड़कों पर रहने वालों को इससे सबसे परेशानी होती है क्योंकि वे ठंड से जूझते हैं और जीवित रहने के लिए संघर्ष करते हैं।


शहर में स्थित एक गैर सरकारी संगठन सुनेय फाउंडेशन वंचितों, विशेष रूप से बेघरों की मदद करने का प्रयास करता है। फाउंडेशन ने अब तक युवा छात्रों को एक लाख लोगों का भोजन, 1,000 कंबल और 1,500 से अधिक यूनिफॉर्म वितरित किए हैं।


ऋचा प्रशांत द्वारा 2009 में शुरू किया गए फाउंडेशन ने कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और उनके जीवन स्तर में सुधार किया है।


द लॉजिकल इंडियन के साथ बात करते हुए, ऋचा ने कहा,

“मैं इस अर्थ में विशेषाधिकार प्राप्त हूं कि हमें सबसे अच्छी शिक्षा मिली, मैं एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में गई, हम अपनी पसंद के हिसाब से रह सकते थे। भोजन हमारे थाली पर था जो आज भी 80 प्रतिशत भारतीयों को मुश्किलों से मिलता है। विभिन्न कारणों से, मैं एक विशेषाधिकार प्राप्त भारतीय हूं।”

यूएनआई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन को क्वालकॉम से भी सपोर्ट मिला है। जब कंपनी के एक अधिकारी ने फाउंडेशन के कार्यालय का दौरा किया, तो काम से प्रभावित होकर उसने समर्थन की पेशकश की।


(चित्र: द लॉजिकल इंडियन)

(चित्र: द लॉजिकल इंडियन)



जो परिवार एक महीने में 5,000 रुपये या उससे कम की आय अर्जित करते हैं, उन्हें फाउंडेशन द्वारा 9,000 रुपये सालाना तक की बचत करने के लिए समर्थन किया जाता है।





इन प्रयासों में से अधिकांश स्वयंसेवकों द्वारा किए जाते हैं जो एक प्रमुख भाग के लिए जिम्मेदार हैं और फाउंडेशन की ताकत है। सनैय्या ने अब तक 10,000 लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, जिनमें चार और चौदह साल की उम्र के बीच 200 बच्चे भी शामिल हैं।


इन बच्चों को शिक्षक-स्वयंसेवकों द्वारा पढ़ाया जाता है, जो लागत को कम करने के लिए सार्वजनिक स्थान पर कक्षाएं लगाते हैं। पाठ्यक्रम भी बच्चों की सुविधा के अनुसार बनाए गए हैं।


ऋचा के अनुसार, वर्तमान में वे दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज में 450, कोलकाता में 75-100 और बिहार में 50 बच्चों की मदद कर रहे हैं। फाउंडेशन प्रवासी मजदूरों की देखभाल भी करता है। प्रदान की गई नि: शुल्क शिक्षा के जरिये शुरुआत में 180 छात्रों से 400 छात्रों की उपस्थिति में वृद्धि देखी है।


फाउंडेशन महिलाओं के जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम करता है।


लॉजिकल इंडियन के अनुसार ऋचा कहती हैं,

"ऐसी कई महिलाएँ हैं जो पढ़ना चाहती थीं, लेकिन नहीं पढ़ सकती थीं। वो महिलाएँ अपने पति और पिता से परे एक पहचान चाहती थीं। उन्हें एक ऐसे मंच की आवश्यकता थी जहाँ वे अपने परिवार का प्रबंधन कर सकें और साथ ही साथ नौकरानियों की तरफ काम करने के अलावा कुछ और सीखने की कोशिश कर सकें।"