50 साल की उम्र में आंत्रप्रेन्योर बनने वाली नीलिमा ठाकुर की कहानी

नीलिमा ठाकुर ने 2016 में अपना हेयरकेयर ब्रांड Shine Herbals शुरू किया था. आज, इस ब्रांड के पास हेयर ऑयल, शैंपू, सीरम समेत 22 होम-मेड हेयर केयर प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है.

50 साल की उम्र में आंत्रप्रेन्योर बनने वाली नीलिमा ठाकुर की कहानी

Sunday May 07, 2023,

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अपने जीवन की शुरुआत में, नीलिमा ठाकुर ने दशकों तक बतौर इंग्लिश टीचर स्कूलों में काम किया. बाद में आठ वर्षों तक, उन्होंने यूनिवर्सिटीज में कम्यूनिकेशंस प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दी.

2016 में उनकी ज़िंदगी बदल गई. 50 साल की उम्र में, उन्होंने आंत्रप्रेन्योर बनने का फैसला किया. अपने जीवन के उस समय में, वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा.

वह कहती हैं, "मैं बहुत कम उत्साही महसूस करने लगी और जब भी कोई मुझसे बातचीत शुरू करता था तो लगभग टूटने की कगार पर होती थी."

डॉक्टर के नियमित दौरे और दवाओं के बावजूद, उनके मानसिक स्वास्थ्य में कुछ भी सुधार नहीं हुआ. यह वही समय था जब उन्होंने देखा कि उनके कई छात्र बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं.

वह कहती हैं, “मेरा प्राकृतिक जड़ी बूटियों और तेलों के प्रति झुकाव था. मैंने एक मिश्रण तैयार किया और इसे अपने छात्रों को दिया और दो महीने के भीतर उन्हें बालों के अच्छे विकास का अनुभव होने लगा.”

उन्होंने अपने छात्रों को बालों की देखभाल के उपाय देना जारी रखा और एक दिन, एक फेसबुक ग्रुप पर नुस्खा डालने का फैसला किया, जिसका वह हिस्सा थीं. उसी शाम, उन्हें एक दोस्त का फोन आया.

"वह [दोस्त] एक्साइटेड लग रहा था. उसने मेरी फेसबुक पोस्ट देखी थी और मुझे यह बताने के लिए फोन किया था कि फेसबुक पर नुस्खा साझा करने के बजाय, मैं एक बिजनेस शुरू कर सकती हूं," ठाकुर याद करते हुए बताती हैं कि सुझाव सुनने के बाद, वह खिलखिलाकर हंसने लगी.

इसके तुरंत बाद, दोस्त ने पहला ऑर्डर दिया, और जैसे ही यह बात फैली, ठाकुर को छह से सात ग्राहक मिल गए.

उनके ब्रांड Shine Herbals के पास 22 होम-मेड हेयर केयर प्रोडक्ट्स का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो है, जिसमें हेयर ऑयल, शैंपू, सीरम और बहुत कुछ शामिल हैं. वर्तमान में, ठाकुर अपने प्रोडक्ट 'शाइन हर्बल्स' फेसबुक पेज के माध्यम से बेचती हैं, जिसके करीब 4.4k फॉलोअर्स हैं.

जब उन्होंने पहली बार शुरुआत की, तो किसी को भी विश्वास नहीं हुआ कि वह इस काम को कर सकती है, और उन्होंने इसे दो साल तक सिक्रेट रखा, सब कुछ अपने दम पर मैनेज किया.

वह युवा उद्यमियों को सलाह देती हैं, “आप ऐसे और लोगों से मिलेंगे जो आपको हतोत्साहित करेंगे. ऐसे में आपको अपने हौसले बुलंद रखने होंगे. अपनी पीठ खुद ही थपथपाते रहो. और मैं आपके लिए एक उदाहरण हो सकती हूं क्योंकि मैंने बिना किसी के सहयोग के अपना बिजनेस शुरू किया. इसलिए, कभी हार मत मानो.”

"मैं दूसरों के लिए काफी जी चुकी हूं. अब मैं अपने लिए जीऊंगी,” वह कहती हैं.

(Translated by: रविकांत पारीक)

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Edited by रविकांत पारीक