देश में एक दशक में तेजी से घटी गरीबी कम होने की रफ्तार

पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) द्वारा साल 2020-21 में जुटाए गए आंकड़ों को लेकर एसबीआई रिसर्च द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि साल 2020-21 में देश में गरीबी कम होकर 17.9 फीसदी हो गई. जबकि 2011-12 में यह संख्या 21.9 फीसदी थी.

देश में एक दशक में तेजी से घटी गरीबी कम होने की रफ्तार

Sunday July 03, 2022,

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पिछले एक दशक में देश में गरीबी कम होने की रफ्तार 89 फीसदी तक गिर गई है. साल 2004-05 और 2011-12 के बीच जहां गरीबी दो करोड़ प्रति साल की दर से कम हो रही थी तो वहीं 2012 से 2021 तक इसकी रफ्तार कम होकर 20.75 लाख प्रति साल हो गई.

यह आंकड़ा इस साल की शुरुआत में जारी विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के दो अन्य अनुमानों की पुष्टि करते हैं. इसके मुताबिक, भारत में गरीबी कम होने की दर तेजी से घटी है.

हालांकि, इसके बावजूद पिछले एक दशक में देश में गरीबी की संख्या में 4 फीसदी तक की कमी देखी गई है. पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) द्वारा साल 2020-21 में जुटाए गए आंकड़ों को लेकर एसबीआई रिसर्च द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि साल 2020-21 में देश में गरीबी कम होकर 17.9 फीसदी हो गई. जबकि 2011-12 में यह संख्या 21.9 फीसदी थी.

2016-17 के बाद अर्थव्यवस्था की मंदी के बाद से पिछले पांच वर्षों में नेशनल अकाउंट डेटा के हालिया अनुमानों के अनुसार, 2018-19 और 2021-22 के बीच प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में 0.2 फीसदी प्रति वर्ष की गिरावट दिखा रही है.

इसकी पुष्टि पीएलएफएस के निष्कर्षों से होती है, जो 2017-18 से खपत और आय का अनुमान पेश करते हैं. हालांकि इनकी तुलना 2011-12 के खपत अनुमानों से नहीं की जा सकती, लेकिन ये एक-दूसरे से तुलनीय हैं.

पीएलएफएस सर्वेक्षणों से प्रति व्यक्ति वास्तविक आय भी 2018-19 और 2020-21 के बीच प्रति वर्ष 1.1 फीसदी की गिरावट दर्शाती है.

पीएलएफएस यह भी रिपोर्ट करता है कि गिरावट मुख्य रूप से कमजोर प्रति व्यक्ति शहरी आय के कारण थी, जो उस अवधि में प्रति वर्ष 4.2 प्रतिशत कम हो गई, जबकि प्रति व्यक्ति ग्रामीण आय 2.7 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ी हो.

पीएलएफएस के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारत की जनसंख्या का अनुपात 2018-19 में 26 फीसदी था, जो 2020-21 में बढ़कर 29 फीसदी हो गया.

अप्रैल 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, कृषि और गैर-कृषि मजदूरी दोनों में पिछले वर्ष गिरावट आई है, जिसमें कृषि मजदूरी में वार्षिक 2 फीसदी और गैर-कृषि मजदूरी में 3.8 फीसदी की गिरावट आई है. पिछले पांच वर्षों में, गैर-कृषि वास्तविक मजदूरी में 1 फीसदी प्रति वर्ष की गिरावट आई है, जबकि कृषि मजदूरी स्थिर (प्रति वर्ष 0.05 फीसदी की वृद्धि के साथ) रही.

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