Fintech, Tech fin, AI और Crypto को एक साथ समझना हो तो यह किताब पढिये

अगरआप मैथ्स से दूर भागते रहे हों या नम्बर्स देखकर आगे पढने का मन ना करता हो तो आपके लिए फ्यूचर ऑफ़ फायनांस: द इम्पैक्ट ऑफ़ फिनटेक, एआई एंड क्रिप्टो ऑन फाइनेंशिअल सर्विसेज (The Future of Finance: The Impact of FinTech, AI and Crypto on Financial Services) एक अच्छी शुरुआत हो सकती है.

Fintech, Tech fin, AI और Crypto को एक साथ समझना हो तो यह किताब पढिये

Wednesday June 15, 2022,

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पैसों का प्रचलन, पैसों के रूप-रंग से लेकर पैसों के लेन-देन के व्यवहार में ऐसा बदलाव आया है जो अब रुकने वाला नहीं है. फिनटेक कम्पनियां अब कहीं नहीं जाने वाली हैं. नोटबंदी के बाद, डिजिटल पेमेंट अब पहले जितना अनसुना और अविश्वसनीय नहीं रहा. न ही अब किसी का घर से बिना बटुए या बिना कार्ड के बाहर निकल जाना अजीब लगता है. लेकिन टेक्नोलॉजी के बदलते रूप के साथ बाज़ार का तेजी से बदलना आम लोग कितना समझ पा रहे हैं?

अगर एकाउंट्स आपका सब्जेक्ट ना रहा हो, या आप मैथ्स से दूर भागते रहे हों या नम्बर्स देखकर आगे पढने का मन ना करता हो तो आपके लिए फ्यूचर ऑफ़ फायनांस: द इम्पैक्ट ऑफ़ फिनटेक, एआई  एंड क्रिप्टो ऑन फाइनेंशिअल सर्विसेज (The Future of Finance: The Impact of FinTech, AI and Crypto on Financial Services) एक अच्छी शुरुआत हो सकती है. यह स्टूडेंट से लेकर बैंकवालों और स्टार्ट अप फ़ाउंडर सब के लिए काम आने वाली किताब है जो आपको सरलतापूर्वक क्रिप्टो और AI की दुनिया का दर्शन करा सकती है. 

यह किताब दो लोगों के द्वारा मिलकर लिखी गयी है. पहले हैं आंत्रप्रेन्योर से हांगकांग के जानेमाले क्रिप्टो डिजिटल एसेट गुरु बने हेनरी आर्सलेनियन (Henri Arslanian) और दूसरे हैं फ़्रांस के रहने वाले फाब्रिस फिशर (Fabrice Fischer) जिन्होंने शुरुआत की थी इंजिनियर के रूप में, फिर बने  फाइनेंसियल ऑफिसर और उसके बाद आंत्रप्रेन्योर और अब प्रसिद्ध हो गये हैं हांगकांग के AI गुरु के तौर पर. कोविड महामारी से ठीक पहले प्रकाशित हुई हुई 312 पन्नों की यह यह किताब अमेज़न के फाइनेंशिअल सेक्शन की बेस्ट-सेलर किताबों में एक है.

किताब टेक्स्ट-बुक की स्टाइल में लिखी हुई है. अपने पाठको को टेक्नोलॉजी के प्रभाव के कारण बदलती हुई फाइनेंशिअल दुनिया को समझाती हुई यह भी बताती चलती है कि हम यहां तक कैसे पहुंचे. यानि हिस्ट्री भी साथ साथ चलती रहती है.

किताब को पढ़कर आप समझ पायेंगे की कंप्यूटेशन और डेटा साइंस के तेज विकास और और इंटरनेट की वजह से आयी कनेक्टिविटी ने पैसे, निवेश और अर्थव्यवस्था को लेकर हमारी समझ बदलने में कितनी बड़ी भूमिका निभायी है. लेखक तकनीक के विकास की कहानी विस्तार से बताते हुए कहते है कि एक ख़ास दौर में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा, कम ब्याज वाले निवेशों के लिए मारामारी और इनोवेशन को लेकर मची होड़ जैसी तमाम चीजों ने टेक्नोलॉजी के विकास में योगदान दिया.

अच्छे कंसल्टेंट्स की तरह दोनों लेखक अपने पाठकों को इस फील्ड के मेन प्लेयर्स और उनके तौर तरीक़ों से रूबरू कराते हुए उन्हें इस दुनिया को संचालित करने वाले फार्मूलों समझाते हैं. फ्यूचर में यह मार्किट कैसे व्यवहार करेगा या क्या रूप लेगा इसकी भी कल्पना मार्किट के लॉजिक समझने पर ही सम्भव है. लेखक एक मार्के की बात यह कहते है कि हम टेक्नोलॉजी को शॉर्ट टर्म में “ओवर एस्टीमेट” करते हैं और लॉन्ग टर्म में “अन्डर एस्टीमेट”.

यह बात महत्वपूर्ण है क्योंकि इंसान की मानसिकता ऐसे ही काम करती है. जब कोई नयी चीज़ हमारी दुनिया में कदम रखती है तो उसे दूर से देखते हुए हम उस नयी चीज़ से जल्द-जल्द बहुत सारे रिजल्ट्स की अपेक्षा करते हैं, और जब ऐसा नहीं होता है तो उसके प्रति अपनी दिलचस्पी खो देते हैं. बाद में कुछ सालों में वह चीज़ अपना असर दिखाना शुरू करती है तो हमें अहसास होता कि वो इतनी बड़ी कैसे हो गई, हमें लग तो नहीं रहा था. सिनेमा, रेडियो, टीवी, इंटररनेट सबके साथ ऐसा ही हुआ.

फिन टेक [Fintech] और टेक फिन [Tech fin] के अंतर को समझाते हुए लेखक कहते हैं कि दोनों का असल अंतर उनके प्लेयर्स की वजह से है. फिनटेक का मतलब है: जब टेक्नोलॉजी के नए नए वर्जन के इस्तेमाल से उसकी मार्केट वैल्यू घाट जाय तो इनोवेशन का इस्तेमाल करते हुए ज़्यादा पैसा और मुनाफ़ा कमाना. टेकफिन टेक्नोलॉजी बेस्ड बड़ी कंपनियां होती है जैसे अलीबाबा, फेसबुक, गूगल, एपल इत्यादि, जो सुपीरीयर सर्विसेज या प्रोडक्ट्स देते हैं. हालांकि, दोनों सेक्टर अपने विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर डेटा एनलिसिस पर निर्भर होते हैं.

दोनों सेक्टर रॉ डाटा इस्तेमाल करते हैं जिसे AI से विश्लेषित किया जाता है. किताब का ठीक-ठाक हिस्सा AI को समझाने के लिए समर्पित है. मसलन, कलेक्ट किये डाटा को इन्टरप्रेट करने के लिए AI की जरुरत होती है और उसके लिए बड़े इन्वेस्टमेंट करने पड़ते हैं. AI प्लेटफार्म का किंग कौन होगा? फ्यूचर में सर्विसेज कौन डीलिवर करेगा? कस्टमर्स को कौन जीतेगा? किसी को नहीं पता, पर इन सब आइडियाज के साथ खेलने के लिए हेनरी आर्सलेनियन और फाब्रिस फिशर ने हमें यह किताब दे दी है.

यह किताब स्टूडेंट्स जो एकाउंट्स, बिजनेस मैनेजमेंट और फ़ाइनेंस पढ़ रहे हैं और ऊपर से फिन टेक की समझ भी चाहते हैं उनके लिए यूजफुल होगी. फ़ाइनेंस सेक्टर में काम कर रहे लोग जो टेक-एक्सपेंशन चाहते हैं उनके लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. और बैंकिंग सेक्टर को छोड़कर क्रिप्टो की दुनिया में जाने वाले लोगों के लिए भी, एक अच्छे प्राइमर की तरह.

जो लोग इस दुनिया से अनजान हैं (दुनिया के अधिकतर लोग, हम जैसे लोग!) वे भी थोड़ी मेहनत करें तो किताब उनको भी निराश नहीं करेगी.