जानिए एग्रिटेक स्टार्टअप्स क्या चाहते हैं इस बार बजट से, कैसे कृषि प्रधान भारत कर सकता है ग्रो

By Anuj Maurya
January 26, 2023, Updated on : Fri Jan 27 2023 05:37:46 GMT+0000
जानिए एग्रिटेक स्टार्टअप्स क्या चाहते हैं इस बार बजट से, कैसे कृषि प्रधान भारत कर सकता है ग्रो
भारत के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर सबसे अहम है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी आज भी खेती से होने वाली आय पर ही निर्भर करती है. आइए जानते हैं एग्रिटेक स्टार्टअप्स की इस बजट से क्या उम्मीदें हैं.
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आगामी 1 फरवरी को देश का आम बजट जारी होने वाला है. इस बजट (Budget 2023) से तमाम सेक्टर्स को बहुत सारी उम्मीदें हैं. कोई टैक्स में छूट चाहता है तो कोई बिजनेस को बढ़ाने के लिए खास तरह की मांग कर रहा है. इसी बीच एग्रीकल्चर (Agriculture) सेक्टर के स्टार्टअप और कंपनियां भी अपनी-अपनी उम्मीदें बता रही हैं. भारत के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर सबसे अहम है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी आज भी खेती से होने वाली आय पर ही निर्भर करती है. आइए जानते हैं एग्रीकल्चर सेक्टर और इससे जुड़े स्टार्टअप-बिजनेस को इस बार के बजट से क्या उम्मीदें हैं.


AgriBid Pvt. Ltd. के को-फाउंडर आशुतोष मिश्रा ने कहा, "फार्म बिल के साथ सरकार का लक्ष्य किसानों को व्यापक बाजार लिंकेज प्रदान करना था. अफसोस की बात है कि इसे लागू नहीं किया जा सका. इसके बावजूद हम उम्मीद करते हैं कि सरकार एग्रीटेक स्टार्टअप्स पर ध्यान केंद्रित करेगी जो किसानों के जीवन में बदलाव लाने का लक्ष्य रखते हैं. बजट से हमारी उम्मीद है कि चाहिए. बाजार में कृषि-स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए एक समर्पित नीति बनें. बाजार से जुड़ाव, सिंचाई, आनुवंशिक बीज आदि की दिशा में कई कृषि स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं. यह किसान और कृषि उद्यमी के बीच एक सहजीवी संबंध बनाने में एक लंबा रास्ता तय कर सकता है. बजट 2023-24 उस दिशा में सार्थक शुरुआत कर सकता है."


Gram Unnati के फाउंडर Aneesh Jain बजट से कृषि सेक्टर की उम्मीदें बताते हुए कहते हैं कि करोड़ों भारतीय कृषि के ऊपर अपनी आजीविका के प्राथमिक स्रोत के रूप में निर्भर हैं. इसी वजह से हर बजट में कृषि सेक्टर पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाता है. इस बार भी हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई स्कीम और प्रोजेक्ट लागू करेगी. किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पैदावार बढ़ाने वाली तकनीक और प्रजातियां किसानों के द्वारा अपनाई जाएं. इन तकनीक का प्रदर्शन किए जाने की स्कीम किसानों को इन्हें अपनाने में एक अहम योगदान दे सकती है.


ये स्कीम और प्रोजेक्ट डिजाइन करते वक्त ध्यान रखना होगा कि इन्हें गांव या ग्राम पंचायत स्तरों पर लागू किया जाए, वरना मार्केट लिंकेज में चुनौतियां आएंगी. साथ ही आधुनिक क्रॉप टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव कार्यक्रम भी चलाया जा सकता है. इन कार्यक्रमों से किसानों की यूरिया और डीएपी जैसे उर्रवरकों पर निर्भरता कम होगी. एफपीओ और एग्रिटेक कंपनियों को कृषि सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए वर्किंग कैपिटल क्रेडिट गारंटी स्कीम भी चालू कराई जा सकती है. इससे किसानों को उनकी फसल का भुगतान तुरंत मिल सकता है. साथ ही एफपीओ और एग्रीटेक कंपनियों के माध्यम से सीधा मार्केट से जुड़ाव हो सकता है.


Leads Connect के फाउंडर Navneet Ravikar बजट से उम्मीद करते हैं कि एफपीओ और किसानों को जीएसटी के जरिए फायदा पहुंचाना चाहिए और जीएसटी शून्य कर देनी चाहिए. साथ ही किसानों के लिए मंडी टैक्स को भी हटाए जाने की जरूरत है. यूनिवर्सल क्रॉप स्कीम लॉन्च होनी चाहिए, जिससे किसानों को फायदा हो. इसके तहत जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है, उनके लिए फसल बीमा योजना जीरो प्रीमियम पर होनी चाहिए. एक थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन होना चाहिए, जो क्लेम सेटलमेंट का काम करेगा. इससे जल्दी क्लेम निपटेगा और किसानों को फायदा होगा. इंश्योरेंस एक्ट में बदलाव कर के ऐसा किया जा सकता है, जिससे किसानों को जल्दी क्लेम मिल सकेगा. ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में जो सब्सिडी एफपीओ को मिल रही है, वह सब्सिडी एग्री फिनटेक सेक्टर में भी मिलनी चाहिए. प्राइवेट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन को भी ये सब्सिडी मिलनी चाहिए. इससे रिसर्च में ड्रोन का इस्तेमाल करना आसान हो सकेगा.


Omnivore के मैनेजिंग पार्टनर Mark Kahn कहते हैं कि एग्रिकल्चर एक्सपोर्ट कैपेक्स की फंडिंग करने की जरूरत है. साथ ही एक एग्रिकल्चर एक्सपोर्टस पॉलिसी की जरूरत है, जिसके तहत भले ही कुछ चीजों की कीमतें बढ़ें फिर भी उसका निर्यात करने की सुविधा हो. अभी तक ये होता है कि अगर किसी कमोडिटी की कीमत भारत में बढ़ने लग जाती है तो सरकार उसके निर्यात पर रोक लगा देती है, ताकि कीमत को कंट्रोल किया जा सके.


Gramophone के सीईओ और को-फाउंडर Tauseef Khan कहते हैं- एक साल के लिए एक पॉलिसी लाए जानने की जरूरत है, जिससे ये तय हो सकते कि कितने निर्यात की इजाजत दी जाएगी और प्लानिंग और बिजनेस के नजरिए से सरकार की तरफ से खरीद का स्तर क्या होगा. अगर कीमत के नजरिए से फायदा होता है तो वह किसानों तक पहुंचे.