फल-फूल, फसलों की खेती ने एमपी के किसानों को किया मालामाल

फल-फूल, फसलों की खेती ने एमपी के किसानों को किया मालामाल

Monday October 28, 2019,

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उन्नत तरीके से आधुनिक खेती कर किस तरह मध्य प्रदेश और राजस्थान के जागरूक किसान फल-फूल की किसानी में मालामाल हो रहे हैं, इसकी मिसाल बन चुके हैं इंदौर के प्रवीण, राधेश्याम, भिंड के नारायण सिंह, दतिया के लाखन सिंह, दमोह की किसान विद्यारानी, बारां (राजस्थान) के गांव कटावर के उन्नत कृषक ब्रजराज गौड़।

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किसान नारायण सिंह बाथम (फोटो सोशल मीडिया)

दतिया के गांव भरसूला के लाखन सिंह, दमोह की विद्यारानी, इंदौर के प्रवीण और राधेश्याम तंवर आदि मध्य प्रदेश के वे कामयाब किसान हैं, जो अलग-अलग तरह की फसलों और फल-फूल की खेती में मिसाल कायम कर चुके हैं। इन्ही प्रगति किसानों की कतार में खड़े हैं बारां (राजस्थान) के गांव कटावर के उन्नत कृषक ब्रजराज गौड़ भी, जिन्हे ब्लड प्रेशर की बीमारी ने जैविक खेती की दिशा में मोड़ दिया। इस समय वह अपने आसपास के गांवों के 50 किसानों का समूह बनाकर 150 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं। अपनी खेती की उपज सब्जियां और अनाज बारां के अलावा जयपुर, कोटा समेत कई जिलों में 30 प्रतिशत प्रीमियम भावों पर 'श्री महाकाल आर्गेनिक इंडिया' के नाम से बेच रहे हैं। इस तरह अपनी कार्य कुशलता और मेहनत से ब्रजराज हर साल 4 लाख की लागत से खेती में 20 लाख रुपए कमा रहे हैं।


ऐसे ही, दतिया (म.प्र.) के गांव भरसूला के 74 वर्षीय बुजुर्ग किसान लाखन सिंह रावत 28 बीघे खेत में फल-फूल की किसानी कर रहे हैं। उनके पांच बीघे खेत पर कटहल, चन्दन, नींबू, मौसम्बी, संतरा, अनार, नारियल, केला, चीकू, छुआरे, बादाम, पपीता, अंगूर, आंवला, चिली, चकोतरा, सीताफल, इलायची, सुपाड़ी, गुलाब, गेंदा, सतरंगी आदि के फल-फूल लहलहा रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार उद्यानिकी प्रदर्शन में उनको उन्नत पपीता, आंवला, अमरूद, गुलाब, अनार, मौसम्बी, धनिया के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। उनके साथ परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं। उनके पास खुद का एचएमटी ट्रैक्टर है। सिंचाई के लिए उन्होंने दो ट्यूबवेल लगा रखे हैं, साथ ही एक कुंआ और नहर से भी पानी ले लेते हैं। वह अपने खेतों पर फल-फूल के साथ गौवंश भी पालते हैं। एक साल में 50 हजार की लागत से उनको अकेले गन्ने की ही खेती से चार-पांच लाख की कमाई हो जाती है। 


दमोह के गांव घनश्याम पुरा की महिला कृषक विद्यारानी लोधी लगभग 30 एकड़ खेत में गेहूं, चना, मूंग, उड़द, सोयाबीन तो उगाती ही हैं, उनको सबसे ज्यादा कमाई रतालू की खेती से हो रही है। वह अपनी खेती में उन्नत तकनीक और जैविक गोबर की खाद, बायोगैस स्लरी, वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करती हैं। रतालू की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह के वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उनकी खेती जिले में मिसाल बन गई। प्रेरणा लेकर और भी किसान रतालू की खेती कर रहे हैं। इंदौर के गांव पालकांकरिया के युवा किसान प्रवीण यादव ने एक साल पहले मशरूम की खेती से नवाचार शुरू किया था। उन्होंने पहली बार आयस्टर मशरूम का 10 किलो बीज उत्तराखंड से खरीदा, जिससे एक क्विंटल गीला मशरूम पैदा हुआ। सुखाने पर वह 20 किलो रह गया, जिसकी बाजार से 20 हजार रुपए कीमत मिली। इसके अलावा वह दूधिया (मिल्की) मशरूम में एक चौथाई लागत लगाकर दो गुना से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।





इंदौर के ही गांव मोरखेड़ा के एक अन्य उद्यमशील किसान हैं राधेश्याम तंवर, जो गुलाब और गेंदे की खेती से मालामाल हो रहे हैं। पहली बार उनको फूलों की खेती की प्रेरणा स्थानीय मंडी से मिली, जहां उन्होंने देखा की बिक्री के लिए फूलों की अच्छी आवक और किसानों को भरपूर कमाई हो रही है। वह खेती में निम्बोली, नीम की पत्तियों, करंज, सीताफल और बेशरम के पत्ते सड़ाकर जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। पहली बार वह दोस्तों के सहयोग से नैनोद से गुलाब की पांच हजार कलमें खरीद लाए और उसे अपने 10 बीघे खेत में से एक एकड़ हिस्से में रोप दिया। उसके बाद दस हजार में यलो गोल्ड गेंदे लाकर रोप दिए। दोस्तों की मदद से ही सिंचाई के लिए 16 एमएम वाला ड्रिप सिस्टम लगा लिया। फूल तैयार हो जाने पर बिक्री के लिए उन्होंने देपालपुर के तीन दुकानदारों से 30 रुपए प्रति किलो सालाना दर पर सौदा कर लिया। अब उनको हर महीने दस हजार रुपए की कमाई हो रही है।


इसी तरह प्याज, मिर्च और बैगन की खेती ने भिण्ड की गोहद तहसील के किसान नारायण सिंह बाथम की तकदीर बदल दी है। गुजरात के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी उनको श्रेष्ठ किसान के रूप में 51 हजार रुपये से सम्मानित कर चुके हैं। वह डेढ़ लाख रुपए की लागत से खेती में साढ़े 8 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा निकाल लेते हैं। उन्नत तकनीक से ही छत्तीसगढ़ में किसानों खेत उन्नत किस्म के पौधों के अलावा शिमला, मिर्च, अदरक, हल्दी, केला, कपास टमाटर और परवल से लहलहा रहे हैं। वह खेती में अब ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंक्लर और पावर ट्रिलर ट्रैक्टर जैसे आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।