संस्कृत की पढ़ाई कर अधिकारी बनने वाले बिहार के आदित्य झा की प्रेरक कहानी

By निशान्त जैन, IAS अधिकारी (गेस्ट ऑथर)
April 02, 2020, Updated on : Fri Aug 26 2022 09:15:10 GMT+0000
संस्कृत की पढ़ाई कर अधिकारी बनने वाले बिहार के आदित्य झा की प्रेरक कहानी
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‘रुक जाना नहीं’ की इस मोटिवेशनल सीरीज़ में आज हम बात करेंगे बिहार के आदित्य कुमार झा की, जिन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में संस्कृत को चुना और UPSC में सफलता पाई। इंटरव्यू के ठीक पहले पैर में फ़्रैक्चर हो जाने पर भी आत्मविश्वास नहीं खोया और व्हीलचेयर पर बैठकर इंटरव्यू दिया और अंतिम रूप से दिल्ली एवं अंडमान-निकोबार सिविल सेवा’ में चयनित हुए।


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आदित्य झा



‘सिविल सेवा’ यह शब्द सामने आते ही भारत के ग्रामीण मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चें की आंखें अद्भुत रोमांच के साथ चमक-सी उठती हैं। बिहार के सुदूर मधुबनी ज़िले के एक गांव लखनौर में प्रारंभिक बाल्यकाल बिताने वाला मैं भी उसी अद्भुत सिविल सेवा के स्वप्न, किवदंती, प्रतिष्ठा के रोमांच से अभिभूत हुआ।


 मेरे पिताजी संस्कृत के प्रोफेसर हैं। घर में अब तक सभी संस्कृत के विद्वान शिक्षक ही हुए हैं। जाहिर-सी बात है मेरे पिताजी के मन में हम 3 भाइयों के लिए कुछ अलग बनने की आकांक्षा थी। फलतः मुझे कक्षा 6 में बड़े भाई के साथ इलाहाबाद भेज दिया गया। जब इलाहाबाद पहुँचा तो मानो सिविल सेवा के प्रति बचपन से पड़े आकर्षण के बीज ने इलाहाबाद के उर्वर मिट्टी के संपर्क में आकर पौधे का रूप धारण कर लिया। मेरे अनुशासनप्रिय अग्रज खुद UPSC की तैयारी में जुटे थे, तो यह संक्रामक रोग बहुत शुरुआत में ही मुझे लग चुका था।


खैर अब मैं इंटरमीडिएट में पहुँच चुका था कुछ वर्षों के बाद। विषय के रूप में भूगोल, संस्कृत एवं राजनीति विज्ञान को BA के विषय के रूप में चयनित किया। MA करने के पश्चात अब दिल्ली आ चुका था।


 उस समय सीसैट का अद्भुत आतंक था। कर्मकांड के मुताबिक दिल्ली के कोचिंग में भी गया। घटिया, गुणवत्ताहीन एवं स्तरहीन कोचिंग मार्गदर्शन के कारण तैयारी UPSC के मुताबिक नहीं हो पाई। इसी बीच 2013 में पाठयक्रम में बदलाव ने रणनीति, आत्मविश्वास को तोड़कर रख दिया। इन कारणों से राज्य सिविल सेवा की ओर रुख किया। इसी बीच IB में सहायक सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर के रूप में पहली सफलता प्राप्त हुई।


यह निर्णय किया कि IB जॉइन नहीं करनी है। इस बात पर मेरे पिताजी बहुत खफा हुए। खैर उनकी असुरक्षाबोध, नाराजगी के बीच यह जुआ मैंने खेला।


सीसैट के प्रति मानसिक भय व हिंदी माध्यम में नगण्य रिजल्ट ने मिलकर मेरा समस्त आत्मविश्वास तोड़ डाला था। किंतु 2015 अद्भुत ऊर्जा के साथ सामने आया। इस वर्ष हिंदी माध्यम में निशान्त जैन द्वारा 13वीं रैंक की प्राप्ति, सीसैट आंदोलन की सफलता ने मेरे जैसे लाखों उम्मीदवारों को नवीन ऊर्जा प्रदान की।


3 वर्षों की निराशा पूर्णतया समाप्त हुई। सिविल सेवा परीक्षा में प्रथम प्रयास 2015 की मुख्य परीक्षा पूरे उत्साह से दी। अनेक परिश्रमी मित्रों का सर्किल भी तब तक बन चुका था। साथ ही UP PCS में जिला बचत अधिकारी के रूप में दूसरी सफलता प्राप्त हुई।





2015 के मुख्य परीक्षा में चूकने के पश्चात दुगुने उत्साह से 2016 की परीक्षा दी। अब तक वैकल्पिक विषय संस्कृत पर ठोस पकड़ बन चुकी थी। टेस्ट सीरीज, सामान्य अध्ययन भी औसत से बेहतर हो चली थी। मुख्य परीक्षा में संतोषजनक प्रदर्शन के उपरांत एटा जिले में जिला बचत अधिकारी के रूप में जॉइन करके नए उत्साह से तैयारी को आगे बढ़ाया।


मुख्य परीक्षा में सफल होने पर परिवार सहित सभी से इस खुशखबरी को साझा किया। तभी उसी रात लगभग 9 बजे एक घातक दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया। मैं शीघ्र ही अस्पताल तक पहुँच गया। फिर अगले दो माह बिस्तर पर पड़े-पड़े इंटरव्यू की अद्भुत तैयारी हो पाई। मॉक इंटरव्यू के लिए व्हीलचेयर पर अपनी बड़ी दीदी के साथ मुखर्जी नगर से राजेन्द्र नगर जगह-जगह घूमा। फिर 21 अप्रैल को सक्सेना सर के बोर्ड में व्हीलचेयर पर ही इंटरव्यू में सम्मिलित हुआ। इंटरव्यू बहुत ही औसत हुआ तथा सफलता की कोई आशा नहीं थी।


अंतिम परिणाम में जैसे ही अपना नाम 503वें स्थान पर देखा तो मानो सहसा विश्वास नहीं हुआ। जीवन में जो आंसू दर्ज़नों परीक्षा में फेल होकर नहीं बाहर निकले, वो सहसा ही द्वितीय प्रयास में सफलता के पश्चात फूट पड़े। खैर अब मेरा जीवन पूर्णतः बदल चुका था। मेरे पिताजी के जीवन की सबसे बड़ी साधना एक हद तक पूर्ण होती दिख रही थी।


इसी उत्साह को निरन्तर रखते हुए सिविल सेवा परीक्षा 2017 की मुख्य परीक्षा दी और IRAS के प्रशिक्षण को जॉइन किया। 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में 431 रैंक पर DANICS सेवा हेतु चयन प्राप्त हुआ। इस प्रकार लगातार दूसरी बार चयन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ। वर्तमान में, DANICS सेवा में सेवारत हूं। “चरैवेति चरैवेति” के सिद्धांत पर प्रत्येक दिन, प्रत्येक एटेम्पट से कुछ नया सीखकर निरन्तर आगे बढ़ने को प्रयासरत हूँ।




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गेस्ट लेखक निशान्त जैन की मोटिवेशनल किताब 'रुक जाना नहीं' में सफलता की इसी तरह की और भी कहानियां दी गई हैं, जिसे आप अमेजन से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।


(योरस्टोरी पर ऐसी ही प्रेरणादायी कहानियां पढ़ने के लिए थर्सडे इंस्पिरेशन में हर हफ्ते पढ़ें 'सफलता की एक नई कहानी निशान्त जैन की ज़ुबानी...')