आवारा कुत्तों को गोद लेने पर नगर निगम दे रहा है ढेर सारी छूट, शिमला में की गई है यह खास पहल

By yourstory हिन्दी
March 16, 2020, Updated on : Mon Mar 16 2020 12:31:30 GMT+0000
आवारा कुत्तों को गोद लेने पर नगर निगम दे रहा है ढेर सारी छूट, शिमला में की गई है यह खास पहल
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शिमला में आवारा कुत्तों को गोद लेने वाले लोगों के लिए शिमला नगर निकाय द्वारा कई छूट उपलब्ध कराई जा रही हैं।

(चित्र: द इंडियन एक्सप्रेस)

(चित्र: द इंडियन एक्सप्रेस)



कुत्ते निश्चित रूप से मनुष्य का सबसे अच्छा दोस्त होते हैं, लेकिन इनकी बड़ी संख्या ऐसी भी है जो समाज में अराजकता भी फैलती है। एक बड़ी संख्या में एक मानव सबसे अच्छा दोस्त नहीं होता है, तो समाज में अराजकता फैल जाती है। शिमला में, स्ट्रीट डॉग की आबादी अनिश्चित दर से बढ़ रही है। लगभग 2,500 कुत्ते शहर की सीमा के भीतर रहते हैं और कूड़े में साल में दो बार प्रजनन कर 5-8 पिल्लों को जन्म देते हैं। नगर निगम के नसबंदी के प्रयासों के बावजूद इनकी संख्या को नियंत्रित नहीं किया जा सका है। शहर में हर महीने लगभग 60 कुत्ते लोगों को काटते भी हैं।


इस स्थिति में शहर ने एक स्ट्रीट डॉग एडॉप्शन एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम लॉन्च किया है। आवारा कुत्ते को अपनाने वाले हर परिवार को कचरा संग्रहण शुल्क में छूट दी गई है, और इसी के साथ उन्हे शहर में मुफ्त पार्किंग भी उपलब्ध कराई जाती है।


द लॉजिकल इंडियन के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत ऐसे परिवार जो इन जानवरों को चारा नहीं देते या उनकी पर्याप्त देखभाल नहीं करते हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा।





द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पशु चिकित्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नीरज मोहन ने बताया

“अब तक की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। अब तक शहर में 155 कुत्तों को अपनाया गया है। इसमें 83 कुत्ते व्यक्तियों द्वारा जबकि 72 कुत्ते बिगर मंडल, गैर सरकारी संगठन, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन जैसे समुदायों अपनाए गए हैं।"

पिछले साल अमेरिका की अपनी यात्रा के बाद नगर आयुक्त पंकज राय इस विचार को अपने साथ शिमला लेकर आए। नागरिक निकाय ने कहा है कि कचरा शुल्क में छूट और मुफ्त पार्किंग स्थल के साथ-साथ गोद लिए गए कुत्तों को मुफ्त नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण भी प्राप्त होगा।


इस कदम के साथ शिमला भारत के हर शहर के लिए एक आवारा कुत्ते की आबादी से निपटने के लिए एक प्रेरणा साबित होगा। यह पहल आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करने और सड़कों पर कुत्तों की संख्या को कम करने का एक शानदार तरीका है। आशा है कि यह देश के सभी शहरों में अपनाई जाएगी।