IIT खड़गपुर पासआउट का स्टार्टअप बैंकों और फाइनेंशियल फर्म्स के लिए इंश्योरेंस प्रोसेस को बना रहा है सरल और ऑटोमेटेड, ताकि कंपनियों को मिले बेहतर रिटर्न

बैंकों, वित्तीय फर्मों के लिए एंड-टू-एंड स्मार्ट AI इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप आर्टिवैटिक
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"बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप आर्टिवैटिक बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए इंश्योरेंस के प्रोसेस को सरल और ऑटोमेटेड बना रहा है ताकि इससे लागत और समय दोनों की बचत हो सके और कंपनियों को बेहतर रिटर्न मिल सके।"


(L-R) आर्टिवैटिक के कॉ-फाउंडर्स लायक सिंह और पुनीत टंडन

(L-R) आर्टिवैटिक के कॉ-फाउंडर्स लायक सिंह और पुनीत टंडन



बेंगलुरु स्थित आर्टिवैटिक आरओआई, क्रॉस-सेक्टर इंटेलिजेंस और पर्सनलाइज्ड़ रिकमंडेशन एक्सपीरियंस को बेहतर बनाते हुए रियल-टाइम डिसीजन मेकिंग को ऑटोमेट करने के लिए सायकोलॉजी, जीनोमिक्स साइंस और न्यूरोसाइंस क्षमताओं के पैटर्न का उपयोग करता है।


इसी बात को अगर हम शाब्दिक शब्दों में समझाएं तो इसका मतलब है कि आर्टिवैटिक बैंकों और इंश्योंरेंस कंपनियों के लिए इंश्योंरेंस के प्रोसेस को सरल और ऑटोमेटेड बना रहा है ताकि इससे लागत और समय दोनों की बचत हो सके और कंपनियों को बेहतर रिटर्न मिल सके।

को-फाउंडर्स

आर्टिवैटिक के को-फाउंडर लायक सिंह IIT खड़गपुर (2011) से स्नातक हैं और आगरा में पैदा हुए हैं। लायक ने 50 लाख रुपये के निवेश के साथ आर्टिवैटिक की शुरुआत की। Insurtech और Health सेक्टर में Artivatic उनका तीसरा स्टार्टअप है। इससे पहले वह Fullerene Solutions and Services (P) Ltd, शिक्षा के लिए पोर्टफोलियो कंपनी (eStudyCorner) ऑनलाइन डेटिंग (dateIITians & COGXIO), जीवन शैली और स्वास्थ्य उपक्रम (LIVEONGO) में संस्थापक और सीईओ थे।


पुनीत टंडन आर्टिवैटिक के कॉ-फाउंडर और सीटीओ हैं। पुनीत का जन्म और परवरिश लखनऊ में हुआ है। पुनीत ने 2001 में एनजेआईटी यूएसए से मास्टर्स किया। इसके बाद उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक कनाडा, अमेरिका, जापान और भारत में काम किया। उनके पास टेक, ऑपरेशंस, डिलीवरी में कुल 18 साल का अनुभव है। इसके बाद उन्होंने अपना टेक रियल एस्टेट वेंचर प्रॉपर्टी ऑक्शन शुरू किया। वह अपने परिवार में मौजूद थे और बैंगलोर स्थित IoT & Health कंपनी में शामिल हो गए। उन्होंने लगभग 2 साल वहाँ बिताए और फिर आगे जारी रखने के लिए लैक के साथ COGXIO में शामिल हो गए।

कैसे हुई शुरुआत

आर्टिवैटिक की यात्रा दिसंबर 2016 में शुरू हुई जब लायक सिंह और पुनीत टंडन ने एआई इंजन बनाने के लिए मशीन लर्निंग (एमएल) में अपने अनुभव का उपयोग करने का फैसला किया, जो बैंकों को तेजी से ग्राहकों को जोड़ने में मदद कर सकता है और क्रेडिट हिस्ट्री का अध्ययन करके नॉन-परफॉर्मिंग असेट वाले संभावित क्लाइंट्स को कम कर सकता है।


Artivatic की स्थापना से पहले, दोनों फाउंडर्स के पास स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट्स के साथ काम करने का अच्छा अनुभव था। लायक बताते हैं कि जब वे अपने पिछले स्टार्टअप के साथ काम कर रहे थे जो मानव व्यवहार विश्लेषण (human behaviour analysis) पर केंद्रित था, उन्होंने सोचा कि क्या वे तकनीक की मदद से मनुष्यों के लिए ये निर्णय लेने में सक्षम होंगे, वे बेहतर निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं, और इस तरह आर्टिवैटिक का जन्म हुआ।


वर्तमान में (मुंबई ऑफिस समेत) आर्टिवैटिक में 32 टेक-एक्सपर्ट्स की कोर टीम है।



क्या है आर्टिवैटिक

पेशेंट ऑन-बोर्डिंग, पेशेंट प्रोफाइलिंग, मेडिकल और डायग्नॉस्टिक डेटा डिजिटायजेशन, हेल्थ रिस्क प्रोफाइलिंग, प्रायर-ऑथराइजेशन और दावों से इनकार करने की भविष्यवाणी, हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ क्लेम्स, पॉलिसी डिसीजन, अंडरराइटिंग को सक्षम करने के लिए आर्टिवेटिक एक एआई-डिसीजन प्लेटफॉर्म है। बीमा के लिए, डिवाइस-बेस्ड हेल्थ इंटेलीजेंस, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वास्थ्य जनसंख्या, स्वास्थ्य निजीकरण, और बहुत कुछ सेवाओं के लिए काम कर रहा है ये प्लेटफॉर्म। वे अपने एल्गोरिदम, उत्पादों और समाधान विकसित करने के लिए एमएल / डीप टेक / न्यूरोसाइंस / एनएलपी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हैं।


फाउंडर्स की यह जोड़ी एक ऐसी मशीन का निर्माण कर रही है जो मिनटों में बीमा पॉलिसी या व्यक्तियों को ऋण प्रदान कर सकती है। मशीन एक भावी ग्राहक के बैंक इतिहास का अध्ययन करने में सक्षम है और एक पॉलिसी को अंडरराइट करने या एक ऋण को खारिज करने से पहले उनके आधार विवरण को सत्यापित करने में सक्षम है।


लायक कहते हैं,

Artivatic ग्राहकों और उनके क्रेडिट स्कोर को सत्यापित करने के लिए भारत में बैंकिंग क्षेत्र में न्यूरो-भाषाई प्रोग्रामिंग (एनएलपी) शुरू करने वाला पहला स्टार्टअप बन गया है।

आर्टिवैटिक के क्लाइंट्स

आईसीआईसीआई प्रोडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, बजाज एलियांज लाइफ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एचडीएफसी एर्गो, आदित्य बिरला जैसी नामचीन इंश्योरेंस कंपनियां आर्टिवैटिक से जुड़ी हुई है। इसके अलावा बजाज कैपिटल जैसी कंपनियां भी आर्टिवैटिक से जुड़कर लोगों की इंश्योरेंस पॉलिसी कवर बना रही है। इन कंपनियों के लिए आर्टिवैटिक ने अब तक जितने भी प्रॉडक्ट्स या मॉड्यूल बनाए हैं, वे सारे ऑटोमेटेड है।


लायक बताते हैं,

हमारे प्रोडक्ट्स में फॉर्म-फिलअप जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। सब कुछ ऑटोमेटेड है। जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।


फंडिंग

आर्टिवैटिक ने टोटल करीब 5 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है। जिसमें को-फाउंडर लायक सिंह ने खुद 50 लाख रुपये इनवेस्ट किए हैं। उन्होंने करीब साल 2017-18 में 1.5 करोड़ रुपये ऐंजल इनवेस्टर्स से जुटाए। इसके बाद उन्होंने अक्टुबर, 2018 में IAN (इंडियन ऐंजल नेटवर्क) से करीब 3 करोड़ रुपये बतौर फंडिंग जुटाए।

भविष्य की योजनाएं

आर्टिवैटिक के भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए कॉ-फाउंडर लायक सिंह ने बताया कि सप्लाई चेन, एग्रीटेक, लॉजिस्टिक, माइक्रो इंश्योरेंस आदि सेक्टर्स में इसी टेक्नोलॉजी को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर को भी वे इंश्योरटेक बनाने की ओर अग्रसर हैं। इसका मतलब है कि वे ई-कॉमर्स कंपनियों को इंश्योरेंस कंपनियों से कनेक्ट कर देते हैं। दोनों के बीच का रोड मेप आर्टिवैटिक हैंडल करता है। इसके अलावा वे इंश्योरेंस कंपनियों का रेवेन्यू कैसे बढ़ाना है, इस ओर भी हमारा स्टार्टअप काम कर रहा है। आर्टिवैटिक अब पिछले छह महीनों से इंश्योरेंस कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट को बढ़ाने में लगा हुआ है।


लायक बताते हैं,

अगर कोई इंश्योरेंस कंपनी शुरु करना चाहता है तो उनको बस सिर्फ लाइसेंस चाहिए, इसके बाद का पूरा प्रोसेस आर्टिवैटिक करता है।