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नेत्रहीन होकर बनाया तैराकी में रिकॉर्ड, अब लोगों को कर रहे हैं तैराकी के लिए जागरूक

नेत्रहीन होकर बनाया तैराकी में रिकॉर्ड, अब लोगों को कर रहे हैं तैराकी के लिए जागरूक

Monday February 24, 2020 , 2 min Read

मनोज नेत्रहीन होने के बावजूद आज अपनी सराहनीय पहल के जरिये लोगों को तैराकी सीखने के लिए प्रेरित करते हैं।  

(चित्र: न्यू इंडियन एक्सप्रेस)

(चित्र: न्यू इंडियन एक्सप्रेस)



यह जानना काफी रोमांचक और आश्चर्यजनक है कि 11 साल के आर मनोज ने एक विशेष कारण के तहत रिकॉर्ड समय में नदी पार करने का काम किया है, जबकि आर मनोज नेत्रहीन हैं।


देश में बढ़ती डूबने की घटनाओं से चिंतित होकर मनोज ने तैराकी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ये कदम उठाया। इस तरह वह एक संदेश भेजना चाहते हैं कि तैरना सीख कर कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।


मनोज ने केरल में पेरियार नदी में 600 मीटर कि दूरी महज 30 मिनट में  तय की। उन्होंने अद्वैत आश्रम से सुबह 8:10 बजे नदी में तैरना शुरू किया और सुबह 8:40 बजे अलुवा मणप्पुरम पहुंचे।


अद्वैत आश्रम के प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद स्वामी ने इस यात्रा को झंडा दिखाया।


न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मनोज ने कहा, "मेरे वरिष्ठों में से एक नवनीत, 2015 में पेरियार नदी पर तैरने वाले पहले नेत्रहीन व्यक्ति थे, जिसके बाद वह तैराकी सीखने के लिए मेरी प्रेरणा बन गए।"



उन्होंने आगे कहा,

"हम डूबने के कई मामलों के बारे में सुनते हैं। यदि हम तैरना जानते हैं, तो पानी में होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। मेरी पहल लोगों को तैराकी के महत्व से अवगत कराना है। प्रारंभिक प्रशिक्षण कक्षाओं के दौरान मुझे भी यह कठिन लगा, हालांकि साजी सर ने मुझे रोजाना लंबी दूरी तय करने पर बल दिया और इस तरह मैंने आसानी से पहल पूरी की।”

द लॉजिकल इंडियन के अनुसार, यह मनोज के प्रशिक्षक साजी वलासेरिल ही थे, जिन्होंने उन्हें 30 दिनों तक प्रशिक्षित किया। साजी ने अब तक 3,000 लोगों को तैरने का प्रशिक्षण दिया है। मनोज के वरिष्ठ नवनीत को भी साजी ने ही प्रशिक्षित दिया था।


साजी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“मनोज को प्रशिक्षित करना आसान था। उसे यह खत्म करने में 30 मिनट का समय लगा क्योंकि वह आराम के मूड में था। आज बच्चों के माता-पिता को उन्हें प्रशिक्षित होने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। वास्तव में, तैराकी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।"