शेयर बाजार लगातार चौथे दिन धड़ाम, सेंसेक्स 954 अंक लुढ़का; स्टरलाइट टेक्नोलॉजीस 7.65% तक गिरा

By Ritika Singh
September 26, 2022, Updated on : Mon Sep 26 2022 13:00:10 GMT+0000
शेयर बाजार लगातार चौथे दिन धड़ाम, सेंसेक्स 954 अंक लुढ़का; स्टरलाइट टेक्नोलॉजीस 7.65% तक गिरा
सेंसेक्स पर लिस्टेड 30 कंपनियों में से केवल 6 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए हैं.
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

वैश्विक बाजारों में नरम रुख और विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच घरेलू शेयर बाजार (Stock Markets) में सोमवार को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा. कई देशों के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि और वैश्विक बाजारों में मंदी की बढ़ती आशंका के चलते विदेशी निवेशकों की बिकवाली से घरेलू बाजारों में गिरावट आई. अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने का भी निवेशकों की धारणा पर प्रभाव पड़ा. तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स (BSE Sensex) में लगातार चौथे कारोबार सत्र में गिरावट आई और यह 953.70 अंकों की गिरावट के साथ 57145.22 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1060.68 अंक तक गिर गया था. पूरे दिन में सेंसेक्स ने 57708.38 का उच्च स्तर और 57038.24 का निचला स्तर छुआ.


सेंसेक्स पर लिस्टेड 30 कंपनियों में से केवल 6 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए हैं. मारुति, टाटा स्टील, ITC, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, NTPC, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंडसइंड बैंक प्रमुख रूप से नुकसान में रहे. मारुति का शेयर सबसे ज्यादा 5.49 प्रतिशत गिरा है. दूसरी तरफ HCL टेक्नोलॉजीज, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, TCS, अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो और नेस्ले के शेयर लाभ के साथ बंद हुए. सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप कुल मिलाकर 6.59 लाख करोड़ रुपये गिरकर 270.05 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. बीएसई का मिडकैप 3.33 प्रतिशत और मिडकैप सूचकांक 2.84 प्रतिशत टूट गये.

Nifty50 पर कैसा रहा ट्रेंड

इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) 311.05 अंकों की गिरावट के साथ 17016.30 पर बंद हुआ. निफ्टी आईटी को छोड़ अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए हैं. सबसे ज्यादा 4.25 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी रियल्टी में आई, वहीं निफ्टी मेटल 4.13 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ है. निफ्टी पर एचसीएल टेक्नोलॉजीस, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, डिविसलैब, TCS टॉप गेनर्स रहे. दूसरी ओर अडानी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स, हिंडाल्को, मारुति और आयशर मोटर्स टॉप लूजर्स रहे.


शुक्रवार को सेंसेक्स 1,020.80 अंक यानी 1.73% की गिरावट दर्ज करते हुए 58,098.92 पर बंद हुआ था. वहीं निफ्टी 302.45 अंक यानी 1.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,327.35 पर बंद हुआ था. सेंसेक्स 4 दिनों में 2000 पॉइंट से ज्यादा गिर चुका है.

हर्षा इंजीनियर्स इंटरनेशनल की शानदार शुरुआत

हर्षा इंजीनियर्स इंटरनेशनल लिमिटेड (Harsha Engineers International Ltd.) की सोमवार को शेयर बाजार में लिस्टिंग हो गई और यह अच्छी रही. कंपनी का शेयर बीएसई पर 444 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इसके आईपीओ इश्यू प्राइस के अपर बैंड से 34.5 प्रतिशत ज्यादा था. हर्षा इंजीनियर्स के आईपीओ के तहत प्राइस बैंड 314-330 रुपये रहा था. वहीं एनएसई पर शेयर 450 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो 36.4 प्रतिशत ज्यादा था. कारोबार बंद होने पर शेयर बीएसई पर अपने ओपनिंग प्राइस से 9.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 485.90 रुपये पर बंद हुआ. दिन के दौरान यह 527.60 रुपये तक गया. एनएसई पर यह 482.70 रुपये पर बंद हुआ है. हर्षा इंजीनियर्स इंटरनेशनल का आईपीओ 14 सितंबर को खुला था और 16 सितंबर को बंद हुआ था. आईपीओ को संस्थागत खरीदारों की भारी मांग के चलते शुक्रवार को निर्गम के आखिरी दिन 74.70 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था.

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीस 7.65% तक गिरा

कंपनी का शेयर बीएसई पर 7.59 प्रतिशत टूटकर 159.50 रुपये और एनएसई पर 7.65 प्रतिशत गिरकर 159.25 रुपये पर बंद हुआ है. कंपनी के सीएफओ मिहिर मोदी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के पद से इस्तीफा देने के बाद कंपनी के शेयरों को झटका लगा. वह 14 अक्टूबर 2022 को अपने दायित्वों से मुक्त हो जाएंगे.

सुजलॉन एनर्जी और अडानी पोर्ट्स 6% से ज्यादा टूटा

सुजलॉन एनर्जी का शेयर बीएसई पर 6.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 8.53 रुपये और एनएसई पर 5.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 8.60 रुपये पर बंद हुआ है. कंपनी के बोर्ड ने राइट्स इश्यू के जरिए 1200 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी दी है. इसके बाद शेयरों में गिरावट आई. गौतम अडानी के ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स का शेयर बीएसई पर 5.48 प्रतिशत टूटकर 863.65 रुपये और एनएसई पर 6.35 प्रतिशत गिरकर 855.80 रुपये पर बंद हुआ है.


हिंडाल्को का शेयर भी लगभग 6 प्रतिशत गिरा है. ग्लोबल इकनॉमी में स्लोडाउन को देखते हुए कंपनी की सब्सिडियरी के क्लाइंट द्वारा अर्निंग आउटलुक घटाए जाने के बाद शेयरों में गिरावट आई. बीएसई पर शेयर 5.83 प्रतिशत टूटकर 373.30 रुपये और एनएसई पर 5.85 प्रतिशत गिरकर 373.15 रुपये पर बंद हुआ है.

वैश्विक बाजारों की स्थिति

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट में बंद हुए. यूरोपीय शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट का रुख था. अमेरिकी बाजार में भी शुक्रवार को गिरावट रही. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड रिजर्व के ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि की वजह से डॉलर में तेजी, सुस्त आर्थिक वृद्धि और सतर्क निवेशकों की बढ़ती मांग वैश्विक शेयर बाजारों में उथल-पुथल पैदा कर रही है. बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 2899.68 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे. अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत की नरमी के साथ 85.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 58 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 81.67 (अस्थायी) पर बंद हुई.

लगातार चौथी बार बढ़ सकती है रेपो रेट

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अमेरिका के फेडरल रिजर्व समेत अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों का अनुसरण करते हुए शुक्रवार को लगातार चौथी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 75 बेसिस पॉइंट (0.75%) की बढ़ोतरी (Fed Rates Hike) की है. RBI के गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की बैठक बुधवार को शुरू होगी और दरों में परिवर्तन पर जो भी निर्णय होगा, उसकी जानकारी शुक्रवार 30 सितंबर को दी जाएगी. RBI ने महंगाई को काबू में करने के लिए रेपो दर में मई से अब तक 1.40 प्रतिशत की वृद्धि की है. इस दौरान रेपो दर चार प्रतिशत से बढ़कर 5.40 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है. MPC 30 सितंबर को रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला कर सकती है. ऐसा होने पर रेपो दर बढ़कर 5.90 प्रतिशत हो जाएगी. रेपो दर में मई में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी और जून और अगस्त में यह 0.50-0.50 प्रतिशत बढ़ाई गई. विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए दरों में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि भी की जा सकती है. इसके चलते भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई.