टाइगर संरक्षण के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए इस कपल ने की 36 हजार किलोमीटर की यात्रा

By yourstory हिन्दी
December 13, 2019, Updated on : Fri Dec 13 2019 12:14:17 GMT+0000
टाइगर संरक्षण के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए इस कपल ने की 36 हजार किलोमीटर की यात्रा
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वन्यजीव संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, कोलकाता के एक कपल ने अपनी बाइक पर 36,000 किमी की यात्रा की। पूरे देश में 50 टाइगर रिजर्व हैं इस इस कपल ने हर रिजर्व की यात्रा की। 

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सांकेतिक फोटो

देश में जलवायु परिवर्तन और ग्रीन कवर तेजी से घट रहा है, ऐसे में इसका सीधा असर वन्यजीवों पर भी देखने को मिल रहा है जो गुजरते दिनों के साथ लुप्तप्राय हो रहे हैं। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, कोलकाता के एक कपल ने अपनी बाइक पर 36,000 किमी की यात्रा की। पूरे देश में 50 टाइगर रिजर्व हैं इस इस कपल ने हर रिजर्व की यात्रा की। 


कोलकाता में साल्ट लेक क्षेत्र के निवासी, दंपति, रथिन दास और गीतांजलि दासगुप्ता ने दुधवा, बांदीपुर, काजीरंगा, सुंदरबन, बक्सा, पीलीभीत, नागार्जुनसागर और रणथंभौर बाघ अभयारण्य की यात्रा की है। उनकी यात्रा 15 फरवरी से शुरू हुई और दोनों ने इस दौरान 29 राज्यों का दौरा किया।


पीटीआई से बातचीत में रथिन ने कहा,

“हमने 268 दिनों की यात्रा के दौरान 3,000 ग्रामीणों के साथ बातचीत की। हम 10 नवंबर को कोलकाता लौट आए।"





इस दौरान दंपति ने 643 अभियानों में भी भाग लिया जो टाइगर रिजर्व के पास स्थित सभी स्कूलों में आयोजित किए गए थे।


द लॉजिकल इंडियन के मुताबिक, राथिन कहते हैं,

''हमने ग्रामीणों से बात की और उन्होंने कहा कि कुछ पर्यटक लाउड म्यूजिक बजाते हुए वन क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। हमने उन्हें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वन कर्मियों के साथ समन्वय करने के लिए कहा।''

कपल के इन अभियानों को कई एनजीओ का भी साथ मिला जिनमें एक्सप्लोरिंग नेचर, साउथ एशियन फोरम फॉर एनवायरनमेंट (SAFE) और यूके के एशियन वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर क्लब शामिल हैं। अपने अभियानों के जरिए रथिन ने कुछ चिंताएँ भी उठाईं।


लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा,

“कर्नाटक में बांदीपुर और महाराष्ट्र में मेलघाट अच्छा काम कर रहे हैं। वे पिछले पांच वर्षों में मुख्य क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाने में सक्षम रहे हैं।”


अब, दंपति का लक्ष्य बाघ संरक्षण के संदेश को फैलाने के लिए पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, वियतनाम और एशियाई देशों का दौरा करना है।