YearEnder 2022: मौत के बाद जिंदगी, ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य... विज्ञान की दुनिया में ये 5 महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं

यह साल कई साइंटिफिक डेवलपमेंट्स का साक्षी रहा जो मानवता और ब्रह्मांड की हमारी समझ को बदलने का वादा करता है. यहां, हम आपको इस साल हुए पांच सबसे महत्वपूर्ण साइंटिफिक डेवलपमेंट्स के बारे में बताने जा रहे हैं.

YearEnder 2022: मौत के बाद जिंदगी, ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य... विज्ञान की दुनिया में ये 5 महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं

Saturday December 31, 2022,

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न्यूक्लियर फ्यूजन टेक्नोलॉजी में अमेरिका की एक प्रमुख सफलता ने हमें एक ऐसे भविष्य की झलक दी है जहां ऊर्जा का नवीकरणीय, स्वच्छ और लगभग असीमित सोर्स संभव हो सकता है. इस सफलता के साथ ही विज्ञान का एक रोमांचक साल खत्म हो गया.

यह साल कई साइंटिफिक डेवलपमेंट्स का साक्षी रहा जो मानवता और ब्रह्मांड की हमारी समझ को बदलने का वादा करता है. यहां, हम आपको इस साल हुए पांच सबसे महत्वपूर्ण साइंटिफिक डेवलपमेंट्स के बारे में बताने जा रहे हैं.

1. फ्यूजन एनर्जी की सफलता

वैज्ञानिकों ने बीते 13 दिसंबर को घोषणा की कि कैलिफोर्निया में लॉरेंस नेशनल लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने एक न्यूक्लियर फ्यूजन (परमाणु संलयन) रिएक्शन किया, जो इसे प्रज्वलित करने के लिए उपयोग की जाने वाली ऊर्जा से अधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है. यह क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य का वादा करती है.

पृथ्वी पर लगभग सभी ऊर्जा परमाणु संलयन ऊर्जा से आती है. हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन से लेकर हमारे द्वारा जलाए जाने वाले जीवाश्म ईंधन तक, ऊर्जा के कई स्रोत सूर्य में होने वाली परमाणु विखंडन प्रतिक्रियाओं के बारे में पता लगा सकते हैं. लेकिन हम अभी भी इस प्रक्रिया में महारत हासिल करने से वर्षों और शायद दशकों दूर हैं.

2. ब्रह्मांड की उत्पत्ति का चलेगा पता, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर फिर सक्रिय

तीन साल से अधिक समय तक मेंटेनेंस और अपग्रेड्स में रहने के बाद, दुनिया का सबसे बड़ा पार्टिकल एक्सेलेटर, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) इस साल अप्रैल में वापस काम करने लगा है. यह स्विटजरलैंड स्थित यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (सर्न) में स्थित है.

यह एलएचसी के तीसरे दौर की शुरुआत को दिखाता है. यह एडवांस नया एलएचसीबी डिटेक्टर माप की संवेदनशीलता को और अधिक बढ़ाकर अधिक आंकड़े एकत्र करेगा. हम ब्रह्मांड के रहस्यों को अभी तक पूरी तरह से नहीं सुलझा सकते, लेकिन नया उन्नत एलएचसीबी डिटेक्टर सटीक मापन का द्वार खोलेगा, जिसमें अज्ञात घटनाओं का पता लगाने की क्षमता है.

इस साल जुलाई में, CERN ने पार्टिकल एक्सेलेटर का उपयोग करते हुए तीन नए विदेशी कणों- एक नया पेंटाक्वार्क और नए टेट्राक्वार्क की एक जोड़ी की खोज की घोषणा की.

3. बेबी वार्महोल

पहली बार 1935 में अल्बर्ट आइंस्टीन और नाथन रोसेन द्वारा प्रस्तावित वार्महोल तभी से साइंस फिक्शन की कहानियों में बने हुए हैं. वर्महोल, या आइंस्टीन-रोसेन ब्रिज, सैद्धांतिक संरचनाएं हैं जिन्हें स्पेस टाइम में अलग-अलग बिंदुओं पर दो सिरों वाली सुरंग माना जा सकता है. यह सुरंग दो बिंदुओं को बड़ी या छोटी दूरी पर, या समय में दो अलग-अलग बिंदुओं से जोड़ सकती है.

इस साल फरवरी में शोधकर्ताओं ने टाइम और स्पेस को तोड़े बिना वार्महोल बना लेने की घोषणा की है. वैज्ञानिकों के अनुसार उन्होंने क्वांटम कंप्यूटर में दो ब्लैकहोल्स की नकल तैयार कर स्पेस और टाइम के बीच संदेश प्रसारित करने में सक्षम सुरंग बना ली है. यही सुरंग वार्महोल कहलाती है. उन्होंने एक क्वांटम सूचना को भी टेलीपोर्ट किया.

हालांकि, इस शोध के संबंध में कई भौतिक विज्ञानियों का कहना है जो वार्महोल बनाया गया है वह असल में सिर्फ उसका मॉडल है. वास्तविक और भौतिकरूप से अभी वार्महोल नहीं बना है, बल्कि भविष्य के लिए संभावना बनी है.

4. अमरता की दिशा में कदम, सूअरों की कोशिकाएं पुनर्जीवित करने में सफलता

ग्रीक पौराणिक पात्र एच्लीस से लेकर हिंदू पौराणिक पात्र हिरण्यकश्यप तक की पौराणिक कथाओं में, अमरता की खोज का जिक्र मिलता है. हालांकि, इस साल अगस्त में साइंस जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित नए शोध में येल वैज्ञानिक मौत पर विजय पाने का दावा करते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, येल यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट और उनकी टीम ने सूअरों की मौत के एक घंटे बाद कुछ महत्वपूर्ण अंगों को फिर से सक्रिय कर दिया.

जर्नल ‘नेचर’ के अनुसार, ये रिसर्च इस विचार को चुनौती देता है कि हार्ट फेल (जो ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से होता है) अपरिवर्तनीय है. साथ ही ये रिसर्च मौत की परिभाषा के बारे में नैतिक सवाल भी उठाता है.

5. बिना शुक्राणु या अंडे की कोशिकाओं के कृत्रिम भ्रूण बनाने में सफलता

एक अन्य वैज्ञानिक सफलता जीवन के अर्थ पर सवाल उठाती है. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और कैल्टेक ने बिना किसी शुक्राणु या अंडे की कोशिकाओं का उपयोग किए एक कृत्रिम भ्रूण बनाया. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अनुसार, माउस स्टेम सेल का उपयोग करके बनाए गए भ्रूण ने एक मस्तिष्क, एक धड़कता हुआ दिल और शरीर के अन्य सभी अंगों की नींव विकसित की.

विज्ञान अभी तक केवल स्टेम कोशिकाओं के जरिए पूरा का पूरा कोई एक अंग विकसित नहीं कर सका है. लेकिन फिर भी यह एक बड़ा कदम माना जा सकता है. शरीर के बाहर अंगों का विकास शोधकर्ताओं को इनका अवलोकन करने का अवसर देगा जो वे गर्भ के अंदर नहीं देख पाते थे. इससे वे यह भी समझ पाएंगे कि क्यों बहुत से गर्भ सफल नहीं हो पाते हैं और ऐसा रोकने के लिए क्या किया जा सकता है.


Edited by Vishal Jaiswal