SBI का लोन हुआ और महंगा, MCLR, बेस रेट समेत हर तरह के लोन रेट बढ़ाए

By Ritika Singh
December 16, 2022, Updated on : Fri Dec 16 2022 06:58:43 GMT+0000
SBI का लोन हुआ और महंगा, MCLR, बेस रेट समेत हर तरह के लोन रेट बढ़ाए
बढ़ोतरी के बाद SBI में 1 साल वाली MCLR 8.30 प्रतिशत हो गई है.
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RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद कई बैंकों ने अपने लोन महंगे कर दिए हैं. अब इस लिस्ट में SBI का नाम भी जुड़ गया है. सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR), एक्सटर्नल बेंचमार्क बेस्ड लेंडिंग रेट (EBLR), रेपो बेस्ड लेंडिंग रेट (RLLR), बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) और बेस रेट समेत सभी लोन रेट्स में बढ़ोतरी की है. सभी लेंडिंग रेट्स के तहत नई ब्याज दरें 15 दिसंबर 2022 से प्रभावी हुई हैं.

MCLR

MCLR में की गई बढ़ोतरी 0.25 प्रतिशत तक की है. बैंक ने सभी लोन टेनर के लिए MCLR में इजाफा किया है. बढ़ोतरी के बाद SBI में 1 साल वाली MCLR 8.30 प्रतिशत हो गई है. ज्यादातर रिटेल लोन्स इसी MCLR पर बेस्ड होते हैं. SBI की नई MCLR इस तरह है...

sbi-hikes-mclr-by-upto-25-basis-points-across-all-loan-tenors-state-bank-of-india-loan-rates

EBLR, RLLR और अन्य लेंडिंग रेट्स

SBI ने EBLR और RLLR में भी इजाफा किया है. बढ़ोतरी के बाद SBI की EBLR 8.90 प्रतिशत+CRP+BSP हो गई है. वहीं RLLR 8.50 प्रतिशत+CRP हो गई है. इसके अलावा बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) को रिवाइज कर 14.15 प्रतिशत कर दिया गया है. नई BPLR 15 दिसंबर 2022 से ही प्रभावी है. बेस रेट को रिवाइज कर 9.40 प्रतिशत कर दिया गया है.

FD रेट भी बढ़ा चुका है SBI

SBI फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरों को भी बढ़ा चुका है. 2 करोड़ रुपये से कम की रिटेल एफडी के मामले में ब्याज में 0.65 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है. वहीं 2 करोड़ रुपये और इससे ज्यादा की एफडी यानी बल्क एफडी के मामले में ब्याज दरों को 1 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है. SBI के नए एफडी रेट 13 दिसंबर 2022 से प्रभावी हैं.

RBI ने कितना बढ़ाया है रेपो रेट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुख्य रूप से महंगाई को काबू में लाने के मकसद से दिसंबर माह की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को 0.35 प्रतिशत और बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है. रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं. इसमें वृद्धि का मतलब है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिया जाने वाला कर्ज महंगा होगा और मौजूदा ऋण की मासिक किस्त (EMI) बढ़ेगी. RBI की मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने वाले दिन से लेकर अब तक कई बैंक अपना कर्ज की दरें बढ़ा चुके हैं.