15 वर्षीय छात्रा ने टीनएजर्स के लिए शुरू की किफायती परफ्यूम लाइन, अब तक कमाए 63,000 रुपये

By Rekha Balakrishnan
April 19, 2022, Updated on : Thu Apr 21 2022 06:12:11 GMT+0000
15 वर्षीय छात्रा ने टीनएजर्स के लिए शुरू की किफायती परफ्यूम लाइन, अब तक कमाए 63,000 रुपये
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एक टीनएजर के रूप में, मुंबई में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा, आर्यही अग्रवाल का कहना है कि उन्हें टीनएजर्स के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल, ऑर्गेनिक और सस्ती परफ्यूम लाइन को खोजना बेहद मुश्किल लगा। थापर एंटरप्रेन्योर्स एकेडमी (पूर्व में YEA!) मेंटर्स के साथ विचार-मंथन के बाद, आर्यही ने टीनएजर्स के लिए अपना खुद का ब्रांड परफ्यूम, बेला फ्रैग्रेंस लॉन्च करने का फैसला किया।


आर्यही का कहना है कि वह वॉल्ट डिज्नी, वारेन बफेट, स्टीव जॉब्स और धीरूभाई अंबानी जैसे प्रसिद्ध व्यवसायियों की जीवनी से काफी प्रेरित थीं, और विशेष रूप से कोको चैनल के क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित थीं जिन्होंने फैशन की दुनिया को हिलाकर रख दिया था।


उन्होंने योरस्टोरी को बताया, "मुझे, खासकर मेरे आयु वर्ग के लिए ऐसा कोई परफ्यूम नहीं मिला जो कि 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक हो।"


आर्यही ने छह महीने के रिसर्च एंड डेवलपमेंट के बाद और आवश्यक तेलों को मिलाकर फॉर्मुलों के निरंतर परीक्षण के बाद, स्वयं की एक परफ्यूम के साथ आईं।


वे कहती हैं, "यह परफ्यूम मेरे प्रयासों का एक उत्पाद है, जबकि कई इंडस्ट्री के दिग्गजों ने कहा था कि पूरी तरह से ऑर्गेनिक परफ्यूम बनाना संभव नहीं है। मैंने अपनी किचन में परफ्यूम के फार्मूले को तैयार किया था और यह सुनिश्चित किया कि यह इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित थी। मैंने लैब-टेस्ट में डिनेचर्ड अल्कोहल का इस्तेमाल किया था। लैब की रिपोर्ट भी यही साबित हुई।”


उनके टीईए सलाहकारों ने उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन किया, और सुनिश्चित किया कि वह अपनी समय सीमा को पूरा करे और गलत टिप्पणियों से उनका मोहभंग न हो।


बेला फ्रैग्रेंस को फिलहाल इंस्टाग्राम पर बिजनेस हैंडल के जरिए 599 रुपये प्रति बोतल में बेचा जा रहा है। फ्रैग्रेंस उनके द्वारा मुंबई में एक फैसिलिटी में हैंडक्राफ्ट की जाती है, जिसकी क्षमता प्रति माह 500 बोतलों की है। यह दो फ्रैग्रेंस में उपलब्ध है: बेला नेचुरल्स और बेला ऑर्गेनिक्स।


वह बताती हैं, “मेरा उत्पाद पूरी तरह से ऑर्गेनिक, पर्यावरण के अनुकूल और हस्तनिर्मित है। यह आवश्यक तेलों और डिनेचर्ड अल्कोहल का इस्तेमाल करके बनाया जाता है, जो मुख्य रूप से गुलाब से प्राप्त होता है ताकि इसे पुष्प सुगंध दिया जा सके।"


अपने लॉन्च के एक महीने के भीतर, व्यवसाय ने पहले ही 65% के सकल मार्जिन के साथ 60,000 रुपये से अधिक राजस्व और 45,000 रुपये का लाभ कमाया है।

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ऑर्गेनिक और किफायती

आर्यही का कहना है कि बेला फ्रेग्रेन्सेस को प्रतिस्पर्धियों से अलग करने वाली बात यह है कि यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक है जिसमें कोई केमिकल शामिल नहीं है, यह किशोर-उन्मुख है, और इसकी कीमत कम है, जिससे यह किफायती हो जाती है। 


लॉन्च की राह आसान नहीं रही है। 


वे कहती हैं, "मुझे यह स्वीकार करना होगा कि परफ्यूम के लिए एक फॉर्मूले के साथ आना अविश्वसनीय रूप से कठिन था, और मैं अपने आइडिया को छोड़ने और बंद करने के करीब थी। लेकिन आखिरकार, कड़ी मेहनत और प्रयास के बाद, मैंने इस फॉर्मूले को अंजाम दे दिया।”


आर्यही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने के लिए अपनी मां की मदद लेती हैं। उनके पिता, अभय अग्रवाल एक फंड मैनेजर हैं। उन्होंने बेटी को बेला फ्रैग्रेंस शुरू करने के लिए 20,000 रुपये के शुरुआती निवेश के साथ मदद की थी। 


वह वित्तीय निर्णयों में उनका मार्गदर्शन भी करते हैं और कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं के साथ डील करते हैं। पैकेजिंग के लिए डिजाइन उनके द्वारा बनाया गया था और एक डिजाइनर द्वारा इसे और परिष्कृत किया गया था। 


आर्यही अब सोशल मीडिया पर ब्रांड की उपस्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ नायका जैसी प्रमुख ईकॉमर्स वेबसाइटों पर पंजीकरण और बिक्री करके बेला फ्रैग्रेंस बनाने और विकसित करने की योजना बना रही हैं। अंतिम लक्ष्य "बेला फ्रैग्रेंस को घरेलू नाम बनाना" है। 


वर्तमान में कक्षा 9 में पढ़ रहीं, आर्यही का व्यस्त कार्यक्रम है, लेकिन अपने व्यवसाय के लिए उनका जुनून सुनिश्चित करता है कि उनके पास हमेशा अपना ब्रांड बनाने और नई फ्रैग्रेंस पर काम करने का समय हो। 


वे कहती हैं, “मैं अपनी कंपनी को साल के दौरान विकसित करना चाहती हूं, पहले मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से ब्रांड की जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं। स्टडी प्राथमिकता है, लेकिन बचा हुआ समय हमेशा व्यवसाय के लिए समर्पित होता है। मैं यह सुनिश्चित करती हूं कि मैं अपने स्टार्टअप पर फोकस करने के लिए एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के बाद समय निकालूं।”


Edited by Ranjana Tripathi