रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के क्षेत्रों में मार्शल लॉ, जानें क्या होता है इस कानून का मतलब

By Prerna Bhardwaj
October 20, 2022, Updated on : Thu Oct 20 2022 06:24:08 GMT+0000
रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के क्षेत्रों में मार्शल लॉ, जानें क्या होता है इस कानून का मतलब
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रूस-यूक्रेन युद्ध के लगभग आठ महीने बाद रूस ने यूक्रेन के चार क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया है. बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के इन चार रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगाने का ऐलान कर दिया है. ये चार क्षेत्र हैं- लुहान्स्क, डोनेट्स्क, ज़ापोरिज्जिया और खेरसॉन. राष्ट्रपति पुतिन के इस फैसले को पूर्वी यूक्रेन में रूस के निर्णायक कदम के तौर पर देखा जा रहा है.


रूस की स्टेट ड्यूमा (रूसी संसद) ने चार क्षेत्रों में मार्शल लॉ लागू करने के पुतिन के फैसले पर मुहर लगा दी है. सुरक्षा परिषद के सदस्यों के साथ टीवी पर बातचीत के दौरान पुतिन ने यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में रूसी सहायता को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन के नेतृत्व में एक विशेष समन्वय परिषद स्थापित करने का भी निर्देश दिया. अपने इस फैसले के बारे में बात करते हुए सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने कहा कि “हम रूस की सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं. हम अपने लोगों की रक्षा के लिए बहुत कठिन चीजों को हल करने के लिए काम कर रहे हैं.” पुतिन ने यह भी कहा कि “मौजूदा स्थिति में मैं सभी रूसी क्षेत्रों के प्रमुखों को अतिरिक्त शक्तियां देना जरूरी समझता हूं.”

क्या है मार्शल लॉ?

किसी भी देश में मार्शल लॉ का इस्तेमाल सरकारों द्वारा जनता पर अपना शासन लागू करने के लिए किया जाता है. मार्शल लॉ को किसी भी देश में लागू किए जाने का मतलब है की उस देश की सेना पूरी व्यवस्था को अपने हाथों में ले लेती है. रूस-उक्रेन के सन्दर्भ में मार्शल लॉ की घोषणा के बाद रूस के सभी क्षेत्रों के प्रमुखों को अतिरिक्त आपातकालीन शक्तियां मिल गई हैं. मार्शल लॉ के तहत यात्रा और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबन्ध, सख्त सेंसरशीप और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास ज्यादा अधिकार शामिल हो सकते हैं. मार्शल लॉ के लागू होने के बाद आंदोलनों, राजनीतिक दलों आदि पर भी प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं.


आमतौर पर तख्तापलट होने की स्थिति में हम किसी देश में मार्शल लॉ लगाए जाने की खबर सुनते हैं. जैसे पाकिस्तान में 1977 में जनरल जिया उल हक ने भी लोकतान्त्रिक सरकार को हटाकर सत्‍ता हथियाई थी. यह सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा और फिर 1999 में तत्‍कालीन जनरल परवेज मुशर्रफ ने सत्‍ता हथियाकर देश में मार्शल लॉ लगाया था. कई अन्य देशों में भी अन्य वजहों से मार्शल लॉ लगाए जाने का इतिहास रहा है. साल 1981 में पोलैंड में मार्शल लॉ को लागू किया गया. यह उस समय उठ रहे राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया गया था. वहीं, साल 1970 में कनाडा में भी मार्शल लॉ लगाया गया था.


यूक्रेन में रूसी सेना की जिम्मेदारी संभाल रहे पुतिन के नए कमांडर ने खेरसॉन से यूक्रेनी नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया है. इन नागरिकों को रूस के ही कब्जे वाले किसी दूसरे क्षेत्र में बसाया जाएगा. रूस के कब्जे वाले खेरसान से आम लोगों को निकालने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है. रूस समर्थित स्थानीय प्रशासन का दावा है कि लोगों को यूक्रेनी सेना के हमले से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है.


यूक्रेन में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और हाल ही में हुए हमलों को देखते हुए भारतीय दूतावास ने एडवाइजारी जारी की है. बुधवार को भारतीय दूतावास ने कहा कि भारत के नागरिकों को यूक्रेन की यात्रा न करने की सलाह दी जाती है. दूतावास ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी है.