जरी-गोटा बेचने वाली किराए की दुकान से हुई थी शुरुआत, आज 750 करोड़ का है बिजनेस

By Ritika Singh
November 08, 2022, Updated on : Sat Nov 26 2022 06:44:58 GMT+0000
जरी-गोटा बेचने वाली किराए की दुकान से हुई थी शुरुआत, आज 750 करोड़ का है बिजनेस
ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स ब्रांड, हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ ग्रुप का वेंचर है.
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ज्वैलरी भारतीयों को हमेशा से लुभाती रही है. फिर बात चाहे गोल्ड ज्वैलरी की हो या फिर डायमंड ज्वैलरी की. और जहां तक बात ज्वैलर्स की है तो भारत में ज्वैलर्स की कमी तो बिल्कुल नहीं है. हां लेकिन ज्यादातर ज्वैलर्स, असंगठित क्षेत्र के हैं. ब्रांडेड ज्वैलरी की बात करें तो तनिष्क, मालाबार, सेनको, जॉय अलूकास, कल्याण जैसे ब्रांड्स के बीच एक नाम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बेस्ड ब्रांड का भी है. यह ब्रांड है Aisshpra Gems and Jewels (ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स ब्रांड).


Aisshpra Gems की शुरुआत 1940 में हुई थी. ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स ब्रांड, हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ ग्रुप का वेंचर है. ब्रांड को इसकी दूसरी व तीसरी पीढ़ी संभाल रही है. आज यह उत्तर प्रदेश का एक बहुत ही भरोसेमंद हेरिटेज ज्वैलरी ब्रांड बन चुका है. Aisshpra Gems ने 82 साल पहले जरी व गोटा बेचने वाले 100 वर्गफीट के किराए के स्टोर से शुरुआत की थी. आज ब्रांड का सालाना टर्नओवर 750 करोड़ रुपये का है. YourStory Hindi ने Aisshpra Gems के डायरेक्टर अनूप सराफ से एक खास बातचीत की. पेश हैं इस बातचीत के कुछ अंश...


हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ ग्रुप को उनके पिता बालकृष्ण और उनके बड़े भाई गोपी कृष्ण ने मिलकर शुरू किया था. जरी व गोटा बेचने वाले 100 वर्गफीट के किराए के स्टोर से शुरुआत की गई थी. बाद में चांदी के आइटम्स जैसे पायल, बिछिया आदि बेचना भी शुरू किया. धीरे-धीरे बढ़ती मांग और ग्राहक का बढ़ता भरोसा देखते हुए कलेक्शन में गोल्ड ज्वैलरी को भी जोड़ा गया. अनूप सराफ ने बताया कि हमारा पहले ज्यादातर चांदी का काम था, बाद में सोने के आइटम्स एड हुए. वर्तमान में बिजनेस के साथ उनके और उनके बड़े भाई के साथ-साथ दोनों के बच्चे भी जुड़ चुके हैं. यानी कारोबार को दूसरी और तीसरी पीढ़ी मिलकर देख रही है.

कब आई डायमंड ज्वैलरी

1990 के आसपास ऐशप्रा ने अपने प्रॉडक्ट्स में डायमंड ज्वैलरी को एड किया. उस वक्त गोरखपुर और उसके आसपास के इलाके में डायमंड ज्वैलरी एक नई चीज थी. ऐशप्रा ने जब प्रॉपर बायबैक गारंटी और सर्टिफिकेशन के साथ डायमंड ज्वैलरी को प्रमोट किया तो उन्हें ग्राहकों से अच्छी प्र​तिक्रिया मिली. 1995 में ऐशप्रा ने किराए पर लिए गए 100 वर्गफीट के स्टोर को पूरी बिल्डिंग समेत खरीद लिया. अब ऐशप्रा ब्रांड का कारोबार 10000 वर्गफीट के शोरूम से चल रहा है. कंपनी का स्टोर गोरखपुर में पुराने मार्केट और नए मार्केट दोनों में है. शुरुआत पुराने मार्केट से हुई थी. नए मार्केट, जिसे गोलघर बोला जाता है, में भी वर्तमान में ब्रांड का 10000 वर्गफीट में फैला हुआ ज्वैलरी शोरूम है.

ऐशप्रा कब बना एक ब्रांड

ऐशप्रा जेम्स को एक ब्रांड के तौर पर साल 2002 में लॉन्च किया गया. उस वक्त यह केवल एक डायमंड ज्वैलरी ब्रांड था. उत्तर भारत में ऐशप्रा, पहला ऐसा ज्वैलर परिवार था, जिसने डायमंड ज्वैलरी को ब्रांड का रूप दिया था. बाद में ब्रांड को अहसास हुआ कि ग्राहक की डिमांड केवल डायमंड ज्वैलरी के लिए ही नहीं है, बल्कि​ चांदी, सोना, प्लैटिनम आदि के लिए भी है. यह देखकर ऐशप्रा जेम्स ने ग्राहकों को एक ही छत के नीचे ये सारे ज्वैलरी विकल्प उपलब्ध कराने का फैसला किया. आज ऐशप्रा के स्टोर्स में छोटे से गोल्ड नोज पिन, सिल्वर टो पिन से लेकर गोल्ड व डायमंड के नेकलेस सेट तक मिलते हैं.

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बजट ज्वैलरी के साथ-साथ एक्सपेंसिव ज्वैलरी भी

अनूप सराफ ने बताया कि ऐशप्रा के प्रॉडक्ट 'मास' और 'क्लास' दोनों को कवर करने वाले हैं. कंपनी बजट ज्वैलरी के साथ-साथ डिजाइनर व हाई बजट ज्वैलरी भी बनाती है. ब्रांड को अलग-अलग ज्वैलरी कैटेगरी में 21 अवॉर्ड भी मिल चुके हैं. ब्रांड का स्पेशलाइजेशन गोल्ड व डायमंड दोनों तरह की ज्वैलरी में है. ऐशप्रा जेम्स, ​गोल्ड में दक्षिण भारत वाली ज्वैलरी भी बनाती है, जो एंटीक व टेंपल ज्वैलरी है और वहां के मंदिरों से प्रेरित रहती है. राजस्थानी ज्वैलरी भी बनती है, जो कि कुंदन व पोल्की वर्क वाली होती है. साथ ही बंगाल के कारीगरों की भी ज्वैलरी है, जो मीनाकारी के लिए जानी जाती है, राजकोट की ज्वैलरी भी है. कुल मिलाकर ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स के स्टोर्स में पूरे भारत का हर तरह का ज्वैलरी कलेक्शन मौजूद है.


अनूप सराफ का कहना है कि भारत में, विशेषकर उत्तर भारत के टीयर 2, टीयर 3 शहरों में आज भी ज्यादातर ज्वैलर्स असंगठित क्षेत्र के हैं. वहां के ग्राहकों के पास ज्वैलरी खरीदने के ज्यादा विकल्प नहीं हैं, लिहाजा उन्हें लोकल ज्वैलर्स पर ही भरोसा करना पड़ता है. इसलिए ऐशप्रा जेम्स ने अपने विस्तार के तहत ज्यादातर टीयर 3 शहरों को ही कवर किया है ताकि उन ग्राहकों को कवर किया जा सके, जिनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं. घरेलू बाजार में मौजूद अपार संभावनाओं को देखते हुए कंपनी की योजना फिलहाल भारत के अंदर ही ​खुद को स्थापित करने की है.

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एक्सपेंशन को लेकर क्या है प्लान

ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स के वर्तमान में 400 वर्कर हैं और इसकी मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रेंथ 50 से ज्यादा की है. कंपनी के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, पडरौना और लखनऊ में 8 एक्सक्लूसिव ब्रांड रिटेल आउटलेट हैं. गोरखपुर के बाहर ऐशप्रा जेम्स का स्टोर सबसे पहले देवरिया में खुला था. अब इसकी मौजूदगी फ्रेंजाइजी बेस्ड मॉडल के आधार पर बलिया, आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, पडरौना और लखनऊ में भी है. इसके अलावा कंपनी जल्द ही अयोध्या में भी स्टोर खोलने वाली है. साथ ही और 4-5 स्टोर भी अपकमिंग हैं. उत्तर प्रदेश के बाहर कारोबार एक्सपेंड करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि फिलहाल ऐशप्रा जेम्स का लक्ष्य उत्तर प्रदेश और बिहार में कारोबार विस्तार का है. 3-4 साल बाद कंपनी मध्य प्रदेश में भी कदम रख सकती है.

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यामी गौतम धर को हाल ही में लिया है साथ

ऐशप्रा जेम्स ने हाल ही में "मैं प्रथा भी हूं, मैं प्रगति भी" पहल के तहत अपने पोल्की और डायमंड कलेक्शन को प्रमोट करने के लिए बॉलीवुड डीवा यामी गौतम धर को अपने साथ जोड़ा है. इससे पहले कंपनी अपने ब्राइडल कलेक्शन को प्रमोट करने के लिए एक्ट्रेस मौनी रॉय को साथ लिया था.

क्या है ऐशप्रा का मतलब

ऐशप्रा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ऐश्वर्य और प्रगति. इसके पीछे विचार है या यूं कहें कि कंपनी की कामना है कि ग्राहकों का ऐश्वर्य बढ़े, जिससे उनके साथ-साथ ब्रांड की भी प्रगति हो. ऐशप्रा फैशन ज्वैलरी को भी शुरू करने वाला है. कंपनी का मोटो ग्राहकों को पूरी पारदर्शिता रखते हुए शुद्धता और गुणवत्ता वाले ज्वैलरी प्रॉडक्ट्स उपलब्ध कराना है. कंपनी के मूल्य विश्वास, ईमानदारी और नैतिकता हैं. ग्रुप के अन्य वेंचर्स में पाम पैराडाइज, डायमंड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और ऐशप्रा रिजॉर्ट भी हैं. पाम पैराडाइज अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड कॉलोनी प्रॉजेक्ट है. यह प्रॉजेक्ट गोरखपुर में विकास के चरण में है.