Brands
YSTV
Discover
Events
Newsletter
More

Follow Us

twitterfacebookinstagramyoutube
Yourstory

Brands

Resources

Stories

General

In-Depth

Announcement

Reports

News

Funding

Startup Sectors

Women in tech

Sportstech

Agritech

E-Commerce

Education

Lifestyle

Entertainment

Art & Culture

Travel & Leisure

Curtain Raiser

Wine and Food

Videos

ys-analytics
ADVERTISEMENT
Advertise with us

बेंगलुरु के इस लॉ स्टूडेंट ने शुरू की एक ख़ास मुहिम, पालतू जानवरों की याद में लगाता है पेड़

बेंगलुरु के इस लॉ स्टूडेंट ने शुरू की एक ख़ास मुहिम, पालतू जानवरों की याद में लगाता है पेड़

Friday July 12, 2019 , 4 min Read

आपने बहुत से ऐसे लोग देखे होंगे, जिन्हें अपने पालतू जानवरों से बेहद प्यार होता है। वह उनका अपने परिवार के एक सदस्य की तरह ख़्याल रखते हैं। ऐसे लोगों के लिए उनके पालतू जानवरों की मौत किसी सदमे से कम नहीं होती है। जानवरों से प्यार करने वाले इन बेहद संवेदनशील लोगों के लिए प्रमोद चंद्रशेखर ने एक मुहिम शुरू की है, जिसके अंतर्गत वह लोगों के मरे हुए पालतू जानवरों की याद में पौधारोपण करते हैं। प्रमोद ने दिसंबर, 2018 में इसकी शुरुआत की थी और अभी तक वह बेंगलुरु में 15, सेलम और मुंबई में एक-एक पौधे लगा चुके हैं।


प्रमोद चंद्रशेखर

(दाएं) प्रमोद चंद्रशेखर (फोटो: Facebook)



प्रमोद चंद्रशेखर बताते हैं अप्रैल, 2018 में उनकी दादी के गुज़रने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि आप जिससे प्यार करते हैं, उसके छोड़ जाने पर कितनी तकलीफ़ होती है। 2018 में ही उनके अन्य कई करीबियों की भी मौत हो गई और 19 साल के प्रमोद अंदर से टूट गए। इसके बाद प्रमोद ने तय किया कि वह अपनों की याद में कुछ करेंगे, लेकिन उनके परिवारवालों ने उनका समर्थन नहीं किया और उन्हें अपना विचार छोड़ना पड़ा। प्रमोद के दोस्तों ने उन्हें संभाला और उन्हें आइडिया दिया कि वह जानवरों से प्यार करने वालों की मदद कर सकते हैं और उनके मरे हुए जानवरों की याद में कुछ कर सकते हैं। 


दोस्तों की सलाह प्रमोद को पसंद आई और इसके बाद दिसंबर, 2018 में उन्होंने ‘लास्ट रिपल’ नाम से अपनी इस मुहिम की शुरुआत की। लास्ट रिपल, बायोडिग्रेडेबल बर्तन में मरे हुए जानवर के शरीर के अवशेष इकट्ठा करता है। उस बर्तन या कलश के ऊपर ही पौधा लगा दिया जाता है, जो आगे चलकर यादगार पेड़ की शक्ल अख़्तियार कर लेता है। 


ईडेक्स लाइव से हुई बातचीत में प्रमोद ने कहा, “बेंगलुरु में कम से कम 6 लाख पालतू जानवर थे और पूरे शहर में जानवरों के लिए सिर्फ़ एक ही मरघट था। हर महीने लगभग 1,000 जानवरों की मौत होती है, लेकिन औसत तौर पर हर महीने सिर्फ़ 300 पालतू जानवरों की मौत दर्ज होती है। बीबीएमपी जानवरों के शरीरों के अवशेष को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत सॉलिड वेस्ट के तौर पर इस्तेमाल करती है। ”


इस स्थिति को देखने के बाद प्रमोद को एहसास हुआ कि उन्हें इस संदर्भ में कोई कदम उठाना चाहिए, जो ईको-फ़्रेंडली हो। इस समस्या का हल खोजने के दौरान प्रमोद को इटली के कैप्सुला मुंडी प्रोजेक्ट के बारे में पता चला। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि ऑर्गेनिक बरियल पॉड्स को ताबूत या कॉफ़िन का विकल्प बनाया जाए, जिन्हें बाद में एक अंडाकार बायो-डिग्रेडेबल कन्टेनर में रख दिया जाएगा।




इसी तर्ज पर लास्ट रिपल की टीम, पालतू जानवर की मौत के बाद उनके शरीर के अवशेष लेकर एक खोखले सिलेंडर में रखती है। इसके बाद, अवशेष के पीएच लेवल को न्यूट्रलाइज़ या बेअसर करने के लिए, लास्ट रिपल की टीम उसके ऊपर एक डिस्क रख देती है और इसके बाद उपजाऊ मिट्टी डालकर पौधा लगा देती है। वंडरफ़ुल न्यूज़ नेटवर्क की रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इसके बाद कंटेनर को ज़मीन में गाड़ दिया जाता है और एक पेड़ का बीज़ कंटेनर की ऊपरी सतह पर लगा दिया जाता है, ताकि जानवर का मृत शरीर पेड़ को पोषण दे। 


बेंगलुरु के सुम्मानल्ली में स्थित बीबीएमपी ऐनिमल इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम का दौरा करने के बाद प्रमोद ने कहा, “क्रेमेटोरियम के इंचार्ज को मेरा आइडिया पसंद आया। उन्होंने मुझे बताया कि बहुत कम लोग ही राख वापस घर ले जाते हैं और लास्ट रिपल के माध्यम से वह अपने प्यारे जानवर के करीब बने रहेंगे।”


प्रमोद ने लास्ट रिपल की सर्विस के लिए कोई भी फ़ीस तय नहीं की है और वह लोगों से कहते हैं कि सर्विस के लिए वे जो देना चाहें, दे सकते हैं। औसत रूप से एक पौधा या पेड़ लगाने की क़ीमत 3,500 रुपए तक आती है। यह ग्राहक के ऊपर है कि वह पौधा कहां लगाना चाहता है। यह पेड़ या पौधा किसी सार्वजनिक मैदान या बाग़ में भी लगाया जा सकता है। इन पेड़ों पर एक टैग भी लगाया जाता है ताकि ग्राहक दशकों बाद भी अपने जानवर की याद में लगाए गए पेड़ की पहचान कर सकें।