72 साल बाद आया इस केस का फैसला, वजह ऐसी जो न्याय व्यवस्था पर उठा दे सवाल

By yourstory हिन्दी
January 16, 2023, Updated on : Mon Jan 16 2023 06:43:13 GMT+0000
72 साल बाद आया इस केस का फैसला, वजह ऐसी जो न्याय व्यवस्था पर उठा दे सवाल
बेरहामपुर मामले का उल्लेख राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid) में 9 जनवरी तक किसी भी भारतीय अदालत में सुने जाने वाले सबसे पुराने मामले के रूप में किया गया है.
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देश के सबसे पुराने हाईकोर्ट की एक पीठ ने देश के सबसे पुराने केस के में 72 सालों बाद फैसला सुना दिया है. दिलचस्प बात यह है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव का जन्म 1951 में इस मामले के दर्ज होने के पूरे एक दशक बाद हुआ था.


बेरहामपुर मामले का उल्लेख राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid) में 9 जनवरी तक किसी भी भारतीय अदालत में सुने जाने वाले सबसे पुराने मामले के रूप में किया गया है. जब जस्टिस रवि कृष्ण कपूर ने पिछले साल 19 सितंबर को मामले के निपटारे के आदेश पर हस्ताक्षर किए, इसे सील किया गया और टाइपोग्राफिकल सुधार के साथ दिया गया.


टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पूरा मामला दिवालिया हो चुके और मुकदमेबाजी से घिरे बेरहामपुर बैंक को बंद करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश से पैदा हुआ था, जो उसने 19 नवंबर, 1948 को दिया था. उसके बाद बैंक को बंद करने के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका 1 जनवरी, 1951 को दायर की गई थी. उसे उसी दिन ‘केस नंबर 71/1951’ के रूप में दर्ज किया गया था.


बेरहामपुर बैंक देनदारों से पैसा वसूल करने के लिए कई मुकदमों में उलझा हुआ था. इनमें से कई कर्जदारों ने बैंक के दावों को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था.


रिकॉर्ड के मुताबिक, बेरहामपुर बैंक को बंद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पिछले साल सितंबर में दो बार हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आई थी, लेकिन मामले से जुड़ा कोई भी सामने नहीं आया.


इसके बाद जस्टिस कपूर ने कोर्ट के लिक्विडेटर से रिपोर्ट मांगी. 19 सितंबर को सहायक लिक्विडेटर ने पीठ को बताया कि अगस्त 2006 में मामले का निपटारा कर दिया गया था. यह पता चला कि इसे रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया गया था, जिससे ये मामला लंबित सूची में बना रहा.

कलकत्ता हाईकोर्ट का इतिहास

कलकत्ता हाई कोर्ट देश में बनाई गई पहली हाई कोर्ट थी, जिसकी स्थापना 1862 में हुई थी. उस दौरान इसे फोर्ट विलियम स्थित न्यायपालिका की हाई कोर्ट के नाम जाना जाता था. सर बैरन्स पिकॉक इसके पहले चीफ जस्टिस थे.


तीन साल पहले तक कलकत्ता हाईकोर्ट को सबसे ज्यादा पेंडिंग केसों वाली अदालत माना जाता था। हालांकि, अब यह पेंडिंग केसेस के मामले में टॉप-5 अदालतों की सूची से बाहर है लेकिन अभी भी टॉप-10 में बना हुआ है. 31 अक्टूबर, 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कलकत्ता हाईकोर्ट में कुल 2,05, 414 मामले लंबित हैं.

1952 में दायर दो मामलों का निपटारा अभी भी बाकी

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta high court) को इस बात से राहत मिली होगी कि पूर्ववर्ती बेरहामपुर बैंक लिमिटेड (Berhampore Bank Ltd) को बंद करने की कार्यवाही से संबंधित मुकदमेबाजी अंतत: खत्म हो गई. फिर भी कलकत्ता हाईकोर्ट को अभी भी देश के पांच सबसे पुराने लंबित मामलों में से दो का निपटारा करना बाकी है. ये सभी मुकदमे 1952 में दायर किए गए थे.


देश के बाकी सबसे पुराने तीन मामलों में से दो दीवानी मुकदमे बंगाल के मालदा की दीवानी अदालतों में चल रहे हैं और एक मद्रास हाईकोर्ट (Madras high court) में लंबित है. मालदा की अदालतों ने इन लंबे समय से चल रहे मुकदमों को निपटाने की कोशिश करने के लिए मार्च और नवंबर में सुनवाई की है.


Edited by Vishal Jaiswal