चैंपियन शूटर देवरानी-जेठानी ने तापसी और भूमिका को सिखाई निशानेबाज़ी

चैंपियन शूटर देवरानी-जेठानी ने तापसी और भूमिका को सिखाई निशानेबाज़ी

Thursday October 24, 2019,

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"बागपत (उ.प्र.) के जौहरी गांव की बुजुर्ग चैंपियन शूटर प्रकाशी और चंद्रो को आज अपनी अस्सी साल की उम्र में इसका शायद ही कभी कयास रहा हो कि एक दिन उनकी जिंदगी पर फिल्म बनेगी और उन्हे तापसी पन्नू, भूमि पेडनेकर को ढाई महीने तक अपने घर पर रखकर शूटिंग सिखानी पड़ेगी। जौहरी गांव को प्रकाशी-चंद्रो पर गर्व है।"

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रियल लाइफ शूटर दादी प्रकाशो और चंद्रो तोमर के साथ भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू


उत्तर प्रदेश सरकार से टैक्स फ्री 'सांड़ की आँख' 25 अक्तूबर को रिलीज़ हो रही है। इस फ़िल्म के साथ एक बड़ा दिलचस्प वाकया जुड़ा हुआ है, किरदार तापसी पन्नू और भूमिका पेडनेकर को ट्रेंड करने वाली बागपत (उ.प्र.) की इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियन तोमर परिवार की देवरानी-जेठानी चन्द्रो और प्रकाशी का। दरअसल, पूरी फिल्म देवरानी-जेठानी की शख्सियत पर ही फोकस है। फिल्म में तापसी पन्नू बनी हैं प्रकाशी और भूमि पेडनेकर हैं चंद्रो तोमर के किरदार में।


इस फिल्म की पटकथा से हटकर, चंद्रो और प्रकाशी के संघर्षपूर्ण निजी जीवन की कठोरता और विश्व फ़लक पर उनकी बेमिसाल कामयाबी पूरी पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरक दास्तान है। उल्लेखनीय है कि 'योर स्टोरी' की ओर से उन पर पहले एक पठनीय रिपोर्ट फ़ोकस हो चुकी है, लेकिन उनकी जिंदगी के कई अनछुए प्रसंग इस फिल्म चर्चा के बहाने आज साझा हो रहे हैं।


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   शूटर दादी के नाम से मशहूर प्रकाशी तोमर बताती हैं कि आज उनकी उम्र है 65 के पार और काम है गोलियां दागना! एक वक़्त की बात है, 1998-99 के आसपास की। वह ट्रेनिंग दिलवाने के लिए पोती को लेकर गांव के ही शूटिंग रेंज पर पहुंचीं। पोती शूटिंग से डर रही थी तो पहली बार उन्होंने जिंदगी में खुद पिस्तौल उठाकर निशाने पर दाग दिया। लोग वाह-वाह करने लगे। दादी ने बुल्स आइ हिट कर दी।


दादी के निशाने को इत्तेफ़ाक मानते हुए जोहड़ी रायफ़ल क्लब के कोच ने दादी से दोबारा निशाना साधने को कहा। दूसरी बार भी दादी का निशाना सटीक रहा। कोच ने देखा कि जो शूटिंग सीखने के लिए लोग दशकों मशक्कत करते हैं, दादी के पास वह पहले से ही मौजूद है। कोच ने उन्हें ट्रेनिंग लेने की सलाह दी तो हौसला बढ़ा और वह खुद शूटिंग के मैदान में उतर पड़ीं, फिर तो नेशनल चैंपियन तक बन गईं। 




बागपत के जोहरी गांव को टॉप शूटर प्रकाशी और चंद्रो पर गर्व होता है। उम्रदराज पड़ाव पर जब लोग ख़ुद का बहुत सारे कामों से पीछा छुड़ा लेते हैं, इन दोनो महिलाओं ने कुछ ऐसा कारनामा किया कि लोगों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। उन्होंने लगभग 65 और 57 की उम्र में शूटिंग शुरू की थी और 70 की उम्र तक करती रहीं। इस समय उनकी उम्र 82 और 80 साल की है। 65 साल की उम्र तक चंद्रो एक आम महिला की तरह घर में बच्चों के साथ घर-गृहस्थी संभालती रही थीं।


प्रकाशी और चंद्रो घर का सादा-सूदा खाना खाती हैं दाल-चावल, सब्जी आदि। खाने के बाद गुड़ चाहिए और दूध के बिना तो उनको रहा नहीं जाता। उनको अपनी भाषा-बोली और अपने पहनावे पर गर्व है। वही सब उन्होंने तापसी और भूमि को सिखाया है। चंद्रो और प्रकाशी में आज तक कोई नोक-झोक नहीं हुई। वे आपस में खूब प्यार से रहती हैं। ट्रेनिंग के दौरान तापसी और भूमि ढाई महीने तक उनके घर पर ही साथ-साथ रहीं।