विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून 2022

By Prerna Bhardwaj
June 03, 2022, Updated on : Wed Jul 06 2022 13:25:17 GMT+0000
विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून 2022
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प्रदूषण की वजह से प्रतिवर्ष तकरीबन लगभग 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है. एशिया-पेसिफिक क्षेत्र के लोग खासतौर पर इसका शिकार होते हैं. लैंसेट की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक़, अकेले भारत में 23 लाख लोग प्रदूषण से मरते हैं. 16 लाख वायु प्रदूषण और 14 लाख प्रदूषित जल के कारण मौत का शिकार होते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव युद्ध, आंतकवाद, मलेरिया, एचआईवी, ड्रग्स या शराब से भी ज्‍यादा है. प्रदूषण हमारे पर्यावरण पर खतरे की सबसे भयावह तस्वीर बयां करता है.

Pollution

हम हर साल 90 अरब टन संसाधनों की खपत करते हैं. यह संख्‍या उससे 70 फीसदी ज्यादा है, जितनी हमें करनी चाहिए. दुनिया भर में लगभग 4.1 अरब उपभोक्‍ता हैं. अगले सात सालों में यह संख्या बढ़कर 5.6 अरब हो जाएगी. हम सब मिलकर हर साल 2.12 अरब टन कूड़ा-कचरा उत्पन्न करते हैं और 5 करोड़ टन ई-वेस्ट उत्पन्न करते हैं.


इन आंकड़ों को अगर ध्यान से देखें तो यह साफ़ है कि कुछ सालों में कंज्यूमर तो बढ़ेंगे पर संसाधन नहीं बचेंगे. दुनिया की आबादी क़रीब 7.8 अरब है. पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक़, 2050 तक दुनिया की जनसंख्या इतनी बढ़ जाएगी कि हमारे मौजूदा संसाधन कम पड़ जपर्यावरण पर बढ़ते खतरे और इसके नुकसान को देखते हुए पहली बार वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की थी. पर्यावरण दिवस का पहला सम्मेलन स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 5 जून1972 को आयोजित किया गया था. इस सम्मलेन में 119 देशों ने हिस्सा लिया. दो साल बाद 1974 में विश्व पर्यावरण दिवस ‘Only One Earth’ यानी केवल एक पृथ्वी स्लोगन के साथ मनाया गया. हम सब एक हैं, इसीलिए हमारा घर भी एक है, जिसे बचाने के लिए हम सबको एक साथ आना होगा. 50 साल पहले का यह स्लोगन ‘प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना’ आज भी प्रासंगिक है.

विश्‍व पर्यावरण दिवस 2022:

विश्‍व पर्यावरण दिवस हर साल UNEP (United Nation Environment Programmes) की मदद से अलग-अलग देशों द्वारा आयोजित किया है, जहां पर्यावरण से जुड़े विभिन्‍न पहलुओं पर बातचीत होती हैं. इस साल की होस्ट कंट्री स्वीडन है. मीटिंग का नाम है “स्टॉकहोम 50+”. यह 2 जून और 3 जून को हो रही है. कोविड पैनडेमिक के बाद हो रही इस इस साल की मीटिंग में 122 देशों से आये हुए स्टेकहोल्डर्स क्लाइमेट चेंज, पॉल्‍यूशन और वेस्ट, प्राकृतिक और बायो-डायवर्सिटी की हो रही क्षति पर बात करेंगे और इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे.